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Uttarkashi News: यमुनोत्री के 2.5 किमी जोखिमभरे रास्ते को सुरक्षित बनाएगा वन विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sat, 28 Feb 2026 05:55 PM IST
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भंडेलीगाड से यमुनोत्री तक पैदल मार्ग कपाट खुलने से पहले होगा दुरूस्त
बड़कोट। चारधाम यात्रा से पहले यमुनोत्री धाम के वैकल्पिक पैदल मार्ग के सुधारीकरण को लेकर वन विभाग ने तैयारियां तेज कर दी है। भंडेलीगाड से यमुनोत्री तक 2.5 किमी पैदल मार्ग पर मार्च से कार्य शुरू करने की योजना है। विभाग ने 19 अप्रैल को कपाट खुलने से पहले मार्ग को सुरक्षित और सुगम बनाने का लक्ष्य रखा है।
जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम तक कुल पांच किमी का पैदल सफर तय कर हर साल यात्री धाम के दर्शन को पहुंचते हैं। यमुनोत्री पैदल मार्ग के मध्य भंडेलीगाड से यमुनोत्री धाम तक करीब 2.5 किमी जोखिम भरा बना हुआ है। मार्ग संकरा और जोखिमभरा माना जाता है। विशेषकर पीक सीजन के दौरान जब श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होती है। मार्ग पर फिसलन और ढलान अधिक है।
सुरक्षा इंतजाम सीमित है। फिलहाल इस हिस्से के रख रखाव का कार्य वन विभाग देख रहा है। पीक सीजन पर सुरक्षा और सुव्यवस्थित यात्रा के लिहाज से मार्ग का उपयोग किया जाता है लेकिन मार्ग जोखिम भरा होने से चारधाम यात्रा से जुड़े हुए घोड़े खच्चर, डंडी कंडी मजदूर इसे सुरक्षित और सुगम बनाने की मांग करते आ रहे है।
चारधाम यात्रा से जुड़े स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि इस बार यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति बेहतर होगी जिससे यात्रा अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बन सकेगी। अपर यमुना वन विभाग के प्रभागीय वनाधिकारी रविंद्र पुंडीर ने बताया कि जल्द ही उक्त मार्ग से सुधारीकरण का बजट जिला प्रशासन से अवमुक्त होने वाला है। मार्च में इस पर सुधारीकरण काम शुरू कर कपाट खुलने से पहले इसे सुरक्षित और सुगम बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
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बड़कोट। चारधाम यात्रा से पहले यमुनोत्री धाम के वैकल्पिक पैदल मार्ग के सुधारीकरण को लेकर वन विभाग ने तैयारियां तेज कर दी है। भंडेलीगाड से यमुनोत्री तक 2.5 किमी पैदल मार्ग पर मार्च से कार्य शुरू करने की योजना है। विभाग ने 19 अप्रैल को कपाट खुलने से पहले मार्ग को सुरक्षित और सुगम बनाने का लक्ष्य रखा है।
जानकीचट्टी से यमुनोत्री धाम तक कुल पांच किमी का पैदल सफर तय कर हर साल यात्री धाम के दर्शन को पहुंचते हैं। यमुनोत्री पैदल मार्ग के मध्य भंडेलीगाड से यमुनोत्री धाम तक करीब 2.5 किमी जोखिम भरा बना हुआ है। मार्ग संकरा और जोखिमभरा माना जाता है। विशेषकर पीक सीजन के दौरान जब श्रद्धालुओं की संख्या अधिक होती है। मार्ग पर फिसलन और ढलान अधिक है।
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सुरक्षा इंतजाम सीमित है। फिलहाल इस हिस्से के रख रखाव का कार्य वन विभाग देख रहा है। पीक सीजन पर सुरक्षा और सुव्यवस्थित यात्रा के लिहाज से मार्ग का उपयोग किया जाता है लेकिन मार्ग जोखिम भरा होने से चारधाम यात्रा से जुड़े हुए घोड़े खच्चर, डंडी कंडी मजदूर इसे सुरक्षित और सुगम बनाने की मांग करते आ रहे है।
चारधाम यात्रा से जुड़े स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि इस बार यात्रा से पहले मार्ग की स्थिति बेहतर होगी जिससे यात्रा अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बन सकेगी। अपर यमुना वन विभाग के प्रभागीय वनाधिकारी रविंद्र पुंडीर ने बताया कि जल्द ही उक्त मार्ग से सुधारीकरण का बजट जिला प्रशासन से अवमुक्त होने वाला है। मार्च में इस पर सुधारीकरण काम शुरू कर कपाट खुलने से पहले इसे सुरक्षित और सुगम बनाने का लक्ष्य रखा गया है।