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India Russian Oil Purchasing: India continues to buy oil from Russia, Russian minister responds to Trump!
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India Russian Oil Purchasing: भारत का रूस से तेल खरीद जारी, रूसी मंत्री ने ट्रंप को दिया जवाब!
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Thu, 19 Feb 2026 04:55 AM IST
भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने को लेकर चल रही अटकलों के बीच रूस ने साफ कर दिया है कि नई दिल्ली के रुख में कोई बदलाव नहीं हुआ है। रूस के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि भारत अब भी रूसी हाइड्रोकार्बन की खरीद जारी रखे हुए है और यह कदम दोनों देशों के लिए लाभकारी है। साथ ही इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनी रहती है।
रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने अपने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट शब्दों में कहा कि रूस के पास ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि भारत ने अपनी ऊर्जा नीति में बदलाव किया है। उन्होंने कहा, “रूसी हाइड्रोकार्बन की खरीद दोनों देशों के हित में है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को स्थिर बनाए रखने में मदद करती है।”
जखारोवा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो के हालिया बयानों को भी खारिज कर दिया। पिछले सप्ताह रुबियो ने दावा किया था कि भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने का वादा किया है। हालांकि भारत सरकार की ओर से इस दावे की न तो पुष्टि की गई है और न ही औपचारिक खंडन।
रूसी प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका स्वतंत्र देशों को अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार निर्णय लेने से रोकने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक, टैरिफ, प्रतिबंध और अन्य आर्थिक दबावों के जरिए अमेरिका अपने रणनीतिक उद्देश्यों को साधना चाहता है। रूस का यह भी आरोप रहा है कि अमेरिका भारत सहित कई देशों पर रूसी ऊर्जा से दूरी बनाने का दबाव डालता रहा है।
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई फोन वार्ता के बाद अमेरिका ने भारत पर लगाए गए कुछ टैरिफ में राहत की घोषणा की। जानकारी के मुताबिक, भारत पर अमेरिकी टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया। अगस्त 2025 में भारत के रूसी तेल आयात पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क भी हटाया गया।
इस फैसले के बाद ऊर्जा व्यापार को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई थीं। कुछ विश्लेषकों का मानना था कि भारत संभवतः अमेरिकी दबाव के चलते रूसी तेल खरीद में कमी कर सकता है, लेकिन रूस के ताजा बयान ने इन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की है।
मारिया जखारोवा ने अपने बयान में यूरोपीय देशों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि कुछ यूरोपीय देश शांति समाधान के प्रति गंभीर नहीं हैं और ऊर्जा मुद्दे को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।
रूस और भारत के बीच ऊर्जा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में काफी मजबूत हुआ है। पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद भारत ने रियायती दरों पर रूसी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई थी, जिससे उसे ऊर्जा लागत नियंत्रित रखने में मदद मिली। वहीं रूस के लिए भी एशियाई बाजार अहम साबित हुआ।
मौजूदा बयान से यह संकेत मिलता है कि भारत-रूस ऊर्जा साझेदारी फिलहाल स्थिर बनी हुई है। हालांकि वैश्विक राजनीति और आर्थिक दबावों के बीच आने वाले समय में यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का अहम केंद्र बना रह सकता है।
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