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INDIA Alliance Meeting: What did Akhilesh and Rahul discuss regarding the 2027 UP elections during the INDIA b
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India Alliance Meeting: INDIA Bloc की मीटिंग में अखिलेश-राहुल की UP Election 2027 पर क्या हुई बात?
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Mon, 08 Jun 2026 08:48 PM IST
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क्या उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा गठबंधन आकार ले रहा है? क्या दिल्ली में हुई India Bloc की मुलाकात 2027 के चुनावी समीकरण बदल सकती है? INDIA ब्लॉक की बैठक में जब राहुल गांधी और अखिलेश यादव साथ बैठे, तो सिर्फ तस्वीरें ही नहीं बनीं, बल्कि सियासी गलियारों में नई चर्चाओं ने भी जोर पकड़ लिया। बैठक के बाद दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत ने सीट शेयरिंग से लेकर यूपी की चुनावी रणनीति तक कई अटकलों को जन्म दे दिया है। दूसरी ओर, विपक्ष ने महंगाई, बेरोजगारी, नीट पेपर लीक और चुनावी प्रक्रिया जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने का बड़ा रोडमैप भी तैयार कर लिया है। आखिर INDIA ब्लॉक की इस बैठक से क्या निकला, और क्या यूपी में भाजपा के खिलाफ विपक्ष नई बिसात बिछाने जा रहा है? आखिर INDIA ब्लॉक की बैठक में अखिलेश-राहुल के बीच क्या बातचीत हुई? जानेंगे इन तमाम सवालों के जवाब इस वीडियो में।
दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में सोमवार को हुई INDIA ब्लॉक की अहम बैठक ने विपक्षी राजनीति को नई ऊर्जा देने का काम किया। बैठक में शामिल हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच दिखी गर्मजोशी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। दोनों नेता बैठक के दौरान एक-दूसरे के करीब बैठे नजर आए और बैठक के बाद भी उनकी अलग से बातचीत होने की चर्चा है। माना जा रहा है कि इस दौरान अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने बैठक के बाद मुलाकात कर भविष्य की रणनीति और गठबंधन की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, ऐसे में सीटों के बंटवारे और चुनावी तालमेल को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। इससे पहले भी अखिलेश यादव कई बार संकेत दे चुके हैं कि भाजपा को चुनौती देने के लिए विपक्षी दलों को साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहिए।
लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में भाजपा को बड़ा झटका दिया था। विपक्ष का दावा है कि इसी गठबंधन की वजह से भाजपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। ऐसे में अब दोनों दल 2027 के विधानसभा चुनाव में भी इसी तालमेल को आगे बढ़ाने की संभावनाएं तलाशते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सपा और कांग्रेस एकजुट होकर चुनाव लड़ते हैं तो भाजपा के सामने कड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।
हालांकि बैठक का मुख्य फोकस केवल उत्तर प्रदेश नहीं था। INDIA ब्लॉक के नेताओं ने देश के कई अहम मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने का फैसला किया। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्षी गठबंधन पांच प्रमुख मुद्दों पर एकमत हुआ है और आने वाले समय में सरकार को संसद से लेकर सड़क तक घेरने की तैयारी की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विपक्ष पीछे हटने वाला नहीं है और जनता के मुद्दों पर संघर्ष जारी रहेगा।
खरगे ने महंगाई, बेरोजगारी और देश की आर्थिक स्थिति को सबसे बड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि इन सवालों को लेकर विपक्ष देशव्यापी अभियान चलाएगा। उनका आरोप था कि लगातार बढ़ती महंगाई और रोजगार के अवसरों की कमी से आम जनता परेशान है, लेकिन सरकार इन मुद्दों पर गंभीरता नहीं दिखा रही है।
बैठक में नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि परीक्षा प्रणाली में बार-बार हो रही अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य को संकट में डाल दिया है। INDIA ब्लॉक ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि सरकार इस मामले में जवाबदेही तय करने में विफल रही है। विपक्ष ने यह भी संकेत दिया कि संसद के आगामी मॉनसून सत्र में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया जाएगा।
बैठक में एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया गया कि विपक्षी गठबंधन मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया और मतदान अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंता व्यक्त करेगा। विपक्ष का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कुछ फैसले लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित कर सकते हैं।
साथ ही यह भी तय किया गया कि INDIA ब्लॉक की बैठक अब हर दो महीने में नियमित रूप से आयोजित होगी। अगली बैठक आठ अगस्त को हैदराबाद में बुलाई गई है। विपक्षी दलों का मानना है कि लगातार संवाद और समन्वय से गठबंधन को और मजबूत बनाया जा सकता है।
कुल मिलाकर दिल्ली की इस बैठक ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि विपक्ष अब बिखरा हुआ नहीं दिखना चाहता। राहुल गांधी और अखिलेश यादव की बढ़ती नजदीकियों से लेकर सरकार के खिलाफ साझा रणनीति तक, INDIA ब्लॉक ने आने वाले चुनावी और संसदीय संघर्ष की स्पष्ट रूपरेखा पेश कर दी है। अब नजर इस बात पर होगी कि यह एकजुटता जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है।
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