{"_id":"6a4d48c26b1d8413ba083c64","slug":"occupants-met-the-municipal-commissioner-regarding-the-shop-encroachment-case-roorkee-news-c-5-1-drn1027-1012762-2026-07-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Roorkee News: दुकान पर कब्जा प्रकरण में नगर आयुक्त से मिले कब्जेदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Roorkee News: दुकान पर कब्जा प्रकरण में नगर आयुक्त से मिले कब्जेदार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिविल लाइंस में मिस्त्री मार्केट के पास स्थित नगर निगम की दुकान पर कब्जा लेने गई टीम के बैरंग लौटने के बाद मंगलवार को कब्जेदार एवं भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने नगर आयुक्त से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि नियमानुसार जिसके हक में स्वामित्व होगा दुकान उसी को सौंपी जाएगी। नगर आयुक्त के समझाने पर कार्यकर्ता लौट गए। उधर, नगर निगम कब्जा लेने की कार्रवाई पूरी करने के लिए प्रशासन से फोर्स की डिमांड करने की तैयारी कर रहा है।
नगर निगम की विवादित दुकान को लेकर दो भाइयों भूपेंद्र और परमानंद के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। निगम अभिलेखों के अनुसार यह दुकान करीब 30 वर्ष पूर्व परमानंद को सशर्त किराये पर आवंटित की गई थी। हालांकि पिछले कई वर्षों से दुकान पर उनके भाई भूपेंद्र का कब्जा रहा। करीब एक वर्ष पहले दुकान को एक किसान नेता को बेचे जाने का मामला सामने आया था। इसके बाद नगर निगम ने किसान नेता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई।
बाद में किसान नेता ने इस मामले से अपना कोई संबंध होने से इन्कार कर दिया। वर्तमान में परमानंद ने निगम से दुकान का कब्जा दिलाने की मांग की है। जांच समिति ने भी परमानंद के पक्ष में कब्जा दिलाने की सिफारिश की है। भूपेंद्र अदालत गए लेकिन सोमवार तक उन्हें कोई स्थगन आदेश नहीं मिला। सोमवार को कब्जा लेने गई टीम का इन्होंने विरोध किया जिस पर टीम बिना कार्रवाई लौट गई थी। मामले में मंगलवार को भूपेंद्र और उनके साथ भीम आर्मी कार्यकर्ता पहुंचे। उन्होंने लंबे समय तक दुकान पर कब्जा होने की बात कहते हुए निर्णय में संशोधन की मांग की। नगर आयुक्त गोपाल राम बिनवाल ने बताया कि दुकान पर काबिज व्यक्ति और उनके साथ भीम आर्मी कार्यकर्ता आए थे उन्हें समझाया गया है कि निष्पक्ष और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
नगर निगम की विवादित दुकान को लेकर दो भाइयों भूपेंद्र और परमानंद के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। निगम अभिलेखों के अनुसार यह दुकान करीब 30 वर्ष पूर्व परमानंद को सशर्त किराये पर आवंटित की गई थी। हालांकि पिछले कई वर्षों से दुकान पर उनके भाई भूपेंद्र का कब्जा रहा। करीब एक वर्ष पहले दुकान को एक किसान नेता को बेचे जाने का मामला सामने आया था। इसके बाद नगर निगम ने किसान नेता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई।
विज्ञापन
बाद में किसान नेता ने इस मामले से अपना कोई संबंध होने से इन्कार कर दिया। वर्तमान में परमानंद ने निगम से दुकान का कब्जा दिलाने की मांग की है। जांच समिति ने भी परमानंद के पक्ष में कब्जा दिलाने की सिफारिश की है। भूपेंद्र अदालत गए लेकिन सोमवार तक उन्हें कोई स्थगन आदेश नहीं मिला। सोमवार को कब्जा लेने गई टीम का इन्होंने विरोध किया जिस पर टीम बिना कार्रवाई लौट गई थी। मामले में मंगलवार को भूपेंद्र और उनके साथ भीम आर्मी कार्यकर्ता पहुंचे। उन्होंने लंबे समय तक दुकान पर कब्जा होने की बात कहते हुए निर्णय में संशोधन की मांग की। नगर आयुक्त गोपाल राम बिनवाल ने बताया कि दुकान पर काबिज व्यक्ति और उनके साथ भीम आर्मी कार्यकर्ता आए थे उन्हें समझाया गया है कि निष्पक्ष और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन