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कुल्लू दशहरा में 64 साल बाद शामिल हुए व्यासर के तीन देवी-देवता
Ankesh Dogra
Updated Fri, 23 Oct 2026 11:56 AM IST
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अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में इस बार फाटी व्यासर, कोठी रायसन के तीन देवी-देवता 64 साल बाद शामिल हुए हैं। आराध्य देवता कुंबर दान नाग, माता फंगणी और बाबा वीरनाथ ने इस बार उत्सव में शामिल होने की इच्छा जताई थी। इसके बाद हारियान तीनों देवी-देवताओं को लाव-लश्कर के साथ जिला मुख्यालय कुल्लू लेकर पहुंचे हैं।
तीनों देवी-देवताओं के बैठने के लिए राजा की चानणी के पीछे जगह दी गई है। यहां टेंट लगाकर उनके बैठने की व्यवस्था की गई है। लंबे अंतराल के बाद उत्सव में पहुंचने से देवताओं के हारियानों में भी खुशी है।
देवता कुंबर दान नाग के गुर यशपाल ने बताया कि उनके तीनों देवी-देवता 64 साल बाद कुल्लू दशहरा उत्सव में शामिल होने पहुंचे हैं। इससे पहले भी उनके उत्सव में आने की परंपरा रही है, लेकिन एक दौर ऐसा आया जब देवी-देवताओं के साथ आने वाले लोगों को खर्चों से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसके चलते देवी-देवताओं को उत्सव में लाना संभव नहीं हो पाया।
यशपाल के अनुसार, इस बार देवी-देवताओं ने अपने गुर के माध्यम से देववाणी कर आदेश दिया कि उन्हें भगवान रघुनाथ की चाकरी यानी सेवा के लिए जाना है। इसके बाद हारियानों ने देव आदेश का पालन करते हुए तीनों देवी-देवताओं को उत्सव में शामिल करवाया।
देवता के कारदार ओम प्रकाश ने बताया कि इससे पहले तीनों देवी-देवता वर्ष 1962 में दशहरा उत्सव में शामिल हुए थे। उस समय उनके दादा तुलू राम कारदार थे। इसके बाद परिस्थितियां ऐसी बनीं कि हारियान देवी-देवताओं को उत्सव में नहीं ला सके।
उन्होंने बताया कि दशहरा समिति की ओर से हर साल देवी-देवताओं को निमंत्रण मिलता रहा है। इस बार देवताओं के उत्सव में पहुंचने के बाद उन्हें राजा की चानणी के पीछे स्थान दिया गया है।
ओम प्रकाश के अनुसार, पूर्वजों से सुना था कि दशहरा उत्सव के दौरान उनके देवी-देवताओं के बैठने का स्थान प्रदर्शनी मैदान में मोहणी के पेड़ के नीचे हुआ करता था। हालांकि, इस बार चानणी के पास जगह मिलने से हारियान संतुष्ट हैं।
इन तीनों देवी-देवताओं की खासियत है कि वे किसी भी देव आयोजन में एकसाथ शामिल होते हैं। गुर यशपाल ने बताया कि देवता कुंबर दान नाग और बाबा वीरनाथ गौहरी के रथ बने हुए हैं, जबकि माता फंगणी करनाल में विराजमान होती हैं।
उन्होंने बताया कि क्षेत्र में कोई भी देव आयोजन हो या कहीं आने-जाने का अवसर हो, तीनों देवी-देवता एकसाथ ही जाते हैं। देवता कुंबर दान नाग को ठारा नागों में से एक माना जाता है।
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