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India to Enter Pax Silica: Will India enter Pax Silica?
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India to Enter Pax Silica: पैक्स सिलिका में होगी भारत की एंट्री?
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Fri, 30 Jan 2026 08:54 PM IST
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अमेरिका अब अपनी तकनीकी सप्लाई चेन को लेकर एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाने जा रहा है। चीन पर बढ़ती निर्भरता से छुटकारा पाने के लिए अमेरिका ने एक बार फिर भारत की ओर रुख किया है। अमेरिकी विदेश उप सचिव (आर्थिक मामलों के) जैकब हेलबर्ग ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि भारत फरवरी 2026 में अमेरिका-नेतृत्व वाले रणनीतिक गठबंधन ‘पैक्स सिलिका’ में शामिल होगा। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत का इस हाई-टेक क्लब में प्रवेश केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि वैश्विक तकनीकी शक्ति संतुलन में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
क्या है पैक्स सिलिका?
पैक्स सिलिका एक रणनीतिक आर्थिक और तकनीकी गठबंधन है, जिसे दिसंबर 2025 में अमेरिका ने लॉन्च किया था। इसका मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की सप्लाई चेन को “सुरक्षित, भरोसेमंद और चीन-निर्भरता से मुक्त” बनाना है। अमेरिका का साफ संदेश है कि भविष्य की क्रिटिकल टेक्नोलॉजी केवल उन देशों के हाथ में हो, जिन पर राजनीतिक और रणनीतिक रूप से भरोसा किया जा सके।
इस गठबंधन में पहले से अमेरिका के साथ जापान, दक्षिण कोरिया, इजरायल, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और ब्रिटेन जैसे देश शामिल हैं। हाल ही में कतर और संयुक्त अरब अमीरात भी इस समूह में जुड़े हैं। अब भारत की एंट्री से इस क्लब की रणनीतिक ताकत और बढ़ गई है।
क्यों भारत अमेरिका के लिए अहम?
जैकब हेलबर्ग के मुताबिक, शुरुआत में पैक्स सिलिका का फोकस जापान और दक्षिण कोरिया जैसे मैन्युफैक्चरिंग हब पर था। लेकिन अब अमेरिका समझ चुका है कि केवल फैक्ट्री हब से काम नहीं चलेगा। सप्लाई चेन को वास्तव में सुरक्षित और लचीला बनाने के लिए भारत जैसे बड़े और भरोसेमंद साझेदार की जरूरत है।
भारत के पास तीन बड़ी ताकतें हैं-
1. खनिज और कच्चा माल,
2. सॉफ्टवेयर और एआई इंजीनियरिंग में विशाल प्रतिभा,
3. तेजी से बढ़ता मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम।
अमेरिका का मानना है कि भारत हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग में चीन का एक मजबूत विकल्प बन सकता है, खासकर सेमीकंडक्टर और एआई-इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में।
सप्लाई चेन अब बनेगी ‘आर्थिक हथियार’ से सुरक्षित
हेलबर्ग ने साफ चेतावनी दी कि विरोधी देश टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन को राजनीतिक दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। लिथोग्राफी मशीनों से लेकर चिप फैब्रिकेशन तक, हर कड़ी पर कंट्रोल आज भू-राजनीति का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में पैक्स सिलिका जैसे गठबंधन का मकसद सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा (Economic Security) को मजबूत करना है।
इस गठबंधन के तहत फंक्शनल वर्किंग ग्रुप बनाए जाएंगे। हर देश अपनी विशेषज्ञता साझा करेगा-
• नीदरलैंड: लिथोग्राफी तकनीक
• ताइवान: चिप फैब्रिकेशन
• भारत: सॉफ्टवेयर, एआई और इंजीनियरिंग टैलेंट
दिलचस्प बात यह है कि 2025 में जब पैक्स सिलिका की पहली बैठक हुई थी, तब भारत को इसमें शामिल नहीं किया गया था। इस फैसले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल भी उठे थे। अब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की हालिया नई दिल्ली यात्रा के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। गोर ने साफ कहा कि सुरक्षित और लचीली सिलिकॉन सप्लाई चेन के लिए भारत-अमेरिका साझेदारी अब अनिवार्य हो चुकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पैक्स सिलिका में भारत की एंट्री से देश के घरेलू सेमीकंडक्टर उद्योग को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। गठबंधन के तहत निर्यात नियंत्रण, निवेश की जांच और रिसर्च के लिए सब्सिडी जैसे सख्त लेकिन रणनीतिक कदम उठाए जाएंगे। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अत्याधुनिक तकनीक विरोधी देशों के हाथ न लगे।
भारत अब सिर्फ टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता नहीं, बल्कि भविष्य की वैश्विक तकनीक की दिशा तय करने वाले देशों में शामिल होने जा रहा है। 21वीं सदी की एआई और चिप रेस में भारत की यह एंट्री न केवल आर्थिक, बल्कि रणनीतिक रूप से भी गेमचेंजर साबित हो सकती है।
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