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Udham Singh Nagar News: उत्तराखंड में कृषि की दिशा तय करेगा पंतनगर विवि
Sun, 09 Aug 2026 12:18 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sun, 09 Aug 2026 12:18 AM IST
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पंतनगर। उत्तराखंड में कृषि और उससे संबंधित क्षेत्रों के सुनियोजित एवं दीर्घकालिक विकास के लिए राज्य सरकार ने उत्तराखंड कृषि मैप बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए जीबी पंत कृषि विवि के कुलपति डाॅ. शिवेंद्र कश्यप को समन्वयक नियुक्त किया गया है। साथ ही सचिव कृषि डॉ. एसएन पांडेय के नेतृत्व में उच्चस्तरीय समिति गठित कर पंतनगर और भरसार विवि के वैज्ञानिकों सहित राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। अगले तीन माह में तैयार होने वाले रोडमैप के मसौदे की विशेषता यह होगी कि उसमें राज्य के सभी 13 जिलों को शामिल किया जाएगा ताकि पर्वतीय और मैदानी क्षेत्र के किसानों को इसका समुचित लाभ मिल सके।
शनिवार को प्रेसवार्ता में कुलपति डाॅ. कश्यप ने बताया कि यह उच्चस्तरीय समिति कृषि, बागवानी, पशुपालन, वानिकी, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, पलायन और रोजगार सृजन सहित 21 विषयगत क्षेत्रों पर कार्य करेगी। रोडमैप बनाने में न्यूजीलैंड, आयरलैंड और चीन जैसे देशों के सफल कृषि मॉडलों से भी सीख ली जा रही है ताकि एक ऐसा रोडमैप तैयार हो जो न केवल उत्तराखंड की भौगोलिक व जलवायु विशिष्टताओं के अनुरूप हो बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय मॉडल बन सके।
कुलपति ने बताया कि 10 पर्वतीय जनपदों और हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर जैसे तराई-भाबर मैदानी जिलों के लिए अलग-अलग रणनीति तैयार की जाएगी जबकि देहरादून व नैनीताल जैसे मिश्रित भौगोलिक स्वरूप वाले जिलों में विकासखंड स्तर पर कार्ययोजना बनाई जाएगी। प्रत्येक जिले के लिए क्षेत्रवार प्राथमिकताएं, वर्तमान स्थिति, और वर्ष 2031, 2036, 2041 व 2046 तक के मापन लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे, जो उस जिले की भौगोलिक, जलवायु एवं सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप होंगे।
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यह रोडमैप केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल रोडमैप के रूप में उभरना चाहिए। हमारा प्रयास है कि स्पष्ट लक्ष्यों, सुदृढ़ अभिसरण तंत्र और मापन योग्य परिणामों के माध्यम से यह रोडमैप देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक दृष्टांत प्रस्तुत करे। - डॉ. एसएन पांडेय, सचिव-कृषि, उत्तराखंड शासन
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शनिवार को प्रेसवार्ता में कुलपति डाॅ. कश्यप ने बताया कि यह उच्चस्तरीय समिति कृषि, बागवानी, पशुपालन, वानिकी, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, पलायन और रोजगार सृजन सहित 21 विषयगत क्षेत्रों पर कार्य करेगी। रोडमैप बनाने में न्यूजीलैंड, आयरलैंड और चीन जैसे देशों के सफल कृषि मॉडलों से भी सीख ली जा रही है ताकि एक ऐसा रोडमैप तैयार हो जो न केवल उत्तराखंड की भौगोलिक व जलवायु विशिष्टताओं के अनुरूप हो बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय मॉडल बन सके।
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कुलपति ने बताया कि 10 पर्वतीय जनपदों और हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर जैसे तराई-भाबर मैदानी जिलों के लिए अलग-अलग रणनीति तैयार की जाएगी जबकि देहरादून व नैनीताल जैसे मिश्रित भौगोलिक स्वरूप वाले जिलों में विकासखंड स्तर पर कार्ययोजना बनाई जाएगी। प्रत्येक जिले के लिए क्षेत्रवार प्राथमिकताएं, वर्तमान स्थिति, और वर्ष 2031, 2036, 2041 व 2046 तक के मापन लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे, जो उस जिले की भौगोलिक, जलवायु एवं सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप होंगे।
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यह रोडमैप केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि पूरे देश के लिए एक मॉडल रोडमैप के रूप में उभरना चाहिए। हमारा प्रयास है कि स्पष्ट लक्ष्यों, सुदृढ़ अभिसरण तंत्र और मापन योग्य परिणामों के माध्यम से यह रोडमैप देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक दृष्टांत प्रस्तुत करे। - डॉ. एसएन पांडेय, सचिव-कृषि, उत्तराखंड शासन