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Roorkee News: फर्जी जमानत लेने वाले तीन आरोपियों की याचिका निरस्त
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जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त की अदालत ने फर्जी जमानत लेने वाले तीन आरोपियों कमलेश, उज्ज्वल सिंह और नरेंद्र प्रसाद की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जमानत याचिका खारिज कर दी है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट में जमानत की प्रक्रिया के दौरान जब कंप्यूटर रिकॉर्ड खंगाला गया तो पता चला कि कमलेश, उज्ज्वल सिंह और नरेंद्र प्रसाद बहुगुणा सभी निवासी गण ग्राम पथरी नजदीक रेलवे स्टेशन अंबुवाला तहसील जिला हरिद्वार जो पेशेवर जमानतदार हैं। ये सभी एक ही संपत्ति के दस्तावेजों का इस्तेमाल पहले भी कई अलग-अलग मुकदमों में जमानत के लिए कर चुके थे, जबकि, इन्होंने कोर्ट में इस बात को छुपाकर झूठा हलफनामा दिया था। सीजेएम कोर्ट के आदेश पर सिडकुल थाने में आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोपियों ने अपने अधिवक्ता की ओर से जिला एवं सत्र न्यायालय में अपना जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल करते हुए जमानत की गुहार लगाई। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की वकील ने दलील दी कि आरोपी 24 मार्च 2026 से जेल में हैं और चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। वहीं, जिला शासकीय अधिवक्ता ने इसका कड़ा विरोध करते हुए इसे पैसों के लालच में किया गया एक संगठित अपराध बताया। आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला और सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त ने जमानत याचिका खारिज कर दी है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट में जमानत की प्रक्रिया के दौरान जब कंप्यूटर रिकॉर्ड खंगाला गया तो पता चला कि कमलेश, उज्ज्वल सिंह और नरेंद्र प्रसाद बहुगुणा सभी निवासी गण ग्राम पथरी नजदीक रेलवे स्टेशन अंबुवाला तहसील जिला हरिद्वार जो पेशेवर जमानतदार हैं। ये सभी एक ही संपत्ति के दस्तावेजों का इस्तेमाल पहले भी कई अलग-अलग मुकदमों में जमानत के लिए कर चुके थे, जबकि, इन्होंने कोर्ट में इस बात को छुपाकर झूठा हलफनामा दिया था। सीजेएम कोर्ट के आदेश पर सिडकुल थाने में आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। आरोपियों ने अपने अधिवक्ता की ओर से जिला एवं सत्र न्यायालय में अपना जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल करते हुए जमानत की गुहार लगाई। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की वकील ने दलील दी कि आरोपी 24 मार्च 2026 से जेल में हैं और चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। वहीं, जिला शासकीय अधिवक्ता ने इसका कड़ा विरोध करते हुए इसे पैसों के लालच में किया गया एक संगठित अपराध बताया। आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जिला और सत्र न्यायाधीश नरेंद्र दत्त ने जमानत याचिका खारिज कर दी है।
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