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ग्रीनलैंड में ऐसा कौन सा खजाना है जिसके पीछे पड़े हैं ट्रंप? Denmark-US Greenland Dispute
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Fri, 09 Jan 2026 09:58 PM IST
क्या दुनिया की सीमाएं अब ताकत के दम पर बदली जाएंगी? क्या ग्रीनलैंड सिर्फ बर्फ से ढका टापू है या 21वीं सदी की सबसे बड़ी जियो-पॉलिटिकल जंग का केंद्र? वेनेजुएला में राष्ट्रपति को घर से उठाने के बाद क्या अब ट्रंप की नजर उत्तरी ध्रुव पर है? क्या अमेरिका वाकई एक संप्रभु क्षेत्र को सैन्य ताकत से अपने में शामिल कर सकता है? और अगर ऐसा हुआ, तो क्या यह नाटो के टूटने और नई विश्व व्यवस्था की शुरुआत होगी?
आज के इस वीडियो में हम बताएंगे- ट्रंप के ग्रीनलैंड प्लान के पीछे का असली रणनीतिक गणित, वेनेजुएला ऑपरेशन से क्या संदेश गया पूरी दुनिया को, और क्यों यूरोप से लेकर कनाडा तक बढ़ गया है डर और तनाव।
दुनिया ने एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उसी अंदाज़ में देखा है, जिसके लिए वे जाने जाते हैं चौंकाने वाला, आक्रामक और वैश्विक व्यवस्था को हिला देने वाला। कुछ साल पहले तक ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की बात को एक अजीब रियल एस्टेट डील या मज़ाक माना जाता था, लेकिन अब ट्रंप ने इसे अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा की “अनिवार्य आवश्यकता” घोषित कर दिया है। वेनेजुएला में हुए हालिया अमेरिकी सैन्य ऑपरेशन के बाद, ट्रंप की यह घोषणा अब केवल बयानबाज़ी नहीं, बल्कि संभावित कार्रवाई का संकेत मानी जा रही है।
3 जनवरी 2026 को अमेरिका ने एक ऐसा कदम उठाया जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया। अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने वेनेजुएला की राजधानी काराकस में छापेमारी कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को उनके घर से गिरफ्तार किया और सीधे न्यूयॉर्क ले आए। इस ऑपरेशन को अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता की खुली चुनौती के तौर पर देखा गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना ने ट्रंप प्रशासन का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा दिया है। अब संदेश साफ है अमेरिका अपने हितों के लिए सीमाओं और पुराने नियमों को मानने को तैयार नहीं।
इसी पृष्ठभूमि में व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर का बयान आया, जिसमें उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए सैन्य विकल्प से इनकार नहीं किया जा सकता। अंतरराष्ट्रीय कानूनों को “काग़ज़ी नियम” बताते हुए मिलर ने साफ कहा कि शक्ति आधारित दुनिया में अमेरिका के हित सर्वोपरि हैं। ट्रंप ने लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री को ग्रीनलैंड के लिए विशेष दूत नियुक्त कर अपने इरादे और स्पष्ट कर दिए।
ग्रीनलैंड: अमेरिका के लिए क्यों है इतना अहम?
ग्रीनलैंड भले ही राजनीतिक रूप से डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र हो, लेकिन रणनीतिक रूप से यह अमेरिका के लिए बेहद अहम है। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं-
1. मिसाइल डिफेंस और निगरानी
आर्कटिक में स्थित ग्रीनलैंड अमेरिका, रूस और यूरोप के बीच एक रणनीतिक बफर ज़ोन है। यहां मौजूद थुले एयर बेस पहले से ही अमेरिकी मिसाइल चेतावनी प्रणाली का अहम हिस्सा है। अगर अमेरिका को ग्रीनलैंड पर पूर्ण नियंत्रण मिल जाता है, तो वह आर्कटिक में अपनी सैन्य निगरानी और मिसाइल डिफेंस को लगभग अभेद्य बना सकता है।
2. रूस और चीन की बढ़ती मौजूदगी
रूस आर्कटिक क्षेत्र में लगातार अपनी सैन्य चौकियां मजबूत कर रहा है, जबकि चीन खुद को “नियर आर्कटिक स्टेट” बताकर यहां निवेश और प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल कर इस पूरे क्षेत्र में रूस और चीन की रणनीतिक घेराबंदी करना चाहता है।
3. पिघलती बर्फ और नए समुद्री रास्ते
ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण आर्कटिक की बर्फ तेजी से पिघल रही है। इससे एशिया और यूरोप के बीच नए और छोटे शिपिंग रूट्स खुलने की संभावना है। इन मार्गों पर नियंत्रण भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डालने जैसा होगा।
4. खनिजों का विशाल भंडार
ग्रीनलैंड की बर्फ के नीचे तेल, गैस और दुर्लभ रेयर अर्थ एलिमेंट्स के बड़े भंडार मौजूद हैं। इन खनिजों पर फिलहाल चीन का लगभग 90 प्रतिशत नियंत्रण है, जिनका इस्तेमाल स्मार्टफोन से लेकर फाइटर जेट तक में होता है। अमेरिका इस निर्भरता को खत्म करना चाहता है।
राजनीतिक विश्लेषक ट्रंप की इस रणनीति को 21वीं सदी का एम्पायर बिल्डिंग प्रोजेक्ट बता रहे हैं। यह अमेरिका के उन ऐतिहासिक विस्तारों की याद दिलाता है, जब थॉमस जेफरसन ने फ्रांस से लुइसियाना खरीदा था या विलियम मैकिनले ने हवाई को अमेरिका में शामिल किया था। फर्क बस इतना है कि ट्रंप का रास्ता कहीं ज़्यादा टकराव भरा और आक्रामक दिखता है पहले वेनेजुएला के तेल भंडारों पर प्रभाव, अब उत्तरी ध्रुव तक अमेरिकी झंडा गाड़ने की तैयारी।
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट्टे फ्रेडरिकसेन ने ट्रंप के दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है और वह उसके लोगों का है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने बल प्रयोग किया, तो यह नाटो के अंत की शुरुआत हो सकती है।
फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और इटली समेत कई यूरोपीय देशों ने संयुक्त बयान जारी कर इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया है। कनाडा ने भी एक उच्च-स्तरीय टीम तैनात कर दी है, क्योंकि ग्रीनलैंड का भविष्य सीधे तौर पर उसके आर्कटिक दावों को प्रभावित करेगा।
क्या ग्रीनलैंड पर कब्जा संभव है?
हकीकत यह है कि ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करना बेहद जटिल प्रक्रिया है। इसके लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी, अरबों-खरबों डॉलर का बजट और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारी कूटनीतिक संघर्ष झेलना पड़ेगा। डेनमार्क और ग्रीनलैंड के स्थानीय लोगों की सहमति के बिना यह कदम जबरन कब्जे के रूप में देखा जाएगा।
रिटायर्ड एडमिरल जेम्स स्टाव्रिडिस और सीनेटर क्रिस मर्फी जैसे विशेषज्ञ मानते हैं कि वेनेजुएला ऑपरेशन की सफलता ने ट्रंप को इतना साहसी बना दिया है कि वे अब भूगोल बदलने से भी पीछे नहीं हटेंगे। यह अमेरिकी विदेश नीति में एक युगांतकारी बदलाव और शीत युद्ध के बाद की वैश्विक व्यवस्था के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।
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