#WATCH | दिल्ली: समाजवादी पार्टी सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा, "SIR के ज़रिए इस देश के करोड़ों लोगों के वोट काटने की पूरी योजना मौजूदा सरकार की है। पिछले सत्र में यह बात बहुत ज़ोरदार तरीके से उठाई गई थी, यहां तक कि विपक्ष की तरफ़ से भी, हमारे नेता अखिलेश यादव और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में, हम चुनाव आयोग से मिले थे... लेकिन यह दुख की बात है कि चुनाव आयोग, जिसकी ज़िम्मेदारी लोकतंत्र को बचाना है, सरकार के दबाव में काम करता दिख रहा है। जो शंका थी कि लाखों लोगों के वोट काटे जाएंगे, बिहार में यह हुआ और अब दूसरे राज्यों में भी यही तैयारी चल रही है कल से संसद का सत्र है, उसमें भी सभी विपक्षी नेता यह मुद्दा उठाएंगे।
उत्तर प्रदेश में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) अभियान को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मुख्य विपक्षी दल, समाजवादी पार्टी (सपा), इस पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठा रही है और इसे मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकार को छीनने की "सोची-समझी साजिश" बता रही है। सपा का मुख्य आरोप है कि इस अभियान के माध्यम से गरीबों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों सहित बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम फर्जी तरीके से काटे जा रहे हैं ताकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को आगामी चुनावों में फायदा मिल सके। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग और भाजपा पर मिलीभगत का आरोप लगाया है और SIR की प्रक्रिया में हो रही कथित अनियमितताओं को संसद में उठाने और सड़क पर विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
इसके अतिरिक्त, सपा ने अधिकारियों की जाति और धर्म के आधार पर तैनाती का आरोप लगाते हुए प्रक्रिया की तटस्थता पर सवाल उठाया है। गाजियाबाद में SIR के काम में लापरवाही बरतने के आरोप में 21 बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने और कथित कार्य दबाव के कारण एक बीएलओ (विजय वर्मा) की मृत्यु होने जैसे मामले भी विवाद को बढ़ा रहे हैं, जिसके लिए सपा ने सरकार और निर्वाचन आयोग को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, भाजपा और सरकार के मंत्री इन आरोपों को खारिज करते हुए कह रहे हैं कि विपक्ष फर्जी वोट बनवाने का आदी है और मतदाता सूची को शुद्ध करने के इस आवश्यक लोकतांत्रिक प्रयास से डरा हुआ है।