प्रदेश सरकार द्वारा दमोह जिले सहित 15 अन्य जिलों में 'गो वन्य विहार' स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है, जहां बेसहारा गोवंश को सुरक्षित रूप से रखा जाएगा। पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने गुरुवार को दमोह में मीडिया से चर्चा के दौरान इस योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री इस समस्या को गंभीरता से ले रहे हैं, क्योंकि सड़कों पर आवारा गोवंश के कारण सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं।
प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि छोटी-छोटी गौशालाओं के बजाय बड़े 'गो वन्य विहार' बनाए जाएंगे, जो अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे। इन अभयारण्यों में हजारों मवेशियों के लिए चारा, चिकित्सा, आश्रय और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके लिए सरकार ने 15 जिलों में सैकड़ों एकड़ भूमि आवंटित करने की योजना बनाई है।
पथरिया विधानसभा क्षेत्र के सीतानगर में 515 एकड़ भूमि में एक हाईटेक 'गो अभयारण्य' स्थापित किया जाएगा। इस अभयारण्य में लगभग दस हजार बेसहारा गोवंश को आश्रय दिया जाएगा। यहां आधुनिक गौशाला, प्रशिक्षण केंद्र, वेटरनरी अस्पताल, गेस्ट हाउस, बड़े शेड और जैविक खाद निर्माण की भी व्यवस्था होगी।
सड़क पर बेसहारा गोवंश की बढ़ती संख्या के कारण सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि हो रही है, जिससे वाहन चालकों और मवेशियों की मौतें हो रही हैं। विशेष रूप से दमोह-जबलपुर मार्ग के सिग्रामपुर क्षेत्र में बड़ी संख्या में गोवंश सड़कों पर बैठे दिखाई देते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार ने 'गो वन्य बिहार' परियोजना को प्राथमिकता दी है।
पशुपालन मंत्री पटेल ने बताया कि इन 15 गो वन्य विहार की स्थापना जल्द ही शुरू होगी, जिससे आवारा गोवंश की समस्या का स्थायी समाधान हो सकेगा। सरकार का यह प्रयास गोवंश संरक्षण और सड़कों पर हो रही दुर्घटनाओं को रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।