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Uttarkashi News: धराली के श्रीकंठ के बेस कैंप व हर्षिल में स्थापित होगा अर्ली वार्निंग सिस्टम
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Mon, 18 May 2026 06:39 PM IST
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बीते वर्ष आई आपदा के बाद से ही उठाई जा रही थी मांग
जिले के छह ब्लॉकों के नौ स्थानों में आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से स्वचलित मौसम केंद्र होगा स्थापित
उत्तरकाशी। आपदा प्रभावित धराली और हर्षिल में जिला प्रशासन की ओर से अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। इसके लिए प्रशासन की ओर से शासन को प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया है। बीते वर्ष इन क्षेत्रों में आई आपदा की तबाही के बाद इस सिस्टम को लगाने की मांग की गई थी। इसके साथ ही जनपद के छह विकासखंडों के नौ स्थानों में आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से स्वचलित मौसम केंद्रों की स्थापना की जाएगी। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के तहत इनके लिए स्थल भी चयनित किए गए हैं।
गत वर्ष अगस्त माह मेंं धराली की खीर गंगा और हर्षिल में तेलगाड़ में आई आपदा के दौरान कई लोग, भवन आदि जमींदोज हो गए थे। उस दौरान नदियों में अचानक आई तबाही ने लोगों को संभलने का मौका नहीं दिया था। इसके बाद विशेषज्ञोें ने भी इन क्षेत्रों में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की सलाह दी थी। इस पर जिला प्रशासन की ओर से प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है।
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि धराली में श्रीकंठ चोटी के निचले इलाकों व हर्षिल में भी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यह स्थापित किया जाएगा। कहा कि जल्द ही शासन से स्वीकृति मिलने पर इस पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही गंगोत्री क्षेत्र में इस पर विचार किया जा रहा है। प्रयास है कि आगामी मानसून से पहले अर्ली वार्निंग सिस्टम को स्थापित किया जाए। इससे आने वाले समय में नदियों के बढ़ते जलस्तर सहित आसपास की भौगोलिक परिस्थितियों की जानकारी भी मिल पाएगी।
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इसके साथ ही आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जनपद के राजकीय इंटर कॉलेज मुस्टिकसौड़, राजकीय प्राथमिक विद्यालय सौरा, जीएमवीएन गेस्ट हाउस सांकरी, केंद्रीय जल आयोग कार्यालय कुथनौर, रेंज कार्यालय जरमोला, राड़ी टॉप, धौंतरी तहसील कार्यालय, वन विश्राम गृह भटवाड़ी और अगोड़ा में स्वचलित मौसम केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इससे पहल जनपद में 18 स्थानों में स्वचलित मौसम केंद्र व वर्षामापी यंत्र लगाए गए हैं।
जिले के छह ब्लॉकों के नौ स्थानों में आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से स्वचलित मौसम केंद्र होगा स्थापित
उत्तरकाशी। आपदा प्रभावित धराली और हर्षिल में जिला प्रशासन की ओर से अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। इसके लिए प्रशासन की ओर से शासन को प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया है। बीते वर्ष इन क्षेत्रों में आई आपदा की तबाही के बाद इस सिस्टम को लगाने की मांग की गई थी। इसके साथ ही जनपद के छह विकासखंडों के नौ स्थानों में आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से स्वचलित मौसम केंद्रों की स्थापना की जाएगी। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के तहत इनके लिए स्थल भी चयनित किए गए हैं।
गत वर्ष अगस्त माह मेंं धराली की खीर गंगा और हर्षिल में तेलगाड़ में आई आपदा के दौरान कई लोग, भवन आदि जमींदोज हो गए थे। उस दौरान नदियों में अचानक आई तबाही ने लोगों को संभलने का मौका नहीं दिया था। इसके बाद विशेषज्ञोें ने भी इन क्षेत्रों में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की सलाह दी थी। इस पर जिला प्रशासन की ओर से प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है।
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जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि धराली में श्रीकंठ चोटी के निचले इलाकों व हर्षिल में भी ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यह स्थापित किया जाएगा। कहा कि जल्द ही शासन से स्वीकृति मिलने पर इस पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही गंगोत्री क्षेत्र में इस पर विचार किया जा रहा है। प्रयास है कि आगामी मानसून से पहले अर्ली वार्निंग सिस्टम को स्थापित किया जाए। इससे आने वाले समय में नदियों के बढ़ते जलस्तर सहित आसपास की भौगोलिक परिस्थितियों की जानकारी भी मिल पाएगी।
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इसके साथ ही आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जनपद के राजकीय इंटर कॉलेज मुस्टिकसौड़, राजकीय प्राथमिक विद्यालय सौरा, जीएमवीएन गेस्ट हाउस सांकरी, केंद्रीय जल आयोग कार्यालय कुथनौर, रेंज कार्यालय जरमोला, राड़ी टॉप, धौंतरी तहसील कार्यालय, वन विश्राम गृह भटवाड़ी और अगोड़ा में स्वचलित मौसम केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इससे पहल जनपद में 18 स्थानों में स्वचलित मौसम केंद्र व वर्षामापी यंत्र लगाए गए हैं।