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Indore water contamination: 12 deaths so far due to toxic water in Indore, CM Mohan meets patients!
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Indore water contamination:इंदौर में जहरीले पानी से अब तक12 मौतें, मरीजों से मिले CM मोहन!
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Thu, 01 Jan 2026 01:53 AM IST
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, "भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पीने के पानी से लोगों के बीमार पड़ने की जानकारी मिली है। तुरंत 40,000 से ज़्यादा लोगों की जांच की गई, जिनमें से 2,456 लोगों में संदेहास्पद लक्षण दिखे और 212 लोगों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया। इनमें से 50 मरीज़ ठीक होकर डिस्चार्ज हो गए हैं, जबकि 162 मरीज़ अभी भी भर्ती हैं। आज मैंने अस्पतालों में कुछ मरीज़ों से मुलाकात की; उनकी हालत स्थिर है. सरकार किसी भी हालत में लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। पानी से जुड़ी शिकायतों वाले किसी भी इलाके की पूरी जांच की जाएगी, और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे.दोबारा ऐसी स्थिति न हो इसका सरकार प्रबंधन करेगी.हम आगे और कठोर प्रावधान करेंगे.हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि ऐसी घटना दोबारा न हो.मरने वालों की संख्या चार बताई गई है.जो हुआ वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, और हमने जांच के आदेश भी दिए हैं।"
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी (नर्मदा जल आपूर्ति लाइन में सीवर का पानी मिलने) के कारण फैली बीमारी से अब तक आधिकारिक और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 8 से 11 लोगों की मौत की खबर सामने आई है, हालांकि कुछ स्थानीय दावों में यह संख्या 12 तक बताई जा रही है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार शाम स्वयं इंदौर पहुंचे और विभिन्न अस्पतालों में भर्ती मरीजों व उनके परिजनों से मुलाकात कर उनका हाल जाना। मुख्यमंत्री ने इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने और सभी बीमार व्यक्तियों के मुफ्त इलाज (इलाज का पूरा खर्च सरकार द्वारा वहन करने) की घोषणा की है।
प्रशासनिक स्तर पर कड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर नगर निगम के एक जोनल अधिकारी और एक असिस्टेंट इंजीनियर को निलंबित (सस्पेंड) कर दिया गया है, जबकि एक इन-चार्ज सब-इंजीनियर की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। घटना की उच्च स्तरीय जांच के लिए एक IAS अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पेयजल लाइन में लीकेज के कारण गंदा पानी मिल गया था, जिससे क्षेत्र के लगभग 1100 से अधिक लोग प्रभावित हुए और बड़ी संख्या में लोग उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद अस्पतालों में भर्ती हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए पूरे शहर की जल आपूर्ति लाइनों की समीक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
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