Hindi News
›
Video
›
India News
›
Swami Avimukteshwaranand FIR: Akhilesh Yadav furious over the FIR against Swami Avimukteshwaranand!
{"_id":"699adfec84c5488ea805947d","slug":"swami-avimukteshwaranand-fir-akhilesh-yadav-furious-over-the-fir-against-swami-avimukteshwaranand-2026-02-22","type":"video","status":"publish","title_hn":"Swami Avimukteshwaranand FIR : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर FIR को लेकर भड़के अखिलेश यादव!","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Swami Avimukteshwaranand FIR : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर FIR को लेकर भड़के अखिलेश यादव!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Sun, 22 Feb 2026 04:22 PM IST
Link Copied
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक विशेष पॉक्सो कोर्ट ने आदेश दिया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ यौन शोषण के गंभीर आरोपों में FIR दर्ज की जाए। अदालत के इस निर्देश के बाद झूंसी थाने में (POCSO) समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि माघ मेले और अन्य अवसरों पर दो नाबालिगों के साथ शोषण हुआ था और उनकी शिकायत पर कोर्ट ने पुलिस को जांच का आदेश दिया है। आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी ने अपने आवेदन में कहा कि नाबालिगों ने उन्हीं से शोषण का अनुभव बताया था, पुलिस प्रारंभिक रूप से कार्रवाई नहीं कर रही थी, जिससे उन्हें न्यायालय का रुख करना पड़ा। अब एफआईआर दर्ज होने के बाद मामला पुलिस जांच के तहत आगे बढ़ेगा और कोर्ट के निर्देशानुसार साक्ष्य एवं विवरण इकट्ठा किए जाएंगे।
इस आदेश के बाद अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से कहा कि यह एक “झूठा आरोप” है और वे निष्पक्ष न्याय तथा प्रमाणों के खुलासे में विश्वास रखते हैं; साथ ही उन्होंने आरोप लगाने वाले की साख पर भी सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि यह उनके खिलाफ साजिश हो सकती है। उनका कहना है कि सच्चाई न्याय प्रक्रिया में ही सामने आएगी।
एफआईआर की खबर सामने आने के बाद राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी तेज़ हो गईं। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर सख़्त बयान दिया और कहा कि साधु-संतों को सम्मान देना भारतीय समाज की परंपरा है और वर्तमान सरकार इस संवेदनशील मामले में असंतुलित रवैया अपना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार साधु-संतों के खिलाफ ऐसे मामलों को राजनीतिक रूप से भुनाने की कोशिश कर रही है। अखिलेश ने कहा कि अगर साधु-संतों के साथ इस तरह की कार्रवाई होती है तो इससे हिंदू समाज के धार्मिक संस्थानों और समाज की भावनाओं को ठेस पहुँच सकती है, और इस तरह की घटनाओं पर नीति और संवेदनशीलता के साथ विचार होना चाहिए।
अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस का विषय भी बनाया, जहां उन्होंने बिना नाम लिये प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री पर तंज भी कसा कि केवल बाहरी प्रतीक (जैसे कपड़े और दिखावे) से कोई “योगी” नहीं बन जाता, और विवादों तथा गंभीर आरोपों के समय प्रशासन को संवेदनशीलता से काम लेना चाहिए। उनका बयान यह भी दर्शाता है कि समाजवादी पार्टी इसे सरकार की नीतियों और प्रचार का हिस्सा मान रही है, खासकर आगामी चुनावों के मद्देनज़र।
कुल मिलाकर, यह मामला न केवल एक गंभीर जातीय और कानूनी जाँच की दिशा में बढ़ा है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति, धार्मिक संस्थाओं और समाज के बीच की गतिशीलता को भी चुनौती दे रहा है, जहाँ विभिन्न पक्ष अपने-अपने दृष्टिकोणों से इसे उठा रहे हैं।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।