UK: लीची का सीजन हुआ खत्म...मगर किसानों की कमाई नहीं, 200 रुपये प्रति किलो के भाव ने बदली तस्वीर, जानें कैसे?
जीबी पंत विवि की करीब एक दशक पहले शुरू की गई बीज ग्राम योजना ने किसानों की आमदनी बढ़ाने में कामयाबी पाई है। अब किसानों को लीची का सीजन खत्म होने के बाद भी 175 से 200 रुपये प्रति किलो तक का अच्छा दाम मिल रहा है, जिससे उनकी आमदनी काफी बढ़ गई है।
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जिन खेतों में कभी पारंपरिक खेती से सीमित आमदनी होती थी वहां आज लीची से लदे बगीचे किसानों की खुशहाली की नई कहानी लिख रहे हैं। जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय की करीब एक दशक पहले शुरू की गई बीज ग्राम योजना का यह नवाचार अब जमीन पर असर दिखा रहा है। विश्वविद्यालय से मिले गुणवत्तायुक्त पौधों और वैज्ञानिक प्रशिक्षण की बदौलत किसानों को सीजन समाप्त होने के बाद भी लीची का बेहतर दाम मिल रहा है।
तत्कालीन कुलपति डॉ. मंगला राय ने वर्ष 2016 के आसपास इस योजना की शुरुआत किसानों को गुणवत्तायुक्त बीज और पौध उपलब्ध कराने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से की थी। योजना के तहत उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में जलवायु के अनुरूप गांवों का चयन किया गया। किसानों को विश्वविद्यालय में तैयार उच्च गुणवत्ता वाले लीची, आम और आड़ू के पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए गए। साथ ही पौधों की देखभाल, रोग प्रबंधन और वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण भी दिया गया। पादप रोग विभाग की प्रयोगशाला से ट्राइकोडर्मा और स्यूडोमोना जैसे जैव नियंत्रक भी उपलब्ध कराए गए।
अब इन पौधों से भरपूर उत्पादन मिलने लगा है। इस वर्ष प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में लीची का सीजन समाप्त होने के बाद सीम गांव की लीची बाजार में पहुंची, जिससे किसानों को 175 से 200 रुपये प्रति किलो तक का मूल्य मिला। इससे उनकी आमदनी में भी वृद्धि हुई है।
60 परिवारों को मिला योजना का लाभ
सीम गांव के किसान भगवत सिंह बिष्ट बताते हैं कि गांव के 78 परिवारों में से लगभग 60 परिवारों को विश्वविद्यालय की ओर से निःशुल्क पौधे मिले थे। उन्होंने कहा कि सीजन समाप्त होने के बावजूद गांव में अभी भी लीची की तुड़ाई जारी है और अल्मोड़ा व हल्द्वानी मंडियों में 175 से 200 रुपये प्रति किलो तक दाम मिल रहे हैं।
हमारे गांव में 78 परिवार हैं जिनमें से लगभग 60 परिवारों को पंतनगर विवि की ओर से निःशुल्क पौधे दिए गए। सीजन खत्म होने के बावजूद सीम गांव में अभी भी लीची तोड़ी जा रही है। इसे अल्मोड़ा और हल्द्वानी की मंडियों में 175 से 200 रुपये प्रति किलों के भाव बेचा जा रहा है। -भगवत सिंह बिष्ट, लीची उत्पादक
मुझे पंतनगर विवि से दो बार में पांच-पांच पौधे लीची व आम के मिले थे। अब लीची के पौधे फल देने लगे हैं। सीजन खत्म होने के बावजूद गांव में ही लीची का मूल्य दो सौ रुपये प्रति किलो तक मिल रहा है। -भोलादत्त जोशी, लीची उत्पादक
मैंने पंतनगर विवि से मिले पांच लीची के पौधे वर्ष 2017 में लगाए थे, अब वह फल देने लगे है। उत्पादन लागत शून्य रही और सीजन खत्म होने की वजह से लीची का बहुत अच्छा मूल्य मिला है। मुझे इस वर्ष लगभग 17 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ है। -राजू जोशी, लीची उत्पादक
मैंने अपनी जमीन में लीची के पौधे लगाए। मेरे पास इसकी विभिन्न प्रजातियों जैसे रोजसेंटेड, वेदाना आदि के पौधे हैं। इस वर्ष मैने लगभग एक लाख रुपये से अधिक की लीची बेची है। । -हरीश सिंह पनौरा, लीची उत्पादक
पंतनगर विवि की ओर से वर्ष 2016 में शुरू की गई बीज ग्राम योजना अत्यंत प्रभावकारी है। इसके तहत अनेक गांवों का चयन किया गया था जहां से अत्यंत प्रभावी परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। इस योजना को फिर से पुनर्जीवित और सशक्त बनाने की दिशा में सघन प्रयास किए जा रहे हैं। अब किसानों को उनके क्षेत्र में ही प्रशिक्षण दिया जाएगा। - एसके कश्यप, कुलपति, जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय