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Udham Singh Nagar News: रुद्रपुर अस्पताल में बीमार हुआ सिस्टम... पांच साल से धूल फांक रही हेल्थ एटीएम मशीन
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 18 May 2026 12:24 AM IST
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रुद्रपुर। जिला अस्पताल में मरीजों को आधुनिक और त्वरित स्वास्थ्य सुविधाएं देने के सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं। अस्पताल में लाखों की लागत से लगी हेल्थ एटीएम मशीन पिछले पांच साल से खराब है। हैरानी की बात यह है कि अस्पताल के मेडिकल कॉलेज के अधीन आने के बाद भी इस जीवनदायिनी मशीन को ठीक कराने की सुध किसी ने नहीं ली। इसके चलते आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मामूली जांच के लिए भी लंबी कतारों और निजी लैब के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
अस्पताल में हेल्थ एटीएम मशीन के संचालन के लिए पहले एक विशेष कक्ष बनाया गया था। देखरेख के अभाव में वर्षों तक इस रूम में ताला लटका रहा। हद तो तब हो गई जब एक साल पहले इस कक्ष से मशीन को दरकिनार कर वहां अस्पताल की अन्य गतिविधियां शुरू कर दी गईं। मशीन के बंद होने से अब अस्पताल में बेहद धीमी गति से मरीजों की जांचें हो पा रही हैं।
वरदान की जगह अभिशाप बनी मशीन
यह हेल्थ एटीएम मशीन स्वास्थ्य क्षेत्र में मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी। बिना किसी लैब तकनीशियन के यह मशीन कुछ ही मिनटों में 50 से अधिक स्वास्थ्य जांचें करने और तुरंत डिजिटल रिपोर्ट देने में सक्षम थी। इनमें ब्लड प्रेशर (बीपी), ईसीजी, पल्स रेट, शरीर का तापमान, ऑक्सीजन का स्तर, वजन और लंबाई आदि शामिल हैं।
> > बिना सुई के टेस्ट : शुगर और हीमोग्लोबिन।
> > रैपिड स्क्रीन टेस्ट : लिपिड प्रोफाइल, डेंगू और मलेरिया।
> > टेलीमीडिसिन सुविधा : इसके जरिए दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले मरीज सीधे स्क्रीन पर बड़े डॉक्टरों से परामर्श ले सकते थे।
मेडिकल कॉलेज बनने के बाद भी हालात जस की तस
वर्तमान में जिला अस्पताल का पूरा ढांचा राजकीय मेडिकल कॉलेज के अधीन आ चुका है। उम्मीद जताई जा रही थी कि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के आने के बाद इस आधुनिक मशीन को दोबारा चालू कर दिया जाएगा लेकिन ढांचा बदलने के बाद भी अफसरों की बेरुखी जस की तस बनी हुई है। जनहित की यह योजना अब कबाड़ में तब्दील होने की कगार पर है।
कोट
- हेल्थ एटीएम मशीन की खराबी की तकनीकी दिक्कतों को दूर कराने की दिशा में जल्द कदम उठाए जाएंगे। इसे ठीक कराकर दोबारा संचालित करने का पूरा प्रयास किया जाएगा ताकि मरीजों को राहत मिल सके। - प्रो. ऊषा रावत, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज, रुद्रपुर
अस्पताल में हेल्थ एटीएम मशीन के संचालन के लिए पहले एक विशेष कक्ष बनाया गया था। देखरेख के अभाव में वर्षों तक इस रूम में ताला लटका रहा। हद तो तब हो गई जब एक साल पहले इस कक्ष से मशीन को दरकिनार कर वहां अस्पताल की अन्य गतिविधियां शुरू कर दी गईं। मशीन के बंद होने से अब अस्पताल में बेहद धीमी गति से मरीजों की जांचें हो पा रही हैं।
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वरदान की जगह अभिशाप बनी मशीन
यह हेल्थ एटीएम मशीन स्वास्थ्य क्षेत्र में मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं थी। बिना किसी लैब तकनीशियन के यह मशीन कुछ ही मिनटों में 50 से अधिक स्वास्थ्य जांचें करने और तुरंत डिजिटल रिपोर्ट देने में सक्षम थी। इनमें ब्लड प्रेशर (बीपी), ईसीजी, पल्स रेट, शरीर का तापमान, ऑक्सीजन का स्तर, वजन और लंबाई आदि शामिल हैं।
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मेडिकल कॉलेज बनने के बाद भी हालात जस की तस
वर्तमान में जिला अस्पताल का पूरा ढांचा राजकीय मेडिकल कॉलेज के अधीन आ चुका है। उम्मीद जताई जा रही थी कि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के आने के बाद इस आधुनिक मशीन को दोबारा चालू कर दिया जाएगा लेकिन ढांचा बदलने के बाद भी अफसरों की बेरुखी जस की तस बनी हुई है। जनहित की यह योजना अब कबाड़ में तब्दील होने की कगार पर है।
कोट
- हेल्थ एटीएम मशीन की खराबी की तकनीकी दिक्कतों को दूर कराने की दिशा में जल्द कदम उठाए जाएंगे। इसे ठीक कराकर दोबारा संचालित करने का पूरा प्रयास किया जाएगा ताकि मरीजों को राहत मिल सके। - प्रो. ऊषा रावत, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज, रुद्रपुर