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Roorkee News: एनओसी के अभाव में अटका आयुर्वेदिक अस्पताल का जीर्णोद्धार
संवाद न्यूज एजेंसी, रुड़की
Updated Mon, 23 Mar 2026 07:14 PM IST
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- सिविल अस्पताल की जमीन में बना आयुर्वेदिक अस्पताल का भवन बन चुका है खंडहर
रुड़की। पश्चिम अंबर तालाब क्षेत्र स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय का जीर्णोद्धार एनओसी के अभाव में अधर में है। सिविल अस्पताल प्रबंधन की ओर से भविष्य में भूमि की जरूरत को देखते एनओसी जारी नहीं की जा रही है। इस कारण चिकित्सालय के कायाकल्प की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
बता दें कि आयुर्वेदिक अस्पताल, सिविल अस्पताल की भूमि में संचालित हो रहा है। वर्तमान में भी यह जमीन सिविल अस्पताल के नाम पर ही दर्ज है। करीब 40 साल पहले दान में मिली इसी भूमि पर लंबे समय से राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय संचालित हो रहा है। वर्तमान में चिकित्सालय का भवन जर्जर हालत में है और इसके पुनर्निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि भी उपलब्ध है। इसके बावजूद एनओसी के अभाव में निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। इस साल जनवरी की शुरुआत में सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को पत्र भेजकर नौ बिंदुओं पर आख्या मांगी गई थी ताकि जीर्णोद्धार की प्रक्रिया आगे बढ़ सके लेकिन अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया है।
सूत्रों के अनुसार, सिविल अस्पताल प्रबंधन भविष्य में शहर के लिए आने वाली स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं को देखते हुए इस भूमि को अपने नियंत्रण में रखना चाहता है। इसी कारण एनओसी जारी नहीं की जा रही है। फिलहाल, इस असमंजस की स्थिति के चलते आयुर्वेदिक चिकित्सालय का कायाकल्प रुका हुआ है और मरीजों को जर्जर भवन में ही उपचार लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। आयुर्वेदिक अस्पताल के प्रभारी डॉ. प्रदीप कुमार का कहना है कि सिविल अस्पताल कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहा है जिसके कारण नवनिर्माण का काम अधर में लटका है। मरीजों की सुविधा को देखते हुए सिविल अस्पताल को जल्द से जल्द एनओसी जारी कर देनी चाहिए।
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रुड़की। पश्चिम अंबर तालाब क्षेत्र स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय का जीर्णोद्धार एनओसी के अभाव में अधर में है। सिविल अस्पताल प्रबंधन की ओर से भविष्य में भूमि की जरूरत को देखते एनओसी जारी नहीं की जा रही है। इस कारण चिकित्सालय के कायाकल्प की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
बता दें कि आयुर्वेदिक अस्पताल, सिविल अस्पताल की भूमि में संचालित हो रहा है। वर्तमान में भी यह जमीन सिविल अस्पताल के नाम पर ही दर्ज है। करीब 40 साल पहले दान में मिली इसी भूमि पर लंबे समय से राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय संचालित हो रहा है। वर्तमान में चिकित्सालय का भवन जर्जर हालत में है और इसके पुनर्निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि भी उपलब्ध है। इसके बावजूद एनओसी के अभाव में निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है। इस साल जनवरी की शुरुआत में सिविल अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को पत्र भेजकर नौ बिंदुओं पर आख्या मांगी गई थी ताकि जीर्णोद्धार की प्रक्रिया आगे बढ़ सके लेकिन अब तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाया है।
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सूत्रों के अनुसार, सिविल अस्पताल प्रबंधन भविष्य में शहर के लिए आने वाली स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं को देखते हुए इस भूमि को अपने नियंत्रण में रखना चाहता है। इसी कारण एनओसी जारी नहीं की जा रही है। फिलहाल, इस असमंजस की स्थिति के चलते आयुर्वेदिक चिकित्सालय का कायाकल्प रुका हुआ है और मरीजों को जर्जर भवन में ही उपचार लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। आयुर्वेदिक अस्पताल के प्रभारी डॉ. प्रदीप कुमार का कहना है कि सिविल अस्पताल कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहा है जिसके कारण नवनिर्माण का काम अधर में लटका है। मरीजों की सुविधा को देखते हुए सिविल अस्पताल को जल्द से जल्द एनओसी जारी कर देनी चाहिए।