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Udham Singh Nagar News: तपिश भरी गर्मी में प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक है नीरा
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 15 Jun 2026 01:07 AM IST
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काशीपुर। खजूर-ताड़ के पेड़ों से टपकने वाला कलप रस यानी नीरा तपिश भरी गर्मी में लोगों का प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक है। उत्तराखंड में यह सिर्फ काशीपुर में ही मिलता है। नीरा से बने उत्पाद गुड़, मिश्री खूब पसंद किए जा रहे हैं।
वर्ष 1956 में काशीपुर में ताड़ गुड़ नीरा उद्योग समिति का गठन किया गया था, जिसमें 72 लोग जुड़े थे। 1975 में बांसखेड़ा के तत्कालीन ग्राम प्रधान जगदीश ने गुड़ बनाने के लिए इस समिति को एक एकड़ भूमि आवंटित की। फरवरी आते ही कारीगर शाम के समय खजूर के पेड़ पर मिट्टी के घड़े लगाकर नीरा निकालते हैं। सुबह पौ फटते ही नीरा ठेलों पर बिकता है। मिट्टी की कुल्हड़ में ठंडा नीरा पीने का अलग ही आनंद है। लू लगने पर नीरा दवा का काम करता है। नीरा शरीर के लिए जरूरी आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम से भरपूर पौष्टिक पेय है। काशीपुर में खजूर के पेड़ बहुतायत में हैं लेकिन सड़कों के चौड़ीकरण से तमाम पेड़ कट गए। समिति के सचिव रहे सुनील कुमार बताते है कि कारोबार मंदा होने से समिति का नवीनीकरण नहीं हो पाया है। वर्तमान में समिति के सिर्फ 6 ठेला लगते हैं। शेष करीब 50 ठेलों पर लोग नीरे का स्वतंत्र कारोबार करते हैं।
चिकित्सक डाॅ. मान्या अग्रवाल ने बताया कि नीरा मिश्री गले के लिए आयुर्वेदिक टॉनिक है। नीरा गुड़ का इस्तेमाल चाय में चीनी की जगह होता है। नीरे का सिरका पाचन के लिए बहुत मुफीद है। नीरा नेचुरल प्रोबायोटिक है। डायबिटीज में यह चीनी का विकल्प तो एनीमिया में आयरन का सोर्स है।
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इनसेट
अब स्टार्टअप से हैं उम्मीद
नीरा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए खजूर की खेती की जा सकती है। कारीगरों को प्रशिक्षण देकर और नवीनतम तकनीक से नीरे को बिना किण्वन (फरमटेंशन) 48 घंटे तक सुरक्षित रखा जा सकता है। कारोबार को संगठित कर नीरे को ब्रांड नाम से भी लांच किया जा सकता है। स्टार्टअप इंडिया से फंड लेकर बोतलबंद नीरा, नीरा शुगर, नीरा चॉकलेट बनाई जा सकती है।
वर्ष 1956 में काशीपुर में ताड़ गुड़ नीरा उद्योग समिति का गठन किया गया था, जिसमें 72 लोग जुड़े थे। 1975 में बांसखेड़ा के तत्कालीन ग्राम प्रधान जगदीश ने गुड़ बनाने के लिए इस समिति को एक एकड़ भूमि आवंटित की। फरवरी आते ही कारीगर शाम के समय खजूर के पेड़ पर मिट्टी के घड़े लगाकर नीरा निकालते हैं। सुबह पौ फटते ही नीरा ठेलों पर बिकता है। मिट्टी की कुल्हड़ में ठंडा नीरा पीने का अलग ही आनंद है। लू लगने पर नीरा दवा का काम करता है। नीरा शरीर के लिए जरूरी आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम से भरपूर पौष्टिक पेय है। काशीपुर में खजूर के पेड़ बहुतायत में हैं लेकिन सड़कों के चौड़ीकरण से तमाम पेड़ कट गए। समिति के सचिव रहे सुनील कुमार बताते है कि कारोबार मंदा होने से समिति का नवीनीकरण नहीं हो पाया है। वर्तमान में समिति के सिर्फ 6 ठेला लगते हैं। शेष करीब 50 ठेलों पर लोग नीरे का स्वतंत्र कारोबार करते हैं।
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चिकित्सक डाॅ. मान्या अग्रवाल ने बताया कि नीरा मिश्री गले के लिए आयुर्वेदिक टॉनिक है। नीरा गुड़ का इस्तेमाल चाय में चीनी की जगह होता है। नीरे का सिरका पाचन के लिए बहुत मुफीद है। नीरा नेचुरल प्रोबायोटिक है। डायबिटीज में यह चीनी का विकल्प तो एनीमिया में आयरन का सोर्स है।
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अब स्टार्टअप से हैं उम्मीद
नीरा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए खजूर की खेती की जा सकती है। कारीगरों को प्रशिक्षण देकर और नवीनतम तकनीक से नीरे को बिना किण्वन (फरमटेंशन) 48 घंटे तक सुरक्षित रखा जा सकता है। कारोबार को संगठित कर नीरे को ब्रांड नाम से भी लांच किया जा सकता है। स्टार्टअप इंडिया से फंड लेकर बोतलबंद नीरा, नीरा शुगर, नीरा चॉकलेट बनाई जा सकती है।