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Udham Singh Nagar News: बार-बार बीमारी, फिर भी नहीं सुधरी पेयजल व्यवस्था
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Thu, 04 Jun 2026 12:48 AM IST
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सितारगंज। नयागांव में पीलिया के संभावित प्रकोप और एक बच्चे की मौत ने फिर सितारगंज की पेयजल व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि दूषित पानी पीने से बच्चों में बीमारी फैली है। यदि जांच में यह आशंका सही साबित होती है तो यह कोई पहला मामला नहीं होगा। इससे पहले भी सितारगंज दूषित पेयजल के कारण डायरिया जैसी गंभीर महामारी का दंश झेल चुका है।
पिछले साल सितारगंज के इस्लामनगर और आसपास के इलाकों में डायरिया के मामलों में अचानक वृद्धि हुई थी। उस दौरान भी बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने पर उन्हें स्थानीय उप जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस दौरान जांच में पानी में कोलिफॉर्म नामक बैक्टीरिया पाया गया था।
दूषित पेयजल और जलापूर्ति लाइनों की खामियों को बीमारी फैलने के प्रमुख कारणों में माना गया था। उस समय प्रशासन ने पेयजल लाइनों की मरम्मत, नियमित क्लोरीनेशन और जल गुणवत्ता की निगरानी के दावे किए थे। हालांकि, नयागांव में सामने आया ताजा मामला यह संकेत दे रहा हैं कि जमीनी स्तर पर समस्याएं अभी भी पूरी तरह दूर नहीं हुई हैं।
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ग्राम प्रधान मैसर जहां ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत पर जल संस्थान के अधिकारियों ने पानी के सैंपल एकत्रित किए हैं। वहीं, सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल ने बताया कि पीलिया, डायरिया, टाइफाइड और हैजा जैसी बीमारियां अक्सर दूषित पानी और खराब स्वच्छता से जुड़ी होती हैं। यदि पेयजल स्रोतों की नियमित जांच और शुद्धिकरण न किया जाए तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल बीमारी फैलने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पेयजल व्यवस्था की नियमित निगरानी, समय-समय पर पानी की गुणवत्ता की जांच और क्षतिग्रस्त लाइनों की स्थायी मरम्मत की जानी चाहिए। उनका मानना है कि यदि पूर्व में हुए डायरिया प्रकोप से सबक लेकर प्रभावी कदम उठाए गए होते, तो शायद आज फिर किसी गांव को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। संवाद
कोट -
प्रभावित इलाकों के विभिन्न जल स्रोतों से पानी का सैंपल एकत्र कर जांच के लिए लैब भेजा है। जिस ओवरहेड टैंक का पानी दूषित बताया जा रहा है उससे गांव के कई इलाकों में जलापूर्ति की जा रही है। हालांकि केस कुछ एक इलाके से ही आ रहे हैं। रिपोर्ट आने पर ही जल के दूषित होने या न होने की पुष्टि हो सकेगी। - उज्जवल कुमार, जेई, जल संस्थान
पिछले साल सितारगंज के इस्लामनगर और आसपास के इलाकों में डायरिया के मामलों में अचानक वृद्धि हुई थी। उस दौरान भी बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने पर उन्हें स्थानीय उप जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उस दौरान जांच में पानी में कोलिफॉर्म नामक बैक्टीरिया पाया गया था।
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दूषित पेयजल और जलापूर्ति लाइनों की खामियों को बीमारी फैलने के प्रमुख कारणों में माना गया था। उस समय प्रशासन ने पेयजल लाइनों की मरम्मत, नियमित क्लोरीनेशन और जल गुणवत्ता की निगरानी के दावे किए थे। हालांकि, नयागांव में सामने आया ताजा मामला यह संकेत दे रहा हैं कि जमीनी स्तर पर समस्याएं अभी भी पूरी तरह दूर नहीं हुई हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि केवल बीमारी फैलने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पेयजल व्यवस्था की नियमित निगरानी, समय-समय पर पानी की गुणवत्ता की जांच और क्षतिग्रस्त लाइनों की स्थायी मरम्मत की जानी चाहिए। उनका मानना है कि यदि पूर्व में हुए डायरिया प्रकोप से सबक लेकर प्रभावी कदम उठाए गए होते, तो शायद आज फिर किसी गांव को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। संवाद
कोट -
प्रभावित इलाकों के विभिन्न जल स्रोतों से पानी का सैंपल एकत्र कर जांच के लिए लैब भेजा है। जिस ओवरहेड टैंक का पानी दूषित बताया जा रहा है उससे गांव के कई इलाकों में जलापूर्ति की जा रही है। हालांकि केस कुछ एक इलाके से ही आ रहे हैं। रिपोर्ट आने पर ही जल के दूषित होने या न होने की पुष्टि हो सकेगी। - उज्जवल कुमार, जेई, जल संस्थान