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Uttarkashi News: नौरी ग्राम प्रधान चुनाव पर लगी कानूनी मुहर
Thu, 09 Jul 2026 04:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Thu, 09 Jul 2026 04:53 PM IST
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विहित प्राधिकारी एवं उपजिला मजिस्ट्रेट ने चुनौती देने वाली याचिका की खारिज
पुरोला। तहसील पुरोला की ग्राम पंचायत नौरी के ग्राम प्रधान चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका को विहित प्राधिकारी एवं उपजिला मजिस्ट्रेट पुरोला ने खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ किया कि याचिकाकर्ता निर्वाचित प्रधान मंजू चौहान के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने में असफल रहे। इसके साथ ही ग्राम प्रधान का निर्वाचन वैध एवं यथावत बरकरार रखा गया है। याचिका में आरोप लगाया गया कि निर्वाचित प्रधान का नाम एक से अधिक स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज था जिससे उनका निर्वाचन निरस्त किया जाना चाहिए।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभिलेखों के परीक्षण से यह स्पष्ट हुआ कि निर्वाचन अधिसूचना जारी होने से पहले ही मंजू चौहान ने नगर निगम देहरादून की मतदाता सूची से अपना नाम हटाने के लिए आवेदन कर दिया था।
विलोपन सूची और अन्य अभिलेखों के आधार पर यह भी पाया गया कि याचिकाकर्ता अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। इसी आधार पर न्यायालय ने याचिका को साक्ष्यों के अभाव में निरस्त कर दिया। फैसले के बाद ग्राम प्रधान मंजू चौहान ने इसे सत्य और न्याय की जीत बताते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास था। उन्होंने कहा कि अब उनकी प्राथमिकता ग्राम पंचायत में विकास कार्यों को और तेज़ी से आगे बढ़ाना है।
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पुरोला। तहसील पुरोला की ग्राम पंचायत नौरी के ग्राम प्रधान चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका को विहित प्राधिकारी एवं उपजिला मजिस्ट्रेट पुरोला ने खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ किया कि याचिकाकर्ता निर्वाचित प्रधान मंजू चौहान के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने में असफल रहे। इसके साथ ही ग्राम प्रधान का निर्वाचन वैध एवं यथावत बरकरार रखा गया है। याचिका में आरोप लगाया गया कि निर्वाचित प्रधान का नाम एक से अधिक स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज था जिससे उनका निर्वाचन निरस्त किया जाना चाहिए।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभिलेखों के परीक्षण से यह स्पष्ट हुआ कि निर्वाचन अधिसूचना जारी होने से पहले ही मंजू चौहान ने नगर निगम देहरादून की मतदाता सूची से अपना नाम हटाने के लिए आवेदन कर दिया था।
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विलोपन सूची और अन्य अभिलेखों के आधार पर यह भी पाया गया कि याचिकाकर्ता अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। इसी आधार पर न्यायालय ने याचिका को साक्ष्यों के अभाव में निरस्त कर दिया। फैसले के बाद ग्राम प्रधान मंजू चौहान ने इसे सत्य और न्याय की जीत बताते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा विश्वास था। उन्होंने कहा कि अब उनकी प्राथमिकता ग्राम पंचायत में विकास कार्यों को और तेज़ी से आगे बढ़ाना है।
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