रतलाम के एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर को साइबर ठगों द्वारा 28 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखकर 1.34 लाख रुपये की ठगी करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपियों ने प्रोफेसर को उनके पुत्र के कनाडा में गिरफ्तार होने और भारत वापस नहीं आने देने का भय दिखाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। शिकायत मिलने पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि 20 से अधिक आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं।
एसपी अमित कुमार ने मंगलवार शाम पत्रकारवार्ता में मामले का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपियों के तार भारत के कई राज्यों के साथ कनाडा और कंबोडिया से जुड़े हुए हैं। गिरफ्तार आरोपी असम, बिहार, उत्तर प्रदेश, कश्मीर, गुजरात, जबलपुर और नीमच के निवासी हैं।
वीडियो कॉल पर कोर्ट-रूम का नाटक, बेटे को मारने की धमकी
एसपी ने बताया कि अज्ञात आरोपियों ने प्रोफेसर को व्हाट्सऐप कॉल कर पहले उनके बैंक खातों और निजी जानकारी हासिल की। इसके बाद उन्हें बताया गया कि उनका बैंक खाता मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हो रहा है। जब आरोपियों को यह जानकारी मिली कि प्रोफेसर का पुत्र कनाडा में रहता है, तो उन्होंने दावा किया कि पुत्र को गिरफ्तार कर लिया गया है।
आरोपियों ने वीडियो कॉल के जरिए फर्जी कोर्ट रूम, जज, वकील और गवाहों के दृश्य दिखाकर प्रोफेसर को डराया और कहा कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो उनके पुत्र को गोली मार दी जाएगी और भारत नहीं लौटने दिया जाएगा। भय के चलते प्रोफेसर ने व्हाट्सऐप के माध्यम से आधार कार्ड सहित अन्य निजी दस्तावेज भी साझा कर दिए।
डर के कारण परिवार को नहीं दी जानकारी
आरोपियों ने बार-बार फोन कर पीड़ित से कहा कि इस मामले की जानकारी किसी को न दें और अलग-अलग बैंक खातों में रुपये ट्रांसफर कराए जाते रहे। डर के कारण प्रोफेसर ने न तो अपने बेटे और न ही परिवार के किसी सदस्य को कथित गिरफ्तारी की जानकारी दी। यहां तक कि पैसे खत्म होने पर उन्होंने परिचितों से उधार लेकर भी रकम भेजी और मकान गिरवी रखने तक की नौबत आ गई।
बेटे के लौटने पर खुला मामला
12 दिसंबर के बाद जब प्रोफेसर का पुत्र कनाडा से रतलाम स्थित घर लौटा और बैंक खाते से अन्य खातों में हुए ट्रांसफर के बारे में पूछा, तब पूरी घटना सामने आई। इसके बाद ई-एफआईआर दर्ज कराई गई और पीड़ित अपने पुत्र के साथ एसपी कार्यालय पहुंचा। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 319(2), 308 और आईटी एक्ट की धारा 66(सी) व 66(डी) के तहत प्रकरण दर्ज किया।
क्रिप्टो करेंसी में बदली गई रकम, 11.40 लाख रुपये फ्रीज
मामले की जांच के लिए एएसपी (शहर) राकेश खाखा, एएसपी (ग्रामीण) विवेक कुमार लाल के मार्गदर्शन और सीएसपी सत्येंद्र घनघोरिया के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया। साइबर सेल की कार्रवाई में आरोपियों के विभिन्न बैंक खातों में 11.40 लाख रुपये फ्रीज कराए गए हैं।
गिरोह का सरगना बिहार का राजेश कुमार
पुलिस के अनुसार गिरोह का मुख्य सरगना राजेश कुमार निवासी सिवान (बिहार) है। अब तक गिरफ्तार आरोपियों में अमरेंद्र कुमार मौर्य (गोरखपुर), अशोक, सनी, सारांश उर्फ शानू और एक 17 वर्षीय नाबालिग (जबलपुर), आरिफ घाटा, हमीद खान, शाहीद कुरैशी, सादिक हसन समा (जामनगर), और पवन कुमावत (नीमच) शामिल हैं। सभी आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।
कश्मीर की युवती कर रही थी गिरोह का संचालन
जांच में सामने आया है कि गिरोह का संचालन कश्मीर की एक युवती कर रही थी। उसके निर्देश पर बिहार के आरोपी असम जाकर वहां से डिजिटल अरेस्ट के जरिए ठगी को अंजाम देते थे। ठगी की रकम को जबलपुर, जामनगर, अहमदाबाद और नीमच के फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कर गुजरात के सूरत स्थित आढ़तियों के माध्यम से विदेशी खातों में क्रिप्टो करेंसी में बदला जाता था।
आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में पाकिस्तान के वर्चुअल फोन नंबर भी मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। पुलिस को यह भी पता चला है कि जबलपुर में कई लोगों के फर्जी बैंक खाते खुलवाकर कमीशन पर उनका इस्तेमाल किया जा रहा था।
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एनजीओ संचालक के खाते में 2.36 करोड़ का संदिग्ध लेनदेन
एसपी अमित कुमार ने बताया कि जांच में गोरखपुर के एनजीओ संचालक अमरेंद्र कुमार मौर्य के खाते में 2.36 करोड़ रुपये का संदिग्ध लेनदेन सामने आया है, जिसमें पीड़ित प्रोफेसर के खाते से भेजे गए 49 लाख रुपये भी शामिल हैं। अन्य आरोपियों के खातों में भी लाखों रुपये के ट्रांजैक्शन पाए गए हैं। जांच के दौरान और भी आरोपियों के नाम सामने आने की संभावना जताई गई है।