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सरकारी धन का दुरुपयोग : ट्रॉली शोपीस बनी, किसान पीठ पर ढो रहे फसल
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Tue, 14 Apr 2026 07:45 PM IST
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फोटो
बर्नी तोक में नदी पर पुल नहीं और लाखों की ट्रॉली बनी हुई है बेकार
वर्ष 2023 में लगाई गई थी ट्रॉली, किसानों को नहीं मिल रहा लाभ
विजयपाल रावत
नौगांव (उत्तरकाशी)। धारी कलोगी क्षेत्र के बर्नी तोक में नकदी फसलों के ढुलान के लिए लाखों रुपये की लागत से लगाई गई विद्युत संचालित ट्रॉली बिना उपयोग के ही जंग खा रही है। टूटी हुई तारों पर हवा में झूलती ट्रॉली सरकारी धन के दुरुपयोग की कहानी बयां कर रही है।
ट्रॉली वर्ष 2023 में एक स्वयंसेवी संस्था की ओर से एक निजी बैंक के सहयोग से स्थापित की गई थी। इसका उद्देश्य किसानों को राहत देना था ताकि वे अपनी नकदी फसलों को आसानी से मोटर मार्ग तक पहुंचा सके। ट्रॉली की क्षमता दो क्विंटल भार उठाकर लगभग 500 मीटर दूरी मात्र दो से तीन मिनट में तय करने की है लेकिन स्थापना के बाद से इसका उपयोग नहीं हो पाया है।
आज भी क्षेत्र के काश्तकार अपनी फसलें पहले की तरह घोड़े-खच्चरों और पीठ पर ढोकर मोटर मार्ग तक पहुंचा रहे हैं। कुंवा-कफनौल मोटर मार्ग से गुजरने वाले लोग ट्रॉली को शोपीस की तरह देखकर सवाल उठा रहे हैं। बर्नी तोक क्षेत्र में गढ़, चोपड़ा, कसलाना, देवल और न्यूड़ी गांवों की करीब तीन हेक्टेयर सिंचित भूमि है जहां टमाटर, मटर, फ्रेंचबीन, आलू और राजमा जैसी नकदी फसलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है लेकिन बीच में बह रही बर्नी नदी पर पुल नहीं होने के कारण बरसात के दौरान जलस्तर बढ़ने पर किसान अपनी फसलें मोटर मार्ग तक नहीं पहुंचा पाते जिससे भारी नुकसान होता है।
किसानों की इस समस्या के समाधान के लिए ट्रॉली लगाई गई थी लेकिन इसके संचालन में लापरवाही के चलते इसका लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है। उत्तराखंड सरकार में उद्यानिकी परिषद के सदस्य संजय थपलियाल ने कहा कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद ट्रॉली का संचालन न होना चिंताजनक है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले को जल्द ही कृषि मंत्री के समक्ष उठाया जाएगा।
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वर्ष 2023 में लगाई गई थी ट्रॉली, किसानों को नहीं मिल रहा लाभ
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नौगांव (उत्तरकाशी)। धारी कलोगी क्षेत्र के बर्नी तोक में नकदी फसलों के ढुलान के लिए लाखों रुपये की लागत से लगाई गई विद्युत संचालित ट्रॉली बिना उपयोग के ही जंग खा रही है। टूटी हुई तारों पर हवा में झूलती ट्रॉली सरकारी धन के दुरुपयोग की कहानी बयां कर रही है।
ट्रॉली वर्ष 2023 में एक स्वयंसेवी संस्था की ओर से एक निजी बैंक के सहयोग से स्थापित की गई थी। इसका उद्देश्य किसानों को राहत देना था ताकि वे अपनी नकदी फसलों को आसानी से मोटर मार्ग तक पहुंचा सके। ट्रॉली की क्षमता दो क्विंटल भार उठाकर लगभग 500 मीटर दूरी मात्र दो से तीन मिनट में तय करने की है लेकिन स्थापना के बाद से इसका उपयोग नहीं हो पाया है।
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आज भी क्षेत्र के काश्तकार अपनी फसलें पहले की तरह घोड़े-खच्चरों और पीठ पर ढोकर मोटर मार्ग तक पहुंचा रहे हैं। कुंवा-कफनौल मोटर मार्ग से गुजरने वाले लोग ट्रॉली को शोपीस की तरह देखकर सवाल उठा रहे हैं। बर्नी तोक क्षेत्र में गढ़, चोपड़ा, कसलाना, देवल और न्यूड़ी गांवों की करीब तीन हेक्टेयर सिंचित भूमि है जहां टमाटर, मटर, फ्रेंचबीन, आलू और राजमा जैसी नकदी फसलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है लेकिन बीच में बह रही बर्नी नदी पर पुल नहीं होने के कारण बरसात के दौरान जलस्तर बढ़ने पर किसान अपनी फसलें मोटर मार्ग तक नहीं पहुंचा पाते जिससे भारी नुकसान होता है।
किसानों की इस समस्या के समाधान के लिए ट्रॉली लगाई गई थी लेकिन इसके संचालन में लापरवाही के चलते इसका लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है। उत्तराखंड सरकार में उद्यानिकी परिषद के सदस्य संजय थपलियाल ने कहा कि लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद ट्रॉली का संचालन न होना चिंताजनक है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले को जल्द ही कृषि मंत्री के समक्ष उठाया जाएगा।

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