भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने केंद्र के वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और राजस्थान सरकार में मंत्री संजय शर्मा पर सरिस्का और अन्य पर्यटन स्थलों को योजनाबद्ध ढंग से बर्बाद करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे मामले में खनन माफियाओं, ठेकेदारों और होटल कारोबारियों के गठजोड़ से 100 से 500 करोड़ रुपए तक का घोटाला हुआ है।
आहूजा ने कहा कि जिले के बंटवारे के बाद लगभग सभी औद्योगिक क्षेत्र अलग हो चुके हैं। अब अलवर जिले में केवल पर्यटन उद्योग ही मुख्य आय का स्रोत बचा है, जिसमें सरिस्का, सिलीसेढ़, नारायणी माता और भानगढ़ जैसे पर्यटन स्थल शामिल हैं लेकिन अब इन स्थानों को भी योजनाबद्ध तरीके से नष्ट किया जा रहा है।
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आहूजा ने आरोप लगाया कि सरिस्का में जहां पहले 9 बाघ विचरण करते थे, उस असली जंगल क्षेत्र को कम कर दिया गया है और उसकी जगह आबादी वाले क्षेत्र को जंगल क्षेत्र में जोड़ दिया गया है। इससे बाघों और अन्य वन्य जीवों की जान को खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद होटल माफियाओं और खनन गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि अवैध गतिविधियों को संरक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि हाल ही में जिला परिषद की बैठक में भी सरिस्का की बर्बादी का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था, जिसमें 54 में से 49 सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकलकर नारेबाजी की थी। पूर्व विधायक ने राज्य और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार की मिलीभगत से खनन माफिया पनप रहे हैं। पुलिस और प्रशासन की सांठगांठ से खुलेआम अवैध खनन हो रहा है। उन्होंने गौ तस्करी और गोहत्या पर भी चिंता जताई और कहा कि शहर से सरेआम गायों को उठाकर ले जाया जा रहा है और कोई रोकने वाला नहीं है। उनके पास पूरे मामले से जुड़े पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं और वे जल्द ही मीडिया के समक्ष इन सबूतों को सार्वजनिक करेंगे। आहूजा ने कहा कि सरिस्का और सिलीसेढ़ जैसे पर्यटन स्थल इस जिले की अंतिम सांसें हैं, जिन्हें बचाना अब जरूरी हो गया है। इस तरफ सरकार की चुप्पी खतरनाक संकेत दे रही है।