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Uttarkashi News: छ्वीं-बात में जीवंत हुई डूबी पुरानी टिहरी, संघर्ष और यादों के सुनाए संस्मरण
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sat, 07 Mar 2026 06:16 PM IST
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विजेताओं को आज राज्यपाल करेंगे सम्मानित
नई टिहरी। टिहरी झील महोत्सव हिमालय ओ-टू के दूसरे दिन कोटीकालोनी में ‘छ्वीं-बात’ कार्यक्रम के तहत पुरानी टिहरी पर आधारित नाटिका का मार्मिक मंचन किया गया। नाटिका और संस्मरणों के माध्यम से डूब चुकी पुरानी टिहरी की यादें एक बार फिर ताजा हो उठीं। वहीं, मास्टर शेफ प्रतियोगिता में तीन श्रेणियों के तहत कुल 36 प्रतिभागियों ने फिनाले में जगह बनाई। प्रतियोगिता के विजेताओं को आज रविवार को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह के हाथों पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।
कोटीकालोनी में श्री रामकृष्ण लीला समिति की पहल पर आयोजित ‘छ्वीं-बात’ कार्यक्रम में वक्ताओं ने पुरानी टिहरी के सामाजिक जीवन, परंपराओं और विस्थापन के बाद की परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की। विधायक किशोर उपाध्याय ने 2002 में पहली निर्वाचित सरकार के समय की उस महापंचायत को याद किया, जो उन्होंने अपनी ही सरकार के खिलाफ की थी।
साहित्यकार महीपाल सिंह नेगी ने अपने संस्मरणों के माध्यम से टिहरी बांध के इतिहास, पुरानी टिहरी राजवंश और कई महत्वपूर्ण प्रसंगों को साझा किया। अभिनव थापर, देवेंद्र नौडियाल ने वर्ष 1952 से संचालित टिहरी की रामलीला की परंपरा और उसके वर्तमान स्वरूप पर प्रकाश डाला। वहीं शैलेंद्र नौटियाल, सुरेंद्र राणा ने टिहरी बांध के कारण हुए विस्थापन, पुनर्वास को लेकर चले लंबे संघर्ष, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और बांध विरोधी आंदोलन की चर्चा की। उन्होंने पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा के योगदान को भी याद करते हुए कहा कि उनके प्रयासों ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सदस्य दिनेश डोभाल ने टिहरी बांध विस्थापित नई टिहरी शहर के इतिहास और विस्थापित क्षेत्रों की परिस्थितियां साझा की। उन्होंने भानियावाला सहित अन्य इलाकों में बसे विस्थापित परिवारों के तब और अब के संघर्ष को भी सामने रखा। ‘छ्वीं-बात’ में अधिकांश लोगों ने पुरानी टिहरी के कौशल दरबार, पुराना दरबार, स्वामी रामतीर्थ परिसर, खेल मैदानों और शहर के आपसी भाईचारे को याद किया। इस मौके पर कुलदीप पंवार, गोविंद बिष्ट, महावीर उनियाल, भगवान चंद रमोला, गणेश भट्ट, हिमांशु असवाल, प्रमोद रावत आदि मौजूद रहे।
रैंप पर बिखरी पारंपरिक और आधुनिक परिधानों की चमक
नई टिहरी। टिहरी झील महोत्सव के रंगारंग आयोजनों के बीच आयोजित फैशन शो ने दर्शकों का खूब ध्यान खींचा। कोटीकॉलोनी मंच पर जब प्रतिभागियों ने पारंपरिक और आधुनिक परिधानों में रैंप वॉक किया तो पूरा माहौल तालियों और उत्साह से गूंज उठा। फैशन शो में युवाओं और युवतियों ने उत्तराखंड की संस्कृति और आधुनिक फैशन का शानदार प्रदर्शन किया। डीएम नितिका खंडेलवाल ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलता है। संवाद
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नई टिहरी। टिहरी झील महोत्सव हिमालय ओ-टू के दूसरे दिन कोटीकालोनी में ‘छ्वीं-बात’ कार्यक्रम के तहत पुरानी टिहरी पर आधारित नाटिका का मार्मिक मंचन किया गया। नाटिका और संस्मरणों के माध्यम से डूब चुकी पुरानी टिहरी की यादें एक बार फिर ताजा हो उठीं। वहीं, मास्टर शेफ प्रतियोगिता में तीन श्रेणियों के तहत कुल 36 प्रतिभागियों ने फिनाले में जगह बनाई। प्रतियोगिता के विजेताओं को आज रविवार को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह के हाथों पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।
कोटीकालोनी में श्री रामकृष्ण लीला समिति की पहल पर आयोजित ‘छ्वीं-बात’ कार्यक्रम में वक्ताओं ने पुरानी टिहरी के सामाजिक जीवन, परंपराओं और विस्थापन के बाद की परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की। विधायक किशोर उपाध्याय ने 2002 में पहली निर्वाचित सरकार के समय की उस महापंचायत को याद किया, जो उन्होंने अपनी ही सरकार के खिलाफ की थी।
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साहित्यकार महीपाल सिंह नेगी ने अपने संस्मरणों के माध्यम से टिहरी बांध के इतिहास, पुरानी टिहरी राजवंश और कई महत्वपूर्ण प्रसंगों को साझा किया। अभिनव थापर, देवेंद्र नौडियाल ने वर्ष 1952 से संचालित टिहरी की रामलीला की परंपरा और उसके वर्तमान स्वरूप पर प्रकाश डाला। वहीं शैलेंद्र नौटियाल, सुरेंद्र राणा ने टिहरी बांध के कारण हुए विस्थापन, पुनर्वास को लेकर चले लंबे संघर्ष, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और बांध विरोधी आंदोलन की चर्चा की। उन्होंने पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा के योगदान को भी याद करते हुए कहा कि उनके प्रयासों ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सदस्य दिनेश डोभाल ने टिहरी बांध विस्थापित नई टिहरी शहर के इतिहास और विस्थापित क्षेत्रों की परिस्थितियां साझा की। उन्होंने भानियावाला सहित अन्य इलाकों में बसे विस्थापित परिवारों के तब और अब के संघर्ष को भी सामने रखा। ‘छ्वीं-बात’ में अधिकांश लोगों ने पुरानी टिहरी के कौशल दरबार, पुराना दरबार, स्वामी रामतीर्थ परिसर, खेल मैदानों और शहर के आपसी भाईचारे को याद किया। इस मौके पर कुलदीप पंवार, गोविंद बिष्ट, महावीर उनियाल, भगवान चंद रमोला, गणेश भट्ट, हिमांशु असवाल, प्रमोद रावत आदि मौजूद रहे।
रैंप पर बिखरी पारंपरिक और आधुनिक परिधानों की चमक
नई टिहरी। टिहरी झील महोत्सव के रंगारंग आयोजनों के बीच आयोजित फैशन शो ने दर्शकों का खूब ध्यान खींचा। कोटीकॉलोनी मंच पर जब प्रतिभागियों ने पारंपरिक और आधुनिक परिधानों में रैंप वॉक किया तो पूरा माहौल तालियों और उत्साह से गूंज उठा। फैशन शो में युवाओं और युवतियों ने उत्तराखंड की संस्कृति और आधुनिक फैशन का शानदार प्रदर्शन किया। डीएम नितिका खंडेलवाल ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलता है। संवाद