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Udham Singh Nagar News: मोटेश्वर महादेव मंदिर का शिवलिंग 12वें उप ज्योतिर्लिंग है शुमार
Sun, 02 Aug 2026 01:07 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sun, 02 Aug 2026 01:07 AM IST
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काशीपुर। महाभारत कालीन मोटेश्वर महादेव मंदिर का शिवलिंग 12वां उप ज्योतिर्लिंग है। शिवलिंग की मोटाई अधिक होने के कारण यह मोटेश्वर महादेव मंदिर के नाम से विख्यात है। स्कंद पुराण में भगवान शिव ने कहा कि जो भक्त कांवड़ कंधे पर रखकर हरिद्वार से गंगा जल लाकर यहां चढ़ाएगा, उसे मोक्ष मिलेगा। इसी मान्यता के चलते मन्नत पूरी होने पर यहां लोग कांवड़ चढ़ाने दूर-दराज से पहुंचते हैं।
चैती मैदान में महादेव नहर के किनारे स्थित मोटेश्वर महादेव मंदि में श्रावण में सैकड़ों श्रद्धालु पूजा करने आते हैं। हर साल महाशिवरात्रि पर्व पर यहां भव्य मेला लगता है। यूपी के मुरादाबाद, रामपुर, बिजनौर, ठाकुरद्वारा से कई श्रद्धालु यहां हर साल कांवड़ चढ़ाने आते हैं। श्रावण के सोमवार कोे यहां सैकड़ों श्रद्धालु अपने अराध्य का जलाभिषेक करने दूर-दराज से पहुंचते हैं। मोटेश्वर महादेव मंदिर दूसरी मंजिल पर है। यह मंदिर जागेश्वर के कारीगर ने बनाया था।
स्वयंभू है शिवलिंग
मंदिर के पुजारी राघवेंद्र नागर ने बताया कि मंदिर में शिवलिंग स्थापित नहीं किया गया है, यह स्वयंभू है। कई लोगों ने इसकी गहराई नापने की कोशिश की लेकिन नहीं नाप सके। लोगों का अनुमान है कि शिवलिंग की गहराई करीब 30 फीट है। मान्यता है कि गुरु द्रोणाचार्य गोविषाण में कौरव-पांडवों को शिक्षा दे रहे थे, तभी उन्हें यह शिवलिंग दिखाई दिया। तब भीम ने वहां पर मंदिर बनाकर द्रोणाचार्य को गुरुदक्षिणा में दिया।
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नौ पीढि़यों से पूजा कर रहे नागर परिवार
गुजराती ब्राह्मण नागर परिवार नौ पीढ़ियों से मंदिर की सेवा कर रहे हैं। पुजारी राघवेंद्र ने बताया कि बुक्सा जनजाति के लोगों का महादेव कुल देवता हैं। शायद यह पहला मंदिर है जिसकी दीवारें अंदर से कई कोणों में है। श्रद्धालुओं ने कई बार मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। 1980 में सेठ मूलप्रकाश की मन्नत पूरी होने पर उन्होंने संपूर्ण मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। बताया कि एक समय में इस मंदिर के चारों ओर 120 शिव मंदिर थे।
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चैती मैदान में महादेव नहर के किनारे स्थित मोटेश्वर महादेव मंदि में श्रावण में सैकड़ों श्रद्धालु पूजा करने आते हैं। हर साल महाशिवरात्रि पर्व पर यहां भव्य मेला लगता है। यूपी के मुरादाबाद, रामपुर, बिजनौर, ठाकुरद्वारा से कई श्रद्धालु यहां हर साल कांवड़ चढ़ाने आते हैं। श्रावण के सोमवार कोे यहां सैकड़ों श्रद्धालु अपने अराध्य का जलाभिषेक करने दूर-दराज से पहुंचते हैं। मोटेश्वर महादेव मंदिर दूसरी मंजिल पर है। यह मंदिर जागेश्वर के कारीगर ने बनाया था।
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स्वयंभू है शिवलिंग
मंदिर के पुजारी राघवेंद्र नागर ने बताया कि मंदिर में शिवलिंग स्थापित नहीं किया गया है, यह स्वयंभू है। कई लोगों ने इसकी गहराई नापने की कोशिश की लेकिन नहीं नाप सके। लोगों का अनुमान है कि शिवलिंग की गहराई करीब 30 फीट है। मान्यता है कि गुरु द्रोणाचार्य गोविषाण में कौरव-पांडवों को शिक्षा दे रहे थे, तभी उन्हें यह शिवलिंग दिखाई दिया। तब भीम ने वहां पर मंदिर बनाकर द्रोणाचार्य को गुरुदक्षिणा में दिया।
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नौ पीढि़यों से पूजा कर रहे नागर परिवार
गुजराती ब्राह्मण नागर परिवार नौ पीढ़ियों से मंदिर की सेवा कर रहे हैं। पुजारी राघवेंद्र ने बताया कि बुक्सा जनजाति के लोगों का महादेव कुल देवता हैं। शायद यह पहला मंदिर है जिसकी दीवारें अंदर से कई कोणों में है। श्रद्धालुओं ने कई बार मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। 1980 में सेठ मूलप्रकाश की मन्नत पूरी होने पर उन्होंने संपूर्ण मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। बताया कि एक समय में इस मंदिर के चारों ओर 120 शिव मंदिर थे।