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Rishikesh News: 20 अगस्त से ट्रकों की हड़ताल की चेतावनी
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ट्रांसपोर्ट नगर समेत अन्य मांगे पूरी नहीं होने से ट्रांसपोर्टर नाराज
15 साल से ट्रांसपोर्ट नगर की हो रही मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। उत्तराखंड देवभूमि ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन महासंघ (गढ़वाल मंडल) ने सरकार को चेतावनी दी है कि ट्रांसपोर्टरों की वर्षों पुरानी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 20 अगस्त से ट्रकों की हड़ताल की जाएगी। महासंघ का कहना है कि पिछले 15 वर्षों से ट्रांसपोर्ट नगर की मांग उठाई जा रही है लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया।
गढ़वाल मंडल अध्यक्ष कृष्णा बड़ोनी और कुमाऊं मंडल अध्यक्ष राकेश नेगी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से लेकर मुख्यमंत्री को कई बार ज्ञापन सौंपे गए लेकिन ट्रांसपोर्टरों की समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार आश्वासन दे रही है, लेकिन समाधान नहीं हो रहा।
उन्होंने बताया कि ऋषिकेश में ट्रकों के लिए कोई स्थायी पार्किंग व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में वाहन चालकों को अपने ट्रक चंद्रभागा नदी के किनारे खड़े करने पड़ते हैं। बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से हर वर्ष दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। कई बार वाहन भी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
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महासंघ ने मांग की कि पर्वतीय क्षेत्रों में छोटे-छोटे ट्रांसपोर्ट हब विकसित किए जाएं। साथ ही ओवरलोडिंग रोकने के लिए भद्रकाली और तपोवन में इलेक्ट्रॉनिक धर्मकांटा स्थापित किया जाए। उन्होंने सिंगल एक्सल वाहनों की जीबीडब्ल्यू सीमा 16,200 से बढ़ाकर 18,500 करने और यही नियम अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों पर भी समान रूप से लागू करने की मांग उठाई। इसके अलावा खनन वाहनों को उनकी निर्धारित भार क्षमता के अनुसार ही रवानगी दी जाए, परिवहन टैक्स में हर वर्ष होने वाली 5 प्रतिशत वृद्धि पर रोक लगाने और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय के लिए स्थायी नीतियां बनाने की भी मांग की गई।
कृष्णा बडोनी ने कहा कि ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पर्वतीय क्षेत्रों की रीढ़ है। राहत सामग्री से लेकर रोजमर्रा के सामान की आपूर्ति इसी के माध्यम से होती है। ऋषिकेश से गढ़वाल के पांच जिलों का व्यापार संचालित होता है। वर्तमान में ट्रांसपोर्टरों के पास करीब 25 हजार ट्रक हैं, लेकिन पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें सड़क, नदी और जंगल किनारे वाहन खड़े करने पड़ते हैं। इससे एक ओर चालानी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है, तो दूसरी ओर दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।
महासंघ ने सरकार से मांग की कि ट्रांसपोर्टरों की रोजी-रोटी से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल निर्णय लिया जाए। ट्रांसपोर्ट नगर सहित अन्य मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो 20 अगस्त से ट्रकों का चक्का जाम कर हड़ताल करेंगे।
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ट्रांसपोर्ट नगर समेत अन्य मांगे पूरी नहीं होने से ट्रांसपोर्टर नाराज
15 साल से ट्रांसपोर्ट नगर की हो रही मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
ऋषिकेश। उत्तराखंड देवभूमि ट्रक ऑनर्स एसोसिएशन महासंघ (गढ़वाल मंडल) ने सरकार को चेतावनी दी है कि ट्रांसपोर्टरों की वर्षों पुरानी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 20 अगस्त से ट्रकों की हड़ताल की जाएगी। महासंघ का कहना है कि पिछले 15 वर्षों से ट्रांसपोर्ट नगर की मांग उठाई जा रही है लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई कदम नहीं उठाया गया।
गढ़वाल मंडल अध्यक्ष कृष्णा बड़ोनी और कुमाऊं मंडल अध्यक्ष राकेश नेगी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से लेकर मुख्यमंत्री को कई बार ज्ञापन सौंपे गए लेकिन ट्रांसपोर्टरों की समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार आश्वासन दे रही है, लेकिन समाधान नहीं हो रहा।
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उन्होंने बताया कि ऋषिकेश में ट्रकों के लिए कोई स्थायी पार्किंग व्यवस्था नहीं है। मजबूरी में वाहन चालकों को अपने ट्रक चंद्रभागा नदी के किनारे खड़े करने पड़ते हैं। बरसात के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से हर वर्ष दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। कई बार वाहन भी क्षतिग्रस्त हो जाते हैं।
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महासंघ ने मांग की कि पर्वतीय क्षेत्रों में छोटे-छोटे ट्रांसपोर्ट हब विकसित किए जाएं। साथ ही ओवरलोडिंग रोकने के लिए भद्रकाली और तपोवन में इलेक्ट्रॉनिक धर्मकांटा स्थापित किया जाए। उन्होंने सिंगल एक्सल वाहनों की जीबीडब्ल्यू सीमा 16,200 से बढ़ाकर 18,500 करने और यही नियम अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों पर भी समान रूप से लागू करने की मांग उठाई। इसके अलावा खनन वाहनों को उनकी निर्धारित भार क्षमता के अनुसार ही रवानगी दी जाए, परिवहन टैक्स में हर वर्ष होने वाली 5 प्रतिशत वृद्धि पर रोक लगाने और ट्रांसपोर्ट व्यवसाय के लिए स्थायी नीतियां बनाने की भी मांग की गई।
कृष्णा बडोनी ने कहा कि ट्रांसपोर्ट व्यवस्था पर्वतीय क्षेत्रों की रीढ़ है। राहत सामग्री से लेकर रोजमर्रा के सामान की आपूर्ति इसी के माध्यम से होती है। ऋषिकेश से गढ़वाल के पांच जिलों का व्यापार संचालित होता है। वर्तमान में ट्रांसपोर्टरों के पास करीब 25 हजार ट्रक हैं, लेकिन पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने के कारण उन्हें सड़क, नदी और जंगल किनारे वाहन खड़े करने पड़ते हैं। इससे एक ओर चालानी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है, तो दूसरी ओर दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।
महासंघ ने सरकार से मांग की कि ट्रांसपोर्टरों की रोजी-रोटी से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल निर्णय लिया जाए। ट्रांसपोर्ट नगर सहित अन्य मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो 20 अगस्त से ट्रकों का चक्का जाम कर हड़ताल करेंगे।