बारां जिला एक बार फिर वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों के लिए चर्चा का केंद्र बन गया है। भंवरगढ़ के पास हाईवे पर दो दर्जन से अधिक गिद्धों का झुंड नजर आया है। इससे पहले बारां जिले के गणेशपुरा नाका और कपिलधारा क्षेत्र के आसपास के जंगलों में भी दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजाति के गिद्धों का एक बड़ा झुंड देखा गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि एक ही स्थान पर विभिन्न प्रजातियों के गिद्धों का इस तरह साथ दिखना पारिस्थितिकी तंत्र में हो रहे सकारात्मक सुधार का एक बड़ा संकेत है। पिछले कुछ दशकों में गिद्धों की संख्या में आई भारी गिरावट के बाद, बारां के जंगलों में उनकी यह वापसी किसी चमत्कार से कम नहीं मानी जा रही है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इन क्षेत्रों में गिद्धों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि यहाँ का वातावरण उनके पनपने और प्रजनन के लिए अनुकूल हो गया है। गिद्धों की उपस्थिति पर्यावरण के स्वास्थ्य का प्रमाण है। 'प्रकृति के सफाईकर्मी' कहे जाने वाले इन पक्षियों का लौटना यह बताता है कि खाद्य श्रृंखला फिर से संतुलित हो रही है। सबसे खास बात यह है कि यहाँ केवल एक नहीं, बल्कि गिद्धों की कई प्रजातियां एक साथ देखी गई हैं। इनमें से कुछ प्रजातियां 'अति संकटग्रस्त' श्रेणी में आती हैं। इनका एक साथ दिखना इस क्षेत्र की जैव-विविधता की मजबूती को दर्शाता है।
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गिद्ध मृत जानवरों के अवशेषों को खाकर जंगलों और ग्रामीण इलाकों में गंदगी और बीमारियों के फैलने से रोकते हैं। इनके पेट में मौजूद शक्तिशाली एसिड, एंथ्रेक्स और रेबीज जैसे खतरनाक बैक्टीरिया को खत्म कर देते हैं। गिद्धों की कमी से आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष का खतरा बढ़ता है। शाहाबाद के जंगलों में कपिलधारा और गणेशपुरा के चट्टानी इलाके गिद्धों के लिए सुरक्षित बसेरा और प्रजनन स्थल प्रदान कर रहे हैं।