मध्यप्रदेश के सतना जिले में पॉक्सो एक्ट की विशेष अदालत ने एक अत्यंत गंभीर मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए नाबालिग किशोर से दुराचार (कुकर्म) के दोषी को अंतिम सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने दोषी पर 20 हजार रुपए का अर्थदंड और पीड़ित को 2 लाख रुपए प्रतिकर (मुआवजा) राशि देने का आदेश दिया है।
जानिए क्या है पूरा मामला
अभियोजन पक्ष से मिली जानकारी के मुताबिक पीड़ित किशोर अपनी पढ़ाई के सिलसिले में स्थानीय विद्यालय के छात्रावास में रहता था। बीते 24 अगस्त 2023 को पेट में दर्द होने के कारण वह स्कूल नहीं गया था और छात्रावास के कमरे में ही आराम कर रहा था। इसी दौरान आरोपी रावेन्द्र सेन निवासी कांसा, थाना देहात वहां पहुंचा और उसने नाबालिग के साथ कुकर्म की घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। घटना के तुरंत बाद डरे-सहमे पीड़ित ने फोन के जरिए अपने परिजनों को पूरी बात बताई। इसके बाद परिजन तुरंत छात्रावास पहुंचे और कोलगवां थाने में जाकर आरोपी के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई।
डीएनए रिपोर्ट और साक्ष्यों के आधार पर सजा
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया और विवेचना पूरी कर न्यायालय में चालान पेश किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने घटना को वैज्ञानिक रूप से साबित करने के लिए डीएनए टेस्ट का सहारा लिया, डॉ. कमलेश कैथोलिया द्वारा अदालत में डीएनए रिपोर्ट पेश की गई।
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न्यायालय ने गवाह और सबूत के आधार पर माना दोषी
विशेष न्यायाधीश अमर सिंह सिसोदिया की अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध तमाम साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और डीएनए रिपोर्ट का बारीकी से परीक्षण किया। अपराध की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने आरोपी रावेन्द्र सेन को भारतीय दंड संहिता (भादवि) की धारा 377 और पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत दोषी करार दिया। कोर्ट ने उसे ताउम्र यानी अंतिम सांस तक कारावास की सजा सुनाई। इस पूरे मामले में राज्य की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक एवं एडीपीओ अनूप गुप्ता ने की, जिन्हें उपनिदेशक शेख वसीम और सहायक निदेशक ज्योति जैन का मार्गदर्शन प्राप्त था।