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Rishikesh News: बरसात में स्क्रब टाइफस का बढ़ रहा खतरा
Sun, 02 Aug 2026 08:11 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
Updated Sun, 02 Aug 2026 08:11 PM IST
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- चिगर माइट के काटने से होता है संक्रमण, समय पर इलाज जरूरी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। बरसात के मौसम में पर्वतीय क्षेत्रों में स्क्रब टाइफस के मामले बढ़ने लगे हैं। यह एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है जो ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक बैक्टीरिया के कारण होता है।
चिकित्साधिकारी डॉ. हिमांशी ने बताया कि यह बीमारी संक्रमित लार्वा माइट्स यानी चिगर्स के काटने से फैलती है। इसे आम भाषा में घास का कीड़ा भी कहते हैं। यह रोग बैक्टीरिया से होता है जो चिगर माइट के काटने से शरीर में जाता है। स्क्रब टाइफस का कीड़ा नमी वाले स्थानों, कम रोशनी, घास-फूस और पशुओं में पाया जाता है। अधिक गर्मी और बरसात में इसका प्रकोप सबसे ज्यादा होता है। हालांकि यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे नहीं फैलता।
स्क्रब टाइफस को पहाड़ी रोग भी कहा जाता है क्योंकि यह कीड़ा पहाड़ों में अधिक पाया जाता है। इस कीड़े के काटने वाली जगह पर गहरा काला निशान बन जाता है। इसमें रोगी को तेज बुखार के साथ सिरदर्द होता है। पीठ दर्द, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, कमजोरी, चिड़चिड़ापन, दिमागी बुखार आदि होता है। इलाज में देरी होने पर मरीज कोमा में जा सकता है। कीट के काटने से निमोनिया, दिल और लीवर पर असर पड़ता है।
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कोट-
कीट के काटने के लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। जांच के बाद डॉक्टर की ओर से दी गई दवा का पूरा कोर्स लेना जरूरी है। सही समय पर उपचार से मरीज जल्दी ठीक हो जाता है। - डॉ. हिमांशी चिकित्साधिकारी, पीएचसी लक्ष्मणझूला
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। बरसात के मौसम में पर्वतीय क्षेत्रों में स्क्रब टाइफस के मामले बढ़ने लगे हैं। यह एक गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है जो ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक बैक्टीरिया के कारण होता है।
चिकित्साधिकारी डॉ. हिमांशी ने बताया कि यह बीमारी संक्रमित लार्वा माइट्स यानी चिगर्स के काटने से फैलती है। इसे आम भाषा में घास का कीड़ा भी कहते हैं। यह रोग बैक्टीरिया से होता है जो चिगर माइट के काटने से शरीर में जाता है। स्क्रब टाइफस का कीड़ा नमी वाले स्थानों, कम रोशनी, घास-फूस और पशुओं में पाया जाता है। अधिक गर्मी और बरसात में इसका प्रकोप सबसे ज्यादा होता है। हालांकि यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में सीधे नहीं फैलता।
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स्क्रब टाइफस को पहाड़ी रोग भी कहा जाता है क्योंकि यह कीड़ा पहाड़ों में अधिक पाया जाता है। इस कीड़े के काटने वाली जगह पर गहरा काला निशान बन जाता है। इसमें रोगी को तेज बुखार के साथ सिरदर्द होता है। पीठ दर्द, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, कमजोरी, चिड़चिड़ापन, दिमागी बुखार आदि होता है। इलाज में देरी होने पर मरीज कोमा में जा सकता है। कीट के काटने से निमोनिया, दिल और लीवर पर असर पड़ता है।
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कोट-
कीट के काटने के लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। जांच के बाद डॉक्टर की ओर से दी गई दवा का पूरा कोर्स लेना जरूरी है। सही समय पर उपचार से मरीज जल्दी ठीक हो जाता है। - डॉ. हिमांशी चिकित्साधिकारी, पीएचसी लक्ष्मणझूला