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Why did Khamenei remember India amid massive protests in Iran? He spoke to S. Jaishankar over the phone.
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ईरान में भारी विरोध के बीच खामेनेई को क्यों याद आया भारत ? एस.जयशंकर से की फोन पर बात
वीडियो डेस्क,अमर उजाला Published by: साहिल सुयाल Updated Thu, 15 Jan 2026 11:34 AM IST
क्या ईरान एक और ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है? क्या तेहरान की सड़कों पर उठता गुस्सा किसी बड़े भू-राजनीतिक तूफान का संकेत है? और क्या अमेरिका की बढ़ती सैन्य धमकियों के बीच ईरान अब अपने पुराने दोस्तों की ओर मदद के लिए देख रहा है? इन्हीं सवालों के बीच एक अहम कूटनीतिक हलचल सामने आई है जब ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को फोन किया। यह बातचीत ऐसे वक्त में हुई है, जब ईरान अंदर से सुलग रहा है और बाहर से दबाव में है।
बीते दो हफ्तों से ईरान की सड़कों पर हालात बेकाबू हैं। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ गुस्सा खुलकर सामने आ चुका है। आगजनी, हिंसा और झड़पों के बीच हजारों लोग सरकार के खिलाफ उतर आए हैं। सुरक्षा बलों की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है, लेकिन प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे। ऐसे हालात में अमेरिका की ओर से संभावित सैन्य हस्तक्षेप की आशंका ने ईरान की चिंता और बढ़ा दी है। यही वह पृष्ठभूमि है, जिसमें ईरान ने भारत से संपर्क किया है।
बुधवार, 14 जनवरी को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने एस. जयशंकर से फोन पर बात की। इस बातचीत की जानकारी खुद जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की। उन्होंने लिखा कि ईरानी विदेश मंत्री का फोन आया और दोनों के बीच ईरान और उसके आसपास बदलती स्थिति पर चर्चा हुई। हालांकि उन्होंने बातचीत का विस्तृत ब्यौरा नहीं दिया, लेकिन इस कॉल को ईरान की बिगड़ती स्थिति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, जब कोई देश अंदरूनी विद्रोह और बाहरी दबाव, दोनों से घिरा होता है, तब वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन और संवाद की तलाश करता है। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से रणनीतिक और आर्थिक रिश्ते रहे हैं चाहे वह चाबहार पोर्ट हो या ऊर्जा सहयोग। ऐसे में यह फोन कॉल सिर्फ औपचारिक बातचीत नहीं, बल्कि एक कूटनीतिक संकेत भी माना जा रहा है कि ईरान मौजूदा संकट में अपने अहम साझेदारों से संपर्क बनाए रखना चाहता है।
इस बीच एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में हिंद महासागर रिम एसोसिएशन (IORA) के महासचिव संजीव रंजन से भी मुलाकात की। इस बैठक में हिंद महासागर क्षेत्र के देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। बातचीत का केंद्र बिंदु था सरकारों, व्यापार जगत और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल कैसे बनाया जाए। जयशंकर ने कहा कि क्षेत्रीय सहयोग से न केवल आर्थिक संभावनाएं बढ़ेंगी, बल्कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा भी मजबूत होगी। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा कि IORA के साथ बातचीत का उद्देश्य संगठन के ढांचे के भीतर सहयोग को आगे बढ़ाना और क्षेत्र में टिकाऊ व समावेशी विकास को प्रोत्साहित करना है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब वैश्विक भू-राजनीति तेजी से बदल रही है और समुद्री व्यापार, ऊर्जा मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चुनौतियां सामने आ रही हैं।
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