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Uproar at Morena Municipal Corporation meeting; atmosphere heated by slogans of "Donation thief, step down."
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Morena News: मुरैना नगर निगम की बैठक में जमकर हंगामा, ‘चंदा चोर, गद्दी छोड़’ के नारों से गरमाया माहौल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुरैना Published by: मुरैना ब्यूरो Updated Fri, 07 Aug 2026 07:43 PM IST
मुरैना नगर निगम परिषद की बैठक गुरुवार को शुरू होते ही हंगामे की भेंट चढ़ गई। महापौर की अनुपस्थिति में आयोजित बैठक के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षद आमने-सामने आ गए। तीखी नोकझोंक के बीच एक-दूसरे पर आरोप लगाए गए और देखते ही देखते सदन का माहौल पूरी तरह गरमा गया।
बैठक के दौरान विपक्ष की ओर से ‘भ्रष्टाचार बंद करो’ और ‘चंदा चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारे लगाए गए। नारेबाजी और हंगामे के कारण निगम परिषद की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। दरअसल, बैठक में सबसे बड़ा विवाद एक पत्र को लेकर खड़ा हुआ। नेता प्रतिपक्ष की ओर से अभियाचित सम्मेलन बुलाने की मांग को लेकर यह पत्र प्रस्तुत किया गया था। दावा किया गया कि पत्र पर भाजपा के चार पार्षदों के हस्ताक्षर मौजूद हैं।
बैठक के दौरान संबंधित एमआईसी सदस्यों ने पत्र पर मौजूद हस्ताक्षरों को लेकर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि पत्र पर किए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। इस दावे के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच विवाद और बढ़ गया। मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष विनीत कंसाना ने सत्ता पक्ष के पार्षदों के दावे पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि अगर संबंधित पार्षदों के हस्ताक्षर नहीं हैं, तो वे इसकी पुष्टि करें और जरूरत पड़े तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएं। नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि पत्र पर किए गए हस्ताक्षर उन्हीं पार्षदों के हैं और अब वह अपने हस्ताक्षर से पीछे हट रहे हैं।
इसके बाद दोनों पक्षों के बीच जमकर बहस हुई। पार्षद एक-दूसरे पर आरोप लगाते नजर आए। हंगामे और नारेबाजी के बीच निगम परिषद की बैठक का माहौल लगातार तनावपूर्ण बना रहा। महापौर की गैरमौजूदगी और लगातार बढ़ते विवाद के चलते आखिरकार बैठक को स्थगित कर दिया गया। अब इस पूरे विवाद के बाद नगर निगम की सियासत गरमा गई है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस पत्र को लेकर विवाद खड़ा हुआ, उस पर किए गए हस्ताक्षर आखिर किसके हैं? क्या वास्तव में भाजपा के चार पार्षदों ने पत्र पर हस्ताक्षर किए थे या फिर उनके नाम और हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया गया? फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पर कायम हैं और मामले ने नगर निगम की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।
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