सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   There should be a museum for the works of poet Gumani: Uma Bhatt

कवि गुमानी की रचनाओं के लिए होना चाहिए संग्रहालय : उमा भट्ट

संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Tue, 10 Mar 2026 11:25 PM IST
विज्ञापन
There should be a museum for the works of poet Gumani: Uma Bhatt
गंगोलीहाट के उपराड़ा में कवि गुमानी की जयंती पर परिचर्चा आयोजित की गई। संवाद
विज्ञापन
गंगोलीहाट/बेड़ीनाग ( पिथौरागढ़)। पंडित लोकरत्न पंत, गुमानी की 236वीं जयंती के अवसर पर गुमानी का साहित्यिक योगदान विषय पर उनके पैतृक स्थान उपराड़ा गंगोलीहाट में परिचर्चा का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता सेवानिवृत प्रो. उमा भट्ट ने कहा कि गुमानी संस्कृत के उत्कृष्ट कवियों में से एक हैं। उन्होंने लोक साहित्य में गुमानी के योगदान पर चर्चा करते हुए कहा कि उनकी रचनाओं के लिए संग्रहालय होना चाहिए। इससे उनकी रचनाएं आम जन-मानस को आसानी से उपलब्ध हो सकें।
Trending Videos

राजकीय महाविद्यालय गणाई गंगोली के प्राचार्य प्रो. सिद्धेश्वर कुमार सिंह ने कवि गुमानी की रचनाओं को लोक हितकारी बताया और उनकी कविता का वाचन किया। प्रो. जीसी पंत ने गुमानी की अनेक रचनाओं को साझा किया। साथ ही गुमानी होली उत्थान समिति को 51,000 रुपये की सहयोग राशि भेंट की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बेड़ीनाग महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. बीएम पांडेय ने आयोजन को लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए प्रासंगिक बताया। बेड़ीनाग एवं गंगोलीहाट महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने काव्यपाठ प्रस्तुत किया। गंगोलीहाट और गणाई गंगोली महाविद्यालय के सह आयोजन में हुए इस कार्यक्रम में भास्कर अस्थाना, एचजीवीएस के अध्यक्ष राजेंद्र बिष्ट, गुमानी होली उत्थान समिति के सचिव गिरीश जोशी, संजय पंत, सुरेश चंद्र सुयाल, डॉ. लीलाधर मिश्र, डाॅ. जेएन पंत और क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन


.............
कहे गुमानी अंगरेजन से कर लो चाहे जो मन में...
आदि कवि गुमानी अंग्रेजों की बांटो और राज करो की नीति पर चलने वाले राजाओं से रहे नाराज
गिरीश पंत
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। बादशाह दिल्ली में होता, फूट ना होती राजन में, हिंदुस्तान मुश्किल होता बस में करना मुद्दतन में, कहे गुमानी अंगरेजन से कर लो चाहे जो मन में, धरती पे नहीं वीर तमाशा तुम्हें दिखाता जो रण में। यह पंक्तियां कुमाऊंनी भाषा के पहले कवि माने जाने वाले लोकरत्न पंत गुमानी की हैं। वे अपनी खड़ी बोली, संस्कृत और कुमाऊंनी में लिखी रचनाओं के लिए जाने जाते हैं।
गुमानी के काल में संचार सेवा न होना, हिंदी साहित्य और कवियों के बीच आपसी समन्वय की कमी सहित अनेक कारणों से वह प्रसिद्ध नहीं हो पाए। भारतेंदु हरिश्चंद्र से पहले खड़ी बोली में कविता करने की बाद भी उन्हें उपाधि ना मिल पाना विडंबना ही कहा जा सकता है। जो साहित्यकार और कवि उनके बारे में जानते हैं वह गुमानी को हिंदी खड़ी बोली का पहला कवि मानते हैं। वह कवि के साथ राज वैद्य और चित्रकार भी थे। वर्ष 1790 में काशीपुर में जन्मे गुमानी का वास्तविक नाम लोकरत्न पंत था।
मूल रूप से गंगोलीहाट के उपराड़ा गांव के निवासी देवनिधि पंत के घर पैदा हुए लोकरत्न बचपन से ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। माता-पिता उन्हें प्यार से गुमानी कहते थे, जिस कारण उनका यही नाम प्रसिद्ध हो गया। उनकी समस्त रचनाओं में गुमानी नाम का ही उल्लेख मिलता है। उनके पिता चंद्रवंशी राजाओं के राजवैद्य थे। विरासत में मिली आयुर्वेद की शिक्षा ने उन्हें इतना आगे पहुंचाया कि उन्होंने आयुर्वेद पर ज्ञानभौज्यमंजरी नाम से ग्रंथ की रचना कर डाली। गुमानी ने अंग्रेजों के राज को घोर कलयुग का आगाज बताया था। वह हिंदुस्तान के उन राजाओं से भी नाराज रहे जो अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो वाली नीति पर चल रहे थे। राजकवि होने के बावजूद गुमानी ने अपनी रचनाओं में आम लोगों के दुख दर्द व तत्कालीन स्थितियों को जगह दी। दुर्भाग्य है कि राज्य बनने के बाद भी गुमानी को सरकारों ने याद नहीं किया। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed