राजस्थान विधानसभा में आयोजित 'युवा संसद' के अवसर पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने युवाओं को देश की ताकत बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया की बड़ी-बड़ी आईटी कंपनियों को भारतीय युवा चला रहे हैं, जो हमारे लिए गर्व की बात है। देश के युवाओं को सशक्त बनाने में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की अग्रणी भूमिका रही। उन्होंने 18 वर्ष के युवाओं को मतदान का अधिकार देकर देश के विकास की मजबूत नींव रखी और कंप्यूटर व सूचना क्रांति को बढ़ावा दिया। इसी कारण हमारे देश के युवाओं की प्रतिभा पूरी दुनिया में सराही जा रही है।
जूली ने बताया कि नेहरू युवा केंद्र की स्थापना 1972 में हुई, जिसके माध्यम से देश के विभिन्न प्रांतों के युवाओं को वैचारिक आदान-प्रदान का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन कई स्थानों पर होते रहते हैं, लेकिन विधानसभा में आने का अनुभव अलग ही होता है। इस सदन में पहुंचने के लिए लोगों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है और कई राजनीतिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
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राजनीति में युवाओं की भागीदारी आवश्यक
जूली ने कहा कि आज भी माता-पिता अपने बच्चों को राजनीति से दूर रखना पसंद करते हैं, लेकिन यदि युवा राजनीति में भाग नहीं लेंगे, तो राजनीति में नए विचार कैसे आएंगे? उन्होंने कहा कि जब भंवर जितेंद्र सिंह केंद्रीय युवा एवं खेल मामलों के मंत्री थे, तब भारत से चीन एक युवा प्रतिनिधिमंडल भेजा गया था। उस यात्रा में मुझे भी उनके साथ जाने का अवसर मिला। इस दौरान मैंने देखा कि भारत और चीन के युवाओं की सोच में क्या अंतर है।
युवाओं को सही दिशा देना आवश्यक
जूली ने कहा कि दुनिया में सबसे ज्यादा युवा आबादी भारत में है और जरूरत है कि उन्हें सही दिशा दी जाए। उन्होंने कहा कि हर बच्चे का अलग आईक्यू स्तर और रुचि होती है। यदि उसे उसकी प्रतिभा के अनुसार अवसर मिले, तो वह बहुत कुछ कर सकता है। लेकिन अभिभावक अक्सर अपने विचारों को उन पर थोप देते हैं। उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं कि सभी युवा सरकारी नौकरी करें। अभिभावक चाहते हैं कि उनका बच्चा डॉक्टर, आईएएस या इंजीनियर बने, लेकिन दूसरे क्षेत्रों में भी अपार संभावनाएं हैं। बच्चों से बढ़ती अपेक्षाएं उनके मानसिक दबाव का कारण बनती हैं।
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युवाओं में बढ़ती निराशा और आत्महत्या के बढ़ते मामले
जूली ने कहा कि युवा देश की ताकत हैं और वे एक परमाणु मिसाइल की तरह हैं। यदि उन्हें सही दिशा मिले, तो देश आगे बढ़ेगा, लेकिन यदि वे भटक गए, तो देश को नुकसान भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि दर्द तब होता है, जब युवा अपने सपनों का गला घोंटकर आत्महत्या कर लेते हैं। हाल ही में विधानसभा में कोचिंग संस्थानों और युवाओं के अवसाद पर बहस हुई, जिसमें यह चिंतन किया गया कि युवाओं में बढ़ती निराशा और नशे की प्रवृत्ति आत्महत्याओं का एक प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि इस समस्या को सामूहिक रूप से हल करने की जरूरत है, ताकि युवाओं को आत्महत्या के विचार से बचाया जा सके और उन्हें नई ताकत मिल सके।
राजनीतिक विचारधाराओं का सही मूल्यांकन जरूरी
जूली ने कहा कि देश में कई विचारधाराएं पनप रही हैं। राजनीतिक दल अपनी-अपनी बात रखते हैं- कांग्रेस अपनी विचारधारा प्रस्तुत करेगी, भाजपा अपनी और अन्य दल अपनी बातें कहेंगे। लेकिन, युवाओं को हर विचार का गहराई से अध्ययन करना चाहिए और फैसले लेने से पहले उसका विश्लेषण करना चाहिए।
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युवाओं को बढ़ाना चाहिए चिंतन और अध्ययन
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष का पद मिलने पर लोग सोचते हैं कि यह कोई बुजुर्ग व्यक्ति होगा, लेकिन मुझे यह अवसर मिला और मैं हमेशा युवाओं की बात करता हूं। उन्होंने युवाओं से अपनी सोच, चिंतन और अध्ययन को बढ़ाने का आह्वान किया। जूली ने कहा कि युवा अपने विचारों को मजबूत करें, देश और प्रदेश के विकास में योगदान दें और भारत को और अधिक सशक्त बनाएं।