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Weather Update: Rain wreaks havoc in Gujarat and Assam; monsoon impact expected in these states! Rain Alert.
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Weather Update: गुजरात-असम में बारिश का कहर, इन राज्यों में Monsoon का दिखेगा असर! Rain Alert
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Sat, 25 Jul 2026 10:47 AM IST
कहीं राहत बनकर बरस रहा मानसून... तो कहीं आफत बनकर टूट रही बारिश। एक तरफ देश में मानसून की रफ्तार तेज हुई है और बारिश की कमी घटने लगी है... तो दूसरी तरफ अल नीनो का बढ़ता असर मौसम वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा रहा है। सवाल ये है... क्या आने वाले दिनों में बारिश राहत देगी या तबाही? देखिए ये रिपोर्ट।
देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहा है। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक, 16 से 22 जुलाई के बीच देशभर में लगभग सामान्य बारिश दर्ज की गई है। इसका असर यह हुआ कि 1 जून से अब तक चली आ रही बारिश की कमी घटकर 17 प्रतिशत रह गई है। आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में सामान्य 370.9 मिलीमीटर के मुकाबले 306.9 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। यानी तस्वीर पहले से बेहतर जरूर हुई है, लेकिन मानसून अब भी सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच पाया है।
अगर अलग-अलग क्षेत्रों की बात करें तो उत्तर-पश्चिम, मध्य और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश सामान्य के करीब रही। लेकिन दक्षिण भारत में अब भी 26 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा चिंता पूर्व और पूर्वोत्तर भारत को लेकर है, जहां सामान्य से 32 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। वहीं उत्तर-पश्चिम भारत में 10 प्रतिशत और मध्य भारत में सिर्फ 6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में सामान्य से अधिक बारिश हुई, जबकि पंजाब, हरियाणा, गुजरात, गोवा, बिहार, झारखंड और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में अब भी बारिश का बड़ा घाटा बना हुआ है।
हालांकि मौसम विभाग की सबसे बड़ी चिंता अल नीनो है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान लगातार बढ़ रहा है और अल नीनो पहले से ज्यादा मजबूत होता दिखाई दे रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर इसका प्रभाव बढ़ता है तो मानसून कमजोर पड़ सकता है और बारिश का वितरण असंतुलित हो सकता है। यही वजह है कि मानसून के बाकी बचे सीजन पर मौसम विभाग लगातार नजर बनाए हुए है।
अच्छी खबर यह है कि अगले कुछ दिनों में देश के कई हिस्सों में बारिश और तेज होने की संभावना है। 24 से 29 जुलाई के बीच कई मौसम प्रणालियां एक साथ सक्रिय रहेंगी। दक्षिण-पूर्व राजस्थान, गुजरात, उत्तर कोंकण और उत्तर मध्य महाराष्ट्र में भारी से बहुत भारी और कुछ इलाकों में अत्यंत भारी बारिश का अनुमान है। इसके अलावा पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर राज्यों और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में भी व्यापक वर्षा की संभावना जताई गई है।
लेकिन जहां बारिश राहत लेकर आती है, वहीं कई जगह यही बारिश संकट भी बन रही है। गुजरात में लगातार तीन दिनों की मूसलाधार बारिश के कारण 38 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा, जबकि 352 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू किया गया। बारिश से जुड़ी घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो चुकी है और कई गांवों का संपर्क बाकी इलाकों से कट गया है। उधर असम में बाढ़ का संकट और गहरा गया है। राज्य में अब तक 61 लोगों की मौत हो चुकी है और सात लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा बालटाल मार्ग से फिर शुरू हो गई है, लेकिन भूस्खलन के कारण मचैल माता यात्रा फिलहाल स्थगित है, जबकि वैष्णो देवी यात्रा दोबारा शुरू करने की तैयारी चल रही है।
मानसून ने रफ्तार तो पकड़ ली है, लेकिन चुनौती अभी खत्म नहीं हुई। एक तरफ बारिश की कमी धीरे-धीरे कम हो रही है, तो दूसरी तरफ अल नीनो का बढ़ता असर भविष्य को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर रहा है। ऐसे में आने वाले कुछ हफ्ते तय करेंगे कि इस बार मानसून देश के खेतों के लिए वरदान बनेगा... या फिर कई राज्यों के लिए एक नई परीक्षा।
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