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Rishikesh News: गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Tue, 28 Apr 2026 01:59 AM IST
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नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक अंतर्गत भागीरथी आश्रम से लेकर लक्ष्मणझूला जिलाधिकारी कैंप कार्यालय तक गो भक्तों ने पदयात्रा रैली निकाली। रैली के माध्यम से गो भक्तों ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर प्रदेश और केंद्र सरकार से गोमाता को राष्ट्रीय माता घोषित करने की मांग की। जिलाधिकारी कैंप कार्यालय में गोभक्तों ने यमकेश्वर तहसीलदार वैभव जोशी के माध्यम से राज्यपाल सेवानिवृत्त ले. जनरल गुरमीत सिंह और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ज्ञापन भेजा।
सोमवार को गोभक्त भागीरथी आश्रम के मुख्य गेट पर एकत्रित हुए। आश्रम के मुख्य गेट से गोभक्तों ने लक्ष्मणझूला जिलाधिकारी कैंप कार्यालय तक करीब एक से डेढ़ किमी की पदयात्रा की। राज्यपाल और राष्ट्रपति को सौंपे ज्ञापन के माध्यम से गोभक्तों ने कहा कि भारतीय देशी गो वंश हमारी संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। जब तक गोमाता असुरक्षित है, तब तक हमारी संस्कृति पूर्णता अधूरी है। जिस प्रकार काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल लोक के माध्यम से भारत की आध्यात्मिक आभा को पुनर्जीवित किया है, उसी प्रकार गोमाता को राष्ट्रीय सम्मान देकर भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान के इस महायज्ञ की पूर्णाहूति कर सकते हैं। इस मौके पर अखिल ब्रह्मांडनायक स्वामी कमलेशानंद गिरि महाराज, स्वामी दशरानंद महाराज, राजेंद्र दास, स्वामी अशोक आनंद, स्वामी माधवानंद, स्वामी तीर्थानंद, स्वामी विशालआनंद, जीतू अवस्थी, अश्वनी गुप्ता, विकास भंडारी, विनीता नौटियाल, वृंदावनदास, ईश्वरदास, रामदास आदि शामिल रहे।
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सोमवार को गोभक्त भागीरथी आश्रम के मुख्य गेट पर एकत्रित हुए। आश्रम के मुख्य गेट से गोभक्तों ने लक्ष्मणझूला जिलाधिकारी कैंप कार्यालय तक करीब एक से डेढ़ किमी की पदयात्रा की। राज्यपाल और राष्ट्रपति को सौंपे ज्ञापन के माध्यम से गोभक्तों ने कहा कि भारतीय देशी गो वंश हमारी संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। जब तक गोमाता असुरक्षित है, तब तक हमारी संस्कृति पूर्णता अधूरी है। जिस प्रकार काशी विश्वनाथ धाम और महाकाल लोक के माध्यम से भारत की आध्यात्मिक आभा को पुनर्जीवित किया है, उसी प्रकार गोमाता को राष्ट्रीय सम्मान देकर भारत के सांस्कृतिक पुनरुत्थान के इस महायज्ञ की पूर्णाहूति कर सकते हैं। इस मौके पर अखिल ब्रह्मांडनायक स्वामी कमलेशानंद गिरि महाराज, स्वामी दशरानंद महाराज, राजेंद्र दास, स्वामी अशोक आनंद, स्वामी माधवानंद, स्वामी तीर्थानंद, स्वामी विशालआनंद, जीतू अवस्थी, अश्वनी गुप्ता, विकास भंडारी, विनीता नौटियाल, वृंदावनदास, ईश्वरदास, रामदास आदि शामिल रहे।
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