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Udham Singh Nagar News: 24-25 दिन में काटा जा रहा बिजली बिल, एक माह का पड़ रहा अतिरिक्त बोझ
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 26 May 2026 12:21 AM IST
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गदरपुर। महंगाई के दौर में बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर एक और अतिरिक्त बोझ पड़ने का मामला सामने आया है। क्षेत्र के कई ब्लॉकों से मिलीं शिकायतों के अनुसार ऊर्जा निगम निर्धारित एक माह के बजाय 24 से 25 दिन में ही मीटर रीडिंग लेकर बिल जारी कर रहा है। इससे उपभोक्ताओं को वर्ष में 12 माह के स्थान पर करीब 13 बार बिजली बिल जमा करना पड़ रहा है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कई उपभोक्ताओं का कहना है कि मीटर रीडर समय से पहले रीडिंग लेने पहुंच जाते हैं। सामान्य तौर पर बिजली बिल 30 दिन के अंतराल पर जारी होना चाहिए लेकिन कई स्थानों पर 24-25 दिन में ही रीडिंग दर्ज कर बिल थमाया जाता है। उपभोक्ताओं को पहली नजर में यह अंतर मामूली लगता है लेकिन पूरे वर्ष में यही अंतर एक अतिरिक्त बिल के रूप में सामने आता है।
उनका आरोप है कि समय से पहले बिल बनने के कारण यूनिट की गणना भी प्रभावित होती है। कम दिनों में अधिक खपत दर्ज होने पर उपभोक्ता ऊंची स्लैब में पहुंच जाते हैं जिससे बिजली दर बढ़ जाती है। उदाहरण के तौर पर 100 यूनिट तक सामान्य दर से बिल बनने के बाद 200 यूनिट पार करते ही प्रति यूनिट दर में वृद्धि हो जाती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
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जानकारों का कहना है कि उपभोक्ताओं को अपने बिजली बिल पर अंकित रीडिंग तिथि, पिछले बिल की तारीख और कुल दिनों का अंतर अवश्य जांचना चाहिए। यदि बिल 28 से 30 दिन के बजाय कम अवधि का जारी हो रहा है तो इसकी शिकायत संबंधित उपखंड कार्यालय या उपभोक्ता सेवा केंद्र में की जा सकती है।
ऊर्जा निगम के एसडीओ प्रकाश चंद शाह ने बताया कि मौजूदा बिलिंग से उपभोक्ताओं को कोई नुकसान नहीं हैं। कई बार तकनीकी कारणों, छुट्टियों या निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के चलते रीडिंग समय में अंतर आ जाता है। वहीं उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि यह प्रक्रिया लगातार हो रही है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने ऊर्जा निगम से पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था लागू करने और उपभोक्ताओं को एसएमएस और ऑनलाइन माध्यम से रीडिंग की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। संवाद
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कई उपभोक्ताओं का कहना है कि मीटर रीडर समय से पहले रीडिंग लेने पहुंच जाते हैं। सामान्य तौर पर बिजली बिल 30 दिन के अंतराल पर जारी होना चाहिए लेकिन कई स्थानों पर 24-25 दिन में ही रीडिंग दर्ज कर बिल थमाया जाता है। उपभोक्ताओं को पहली नजर में यह अंतर मामूली लगता है लेकिन पूरे वर्ष में यही अंतर एक अतिरिक्त बिल के रूप में सामने आता है।
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उनका आरोप है कि समय से पहले बिल बनने के कारण यूनिट की गणना भी प्रभावित होती है। कम दिनों में अधिक खपत दर्ज होने पर उपभोक्ता ऊंची स्लैब में पहुंच जाते हैं जिससे बिजली दर बढ़ जाती है। उदाहरण के तौर पर 100 यूनिट तक सामान्य दर से बिल बनने के बाद 200 यूनिट पार करते ही प्रति यूनिट दर में वृद्धि हो जाती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
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ऊर्जा निगम के एसडीओ प्रकाश चंद शाह ने बताया कि मौजूदा बिलिंग से उपभोक्ताओं को कोई नुकसान नहीं हैं। कई बार तकनीकी कारणों, छुट्टियों या निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के चलते रीडिंग समय में अंतर आ जाता है। वहीं उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि यह प्रक्रिया लगातार हो रही है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने ऊर्जा निगम से पारदर्शी बिलिंग व्यवस्था लागू करने और उपभोक्ताओं को एसएमएस और ऑनलाइन माध्यम से रीडिंग की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है। संवाद