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Iran-US Tension: Will Trump attack Iran through Pakistan?
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Iran-US Tension: पाकिस्तान के रास्ते ईरान पर हमला करेंगे ट्रंप?
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Wed, 14 Jan 2026 09:45 PM IST
क्या ईरान में भड़क रहे विरोध-प्रदर्शनों के पीछे कोई बड़ा खेल चल रहा है? क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सचमुच ईरान में सत्ता परिवर्तन की तैयारी कर चुके हैं? अगर अमेरिका सैन्य कार्रवाई करता है तो क्या पाकिस्तान उसका रास्ता बनेगा? क्या पाकिस्तान को अपने हवाई अड्डे और सैन्य ठिकाने देने का दबाव डाला जाएगा? और अगर ऐसा हुआ तो क्या पाकिस्तान के भीतर शिया-सुन्नी तनाव भड़क सकता है? क्या पश्चिम एशिया एक और बड़े युद्ध की दहलीज पर खड़ा है? इन तमाम सवालों के जवाब जानेंगे, इस रिपोर्ट में…
ईरान में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को लेकर अमेरिका के रुख ने पश्चिम एशिया की राजनीति में एक बार फिर भूचाल ला दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद, जिसमें उन्होंने ईरान के प्रदर्शनकारियों से संस्थानों पर कब्जा करने और उन्हें मदद पहुंचने की बात कही, हालात और संवेदनशील हो गए हैं। अब अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या अमेरिका ईरान में सत्ता परिवर्तन या सैन्य कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी आशंका ने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ता दिख रहा है। पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को डर है कि अगर दोनों देशों के बीच जंग छिड़ती है, तो इस्लामाबाद एक नए संकट में फंस सकता है। इसी को लेकर पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने एक आपात उच्चस्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें देश की सुरक्षा स्थिति की गंभीर समीक्षा की गई।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हाई लेवल मीटिंग में ISI प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जनरल असीम मलिक, साउदर्न कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राहत नसीम, मिलिट्री इंटेलिजेंस प्रमुख, चीफ ऑफ जनरल स्टाफ समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में सबसे बड़ी चिंता पाकिस्तान–ईरान सीमा को लेकर जताई गई। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान पहले से ही अफगानिस्तान के साथ डूरंड लाइन पर तनाव झेल रहा है और अगर ईरान सीमा पर हालात बिगड़े, तो देश दो मोर्चों पर दबाव में आ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में इस संभावना पर भी गंभीर मंथन हुआ कि अगर अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो वह पाकिस्तान से हवाई क्षेत्र, लॉजिस्टिक सपोर्ट या सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की मांग कर सकता है। पाकिस्तान के लिए यह फैसला बेहद मुश्किल होगा। अमेरिका का साथ देने से जहां उसे अंतरराष्ट्रीय दबाव से राहत मिल सकती है, वहीं देश के भीतर राजनीतिक उथल-पुथल और क्षेत्रीय असंतोष बढ़ने का खतरा है।
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों ने सरकार को चेताया है कि ईरान-अमेरिका संघर्ष में अगर पाकिस्तान खुलकर अमेरिका के पक्ष में जाता है, तो उसे गंभीर आंतरिक विरोध का सामना करना पड़ सकता है। पाकिस्तान की लगभग 30 प्रतिशत आबादी शिया है, जो ईरान के प्रति सहानुभूति रखती है। ऐसे में ईरान पर अमेरिकी हमला या वहां सत्ता परिवर्तन की कोशिश, पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर शिया विरोध-प्रदर्शनों को जन्म दे सकती है। इसके साथ ही ईरान से शरणार्थियों के संभावित पलायन से सीमा पर हालात और बिगड़ सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, जनरल आसिम मुनीर ने सभी वरिष्ठ कमांडरों को हाई अलर्ट पर रहने और सीमाओं पर हालात पर कड़ी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। ISI प्रमुख को ईरान, तुर्की, कतर, यूएई, सऊदी अरब और अमेरिका के साथ राजनयिक और सुरक्षा स्तर की बातचीत तेज करने को कहा गया है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटा जा सके।
खुफिया आकलन में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर और तुर्की पहले ही अमेरिका को यह संदेश दे चुके हैं कि ईरान पर हमला पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर सकता है। इससे तेल आपूर्ति, समुद्री मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा। हालांकि, पाक अधिकारियों को आशंका है कि अगर ट्रंप प्रशासन आक्रामक रुख अपनाता है और पाकिस्तान पर सहयोग का दबाव डालता है, तो इस्लामाबाद को रणनीतिक और राजनीतिक दोनों तरह का नुकसान झेलना पड़ सकता है।
बाहरी दबावों के बीच पाकिस्तान की सेना ने घरेलू मोर्चे पर भी तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, सेना मुख्यालय में नेशनल पैग़ाम-ए-अमन कमेटी के तहत धार्मिक विद्वानों का एक प्रतिनिधिमंडल बुलाया गया है। उनसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर एकजुट संदेश देने और सांप्रदायिक तनाव को रोकने पर जोर दिया गया है। बैठक में यह भी कहा गया कि भारत और सीमा पार सक्रिय आतंकी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे कथित “मनोवैज्ञानिक युद्ध” का जवाब एक साझा राष्ट्रीय नैरेटिव से दिया जाना चाहिए।
कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान टकराव की आशंका ने पाकिस्तान को एक बार फिर मुश्किल भू-राजनीतिक दुविधा में ला खड़ा किया है, जहां हर कदम उसे नए खतरे की ओर ले जा सकता है।
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