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Rishikesh News: जुलेडी में अब भी खुले में शौच को मजबूर लोग
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पंचायती राज विभाग के दावों और जमीनी सच्चाई के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। विकासखंड यमकेश्वर की जुलेडी पंचायत को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया जा चुका है, लेकिन हकीकत यह है कि यहां करीब ढाई दर्जन परिवार आज भी शौचालय के अभाव में खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। ऐसे में विभाग के दावे सवालों के घेरे में हैं और व्यवस्था की पोल खोलते नजर आ रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले पांच वर्षों से ग्राम पंचायत की बैठकों में लगातार शौचालय निर्माण की मांग उठाई जा रही है, लेकिन हर बार विभागीय स्तर पर अनसुनी कर दी जाती है। कई बार यह कहकर टाल दिया जाता है कि योजना बंद हो चुकी है। इतना ही नहीं, जुलेडी और पैंया गांव के करीब आधा दर्जन परिवार ऐसे भी हैं, जिन्हें 10 वर्ष पूर्व बने शौचालय की 12 हजार रुपये की धनराशि आज तक नहीं मिली। जानकारी के लिए लगातार पत्राचार के बावजूद न तो कोई स्पष्ट जवाब मिला और न ही भुगतान हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर विभाग गांव को ओडीएफ घोषित कर अपनी पीठ थपथपा रहा है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी से लोग आज भी खुले में शौच के लिए मजबूर हैं।
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पंचायतों में बिना शौचालयों के परिवारों की जानकारी जुटाई जा रही है। पंचायत सचिवों के जरिए जानकारी जुटाकर शौचालय निर्माण के लिए वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। प्रत्येक परिवार को शौचालय देना सरकार की योजना है। पंचायत विभाग इसके लिए समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करता है। - दिनेश रावत, सहायक विकास अधिकारी यमकेश्वर
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ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले पांच वर्षों से ग्राम पंचायत की बैठकों में लगातार शौचालय निर्माण की मांग उठाई जा रही है, लेकिन हर बार विभागीय स्तर पर अनसुनी कर दी जाती है। कई बार यह कहकर टाल दिया जाता है कि योजना बंद हो चुकी है। इतना ही नहीं, जुलेडी और पैंया गांव के करीब आधा दर्जन परिवार ऐसे भी हैं, जिन्हें 10 वर्ष पूर्व बने शौचालय की 12 हजार रुपये की धनराशि आज तक नहीं मिली। जानकारी के लिए लगातार पत्राचार के बावजूद न तो कोई स्पष्ट जवाब मिला और न ही भुगतान हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर विभाग गांव को ओडीएफ घोषित कर अपनी पीठ थपथपा रहा है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी से लोग आज भी खुले में शौच के लिए मजबूर हैं।
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पंचायतों में बिना शौचालयों के परिवारों की जानकारी जुटाई जा रही है। पंचायत सचिवों के जरिए जानकारी जुटाकर शौचालय निर्माण के लिए वैधानिक कार्यवाही की जाएगी। प्रत्येक परिवार को शौचालय देना सरकार की योजना है। पंचायत विभाग इसके लिए समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करता है। - दिनेश रावत, सहायक विकास अधिकारी यमकेश्वर