सीहोर की बहुचर्चित पनीर फैक्टरी पर ईडी की बड़ी कार्रवाई और सीलिंग के बावजूद उसका संचालन बंद नहीं हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि फैक्टरी अब नए नाम और गुप्त तरीकों से दिन-रात काम कर रही है, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं।
जांच में सामने आया है कि पहले जयश्री गायत्री फूड (मिल्क मैजिक) के नाम से चल रही यह फैक्टरी अब हेल्थ ब्रिज प्राइवेट लिमिटेड के नाम से संचालित हो रही है। कंपनी ने बोर्ड बदलकर अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की है ताकि प्रशासन को भ्रमित किया जा सके। स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, फैक्ट्री के मुख्य गेट पर ताला लटका रहता है, जिससे यह दिखे कि कार्रवाई के बाद फैक्ट्री बंद है। लेकिन पीछे के रास्तों से मजदूर, वाहन और कच्चा माल लगातार अंदर-बाहर हो रहे हैं। अंदर पनीर, घी और दूध उत्पादों की पैकिंग तेजी से जारी है।
सुरक्षा गार्डों की सख्ती, अंदर जाने पर रोक
जब इस गुप्त संचालन की जानकारी लेने की कोशिश की गई तो फैक्ट्री के सुरक्षा गार्डों ने किसी को भी अंदर प्रवेश नहीं करने दिया। इससे साफ है कि अंदर चल रही गतिविधियों को छिपाने की पूरी कोशिश की जा रही है। पहले की कार्रवाई के दौरान फैक्टरी की बिजली काट दी गई थी। इसके बावजूद उत्पादन जारी रहना बेहद गंभीर मामला है। यह सवाल उठ रहा है कि आखिर बिना बिजली के फैक्टरी कैसे चल रही है और क्या इसमें किसी स्तर पर मिलीभगत है।
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ईडी की कार्रवाई में बड़ा खुलासा
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने फैक्ट्री मालिक किशन मोदी को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया था। जांच में खुलासा हुआ था कि कंपनी दूध के प्राकृतिक फैट की जगह हानिकारक पाम ऑयल का इस्तेमाल कर रही थी, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। इतना ही नहीं, कंपनी ने अपने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने के लिए फर्जी लैब टेस्ट रिपोर्ट तैयार की थीं। इस धोखाधड़ी के जरिए कंपनी ने करोड़ों रुपये की कमाई की। ईडी ने 20.59 करोड़ रुपये को अपराध की आय घोषित किया है।
इस मामले ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर फैक्टरी को सील करने और बिजली काटने की कार्रवाई की गई, वहीं दूसरी ओर उसी फैक्टरी का खुलेआम संचालन यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं सिस्टम में बड़ी खामी या मिलीभगत मौजूद है। मिलावटी उत्पादों का उत्पादन और उनकी खुलेआम बिक्री कानून व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा दोनों के लिए खतरे की घंटी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है।
प्रशासन अनजान, जांच का भरोसा
इस पूरे मामले पर सीहोर की फूड इंस्पेक्टर सारिका गुप्ता ने कहा कि पिछली कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री बंद पाई गई थी। उन्होंने माना कि दोबारा संचालन की कोई आधिकारिक जानकारी विभाग के पास नहीं है। हालांकि उन्होंने टीम भेजकर जांच और सैंपलिंग कराने का आश्वासन दिया है।