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Roorkee News: रुड़की डिपो की 12 बसों की उम्र और दौड़ पूरी, सवालों के घेरे में संचालन
संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
Updated Mon, 30 Mar 2026 06:36 PM IST
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रोडवेज बसों की उम्र पूरी, फिर भी सड़कों पर दौड़ रही खटारा गाड़ियां
- डिपो में शामिल निगम की 10 साल से अधिक पुरानी बसों का अब तक हो रहा संचालन
- खटारा बसों के संचालन से दुर्घटनाओं का बना रहता है रूट पर खतरा
रुड़की। उत्तराखंड परिवहन निगम की बसें जहां एक ओर यात्रियों के लिए सस्ता और सुविधाजनक साधन मानी जाती हैं, वहीं दूसरी ओर अब इन बसों की बढ़ती उम्र यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रही है। रुड़की रोडवेज डिपो में कई बसें ऐसी हैं जो 10 साल से अधिक पुरानी हो चुकी हैं लेकिन इसके बावजूद उनका संचालन लगातार जारी है। डिपो के बेड़े में 2013 मॉडल की बसें भी शामिल हैं।
रोडवेज नियम के अनुसार 10 साल और आठ लाख किलोमीटर के बाद बसों को सेवा से बाहर कर दिया जाता है लेकिन स्थानीय डिपो में संसाधनों की कमी और नई बसों की पूर्ति न होने के कारण पुरानी बसों को ही सड़कों पर उतारा जा रहा है। हरिद्वार से रुड़की आए यात्री सुनील कुमार ने बताया कि वह जिस बस में आए वह इतनी पुरानी थी कि हर थोड़ी देर में अजीब आवाजें आ रही थी। सफर के दौरान डर लग रहा था कि कहीं बीच रास्ते में बस बंद न हो जाए या कोई हादसा न हो जाए। वहीं, दूसरी यात्री कविता ने बताया कि वह लोकल सफर करती रहती हैं लेकिन आज तक उन्हें रुड़की डिपो के पास निगम की नई बस नहीं मिलीं। मजबूरी में सुरक्षा को अनदेखा कर पुरानी बसों में सफर कर रही है लेकिन सुरक्षा के सफर में चिंता बनी रहती है। सीटें टूटी हुई है और खराब स्थिति में हैं, कुछ खिड़कियां भी ठीक से बंद नहीं होती। फायर उपकरण, कूड़ेदान और प्राथमिक चिकित्सा किट भी नहीं है। रुड़की रोडवेज डिपो की कनिष्ठ केंद्र प्रभारी राम कुमारी का कहना है कि जो भी बसें डिपो में हैं, उनका कार्यशाला की ओर से बेहतर रखरखाव रखा जाता है। रूट पर चलने से पूर्व बसों की नियमित जांच होती है। समय-समय पर बसों की मरम्मत कराई जाती है ताकि कोई बड़ी समस्या न हो। नई बसों की मांग उच्च अधिकारियों से की गई है और उम्मीद है कि जल्द ही डिपो को नई बसें मिलेगी।
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- डिपो में शामिल निगम की 10 साल से अधिक पुरानी बसों का अब तक हो रहा संचालन
- खटारा बसों के संचालन से दुर्घटनाओं का बना रहता है रूट पर खतरा
रुड़की। उत्तराखंड परिवहन निगम की बसें जहां एक ओर यात्रियों के लिए सस्ता और सुविधाजनक साधन मानी जाती हैं, वहीं दूसरी ओर अब इन बसों की बढ़ती उम्र यात्रियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रही है। रुड़की रोडवेज डिपो में कई बसें ऐसी हैं जो 10 साल से अधिक पुरानी हो चुकी हैं लेकिन इसके बावजूद उनका संचालन लगातार जारी है। डिपो के बेड़े में 2013 मॉडल की बसें भी शामिल हैं।
रोडवेज नियम के अनुसार 10 साल और आठ लाख किलोमीटर के बाद बसों को सेवा से बाहर कर दिया जाता है लेकिन स्थानीय डिपो में संसाधनों की कमी और नई बसों की पूर्ति न होने के कारण पुरानी बसों को ही सड़कों पर उतारा जा रहा है। हरिद्वार से रुड़की आए यात्री सुनील कुमार ने बताया कि वह जिस बस में आए वह इतनी पुरानी थी कि हर थोड़ी देर में अजीब आवाजें आ रही थी। सफर के दौरान डर लग रहा था कि कहीं बीच रास्ते में बस बंद न हो जाए या कोई हादसा न हो जाए। वहीं, दूसरी यात्री कविता ने बताया कि वह लोकल सफर करती रहती हैं लेकिन आज तक उन्हें रुड़की डिपो के पास निगम की नई बस नहीं मिलीं। मजबूरी में सुरक्षा को अनदेखा कर पुरानी बसों में सफर कर रही है लेकिन सुरक्षा के सफर में चिंता बनी रहती है। सीटें टूटी हुई है और खराब स्थिति में हैं, कुछ खिड़कियां भी ठीक से बंद नहीं होती। फायर उपकरण, कूड़ेदान और प्राथमिक चिकित्सा किट भी नहीं है। रुड़की रोडवेज डिपो की कनिष्ठ केंद्र प्रभारी राम कुमारी का कहना है कि जो भी बसें डिपो में हैं, उनका कार्यशाला की ओर से बेहतर रखरखाव रखा जाता है। रूट पर चलने से पूर्व बसों की नियमित जांच होती है। समय-समय पर बसों की मरम्मत कराई जाती है ताकि कोई बड़ी समस्या न हो। नई बसों की मांग उच्च अधिकारियों से की गई है और उम्मीद है कि जल्द ही डिपो को नई बसें मिलेगी।
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