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Balod News: वन विभाग की शर्मनाक करतूत, सरकारी वाहनों से बेशकीमती लकड़ी की तस्करी, नाकों से बिना दस्तावेज गुजरी
अमर उजाला नेटवर्क, बालोद Published by: बालोद ब्यूरो Updated Tue, 20 Jan 2026 06:19 PM IST
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत से सरकारी बेशकीमती लकड़ी की तस्करी का सनसनीखेज मामला सामने आया है। सरकारी वाहनों से बिना वैध दस्तावेज के लकड़ी को काष्ठागार तक पहुंचाया जा रहा था, जिसका आधा हिस्सा आरा मिलों तक पहुंच रहा था। केंद्रीय उड़न दस्ते की टीम ने सूचना के आधार पर फर्नीचर निर्माण स्थलों पर दबिश देकर इस गोरखधंधे का पर्दाफाश किया है। अब पूरा मामला दुर्ग वन मंडल की जांच के दायरे में है।
जांच के दायरे में वन विभाग के अधिकारी
बालोद जिले के वन मंडल अधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि सभी संदिग्धों से बयान लिए जा रहे हैं और घटनास्थल का निरीक्षण कर फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी कराई जा रही है। यह जांच दुर्ग वन मंडल द्वारा की जा रही है और बालोद वन विभाग इसमें पूरा सहयोग कर रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। सवाल यह उठता है कि क्या वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी इस पूरे घटनाक्रम में शामिल थे और जांच रिपोर्ट कब आएगी। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आखिर यह बेशकीमती लकड़ी किसके लिए तस्करी की जा रही थी।
सरकारी गाड़ियों की पायलटिंग का खुलासा
तस्करी की गई लकड़ी को दांडी ब्लॉक के बीटे झर बीट से बालोद के काष्ठागार तक लाने और फर्नीचर केंद्रों तक पहुंचाने के लिए तीन सरकारी वन उपज जांच नाकों से गुजरना पड़ता है। हालांकि, किसी भी नाके पर इस तस्करी को रोका नहीं गया, जिससे अधिकारी-कर्मचारियों की संलिप्तता की आशंका बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, जिस वाहन में कीमती सागौन की लकड़ी की तस्करी की जा रही थी, उसके आसपास वन विभाग की गाड़ियां पायलटिंग कर रही थीं, जो इस पूरे खेल में विभाग की भूमिका को पुष्ट करता है। यह घटना वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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