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VIDEO : पतलोट के महाविद्यालय के भवन निर्माण की होगी जांच, बैठक में मंडी के एमडी के नहीं पहुंचने से सांसद नाराज
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VIDEO : पतलोट के महाविद्यालय के भवन निर्माण की होगी जांच, बैठक में मंडी के एमडी के नहीं पहुंचने से सांसद नाराज
सांसद अजय भट्ट ने ओखलकांडा के पतलोट में राजकीय महाविद्यालय के भवन निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर असंतोष जताते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने दिशा की बैठक में मंडी परिषद के एमडी के मौजूद न रहने को भी गंभीरता से लिया। सीडीओ को इस संबंध में मुख्य सचिव को पत्र भेजने के निर्देश दिए।
भट्ट शुक्रवार को यहां काठगोदाम स्थित सर्किट हाउस में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि मंडी परिषद ने पतलोट में जिस महाविद्यालय का निर्माण किया है, उसमें कई जगह छत से पानी टपकने लगा है। भट्ट ने हल्द्वानी शहर में गैस पाइप लाइन बिछाने को लेकर एचपीसीएल की प्रगति पर भी नाराजगी जताई। कहा कि गैस पाइप लाइन बिछाने का काम जल्द और गुणवत्ता के साथ हो। वह स्वयं इस कार्य का स्थलीय निरीक्षण करेंगे।
सांसद भट्ट ने जिले में जल जीवन मिशन के कार्यों पर भी नाराजगी जताई। कहा सरकारी धनराशि के दुरुपयोग का मामला मिला तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि गौलापार में नकैल पुल के सड़क मार्ग पर बिजली के पोलों की शिफ्टिंग न होने से शेष कार्य अटके हुए हैं। ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता को उन्होंने शीघ्र पोल शिफ्ट कराने के निर्देश दिए। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ने बताया कि गौलापुल के पास एप्रोच रोड वर्षाकाल में बह गई थी। पुनर्निमाण के लिए 24 करोड़ का एस्टीमेट शासन को भेजा गया है।
इन योजनाओं की भी हुई समीक्षा
सांसद ने केंद्र सरकार द्वारा संचालित दीनदयाल उपाध्याय योजना, प्रधानमंत्री आवास, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, समग्र शिक्षा, मिड-डे-मील, प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, कौशल विकास, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा, दूरसंचार, रेलवे, खनन आदि की भी समीक्षा की।
डीएम वंदना सिंह ने कहा कि सभी विभागों को आपदा मद की धनराशि धनराशि स्वीकृत हो चुकी है। विभागों ने काम भी शुरू करा दिए हैं। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन सडकों एवं योजनाओं के टेंडर पूर्ण हो चुके है, उन पर तुरंत कार्य शुरू हों। कहा कि जल जीवन मिशन की 150 योजनाओं की दोबारा समीक्षा कर संशोधित एस्टीमेट शासन को भेजा गया है।
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