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Uttarkashi News: उजेली में जान जोखिम में डालकर जल भर रहे श्रद्धालु
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Thu, 05 Feb 2026 06:12 PM IST
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उत्तरकाशी। काशी नगरी में आपदा से क्षतिग्रस्त हुए कई स्नान घाटों की स्थिति आज भी जस की तस है। उजेली में क्षतिग्रस्त स्नान घाट को स्नान के लिए दुरुस्त नहीं किया जा सका है। इससे घाट पर सुरक्षित स्नान करने व जल भरने को श्रद्धालुओं को जान जोखिम में डालना पड़ रहा।
जिला मुख्यालय के नजदीकी क्षेत्र उजेली में भागीरथी नदी किनारे बना गंगा स्नान घाट लंबे समय से क्षतिग्रस्त हालत में पड़ा है। पिछली बरसात के दौरान घाट पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। इस घाट की स्थिति इतनी बदहाल है कि श्रद्धालुओं को गंगा आरती, स्नान करने और गंगा जल भरने के लिए जान जोखिम में डालकर नदी में जाना पड़ रहा।
उजेली क्षेत्र में ज्यादातर साधु संतों के आश्रम मौजूद हैं और हर रोज यहां संत महात्मा घाटों पर पूजा अर्चना, स्नान व जल भरने जाते थे, लेकिन घाट क्षतिग्रस्त होने से नदी तट की ओर नहीं जा पा रहे। हालांकि कुछ श्रद्धालु फिर भी जोखिम के साथ नदी में उतर जाते हैं। स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए जल्द ही उजेली स्नान घाट को जल्द दुरूस्त करने की मांग रखी है। ईई सचिन सिंघल का कहना है कि घाट के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी नहीं है। संवाद
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जिला मुख्यालय के नजदीकी क्षेत्र उजेली में भागीरथी नदी किनारे बना गंगा स्नान घाट लंबे समय से क्षतिग्रस्त हालत में पड़ा है। पिछली बरसात के दौरान घाट पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। इस घाट की स्थिति इतनी बदहाल है कि श्रद्धालुओं को गंगा आरती, स्नान करने और गंगा जल भरने के लिए जान जोखिम में डालकर नदी में जाना पड़ रहा।
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उजेली क्षेत्र में ज्यादातर साधु संतों के आश्रम मौजूद हैं और हर रोज यहां संत महात्मा घाटों पर पूजा अर्चना, स्नान व जल भरने जाते थे, लेकिन घाट क्षतिग्रस्त होने से नदी तट की ओर नहीं जा पा रहे। हालांकि कुछ श्रद्धालु फिर भी जोखिम के साथ नदी में उतर जाते हैं। स्थानीय लोगों ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए जल्द ही उजेली स्नान घाट को जल्द दुरूस्त करने की मांग रखी है। ईई सचिन सिंघल का कहना है कि घाट के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी नहीं है। संवाद