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US troop withdrawal from Middle East: Trump calls back his army from the Middle East after Iran's threat!
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US troop Withdrawal From Middle East: ईरान की धमकी के बाद ट्रंप ने मिडिल ईस्ट से बुलाई अपनी सेना!
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Wed, 14 Jan 2026 09:59 PM IST
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मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात के बीच अमेरिका ने बड़ा एहतियाती कदम उठाया है। ईरान से बढ़ते खतरे और क्षेत्रीय तनाव के बीच अमेरिका अपने कुछ अहम सैन्य ठिकानों से सैनिकों और कर्मियों को हटाने लगा है। बुधवार को सामने आई कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फैसला संभावित हमलों को देखते हुए एहतियातन लिया गया है।
अमेरिकी समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस से बातचीत में एक अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की कि कतर स्थित एक प्रमुख सैन्य अड्डे से जुड़े कई अमेरिकी कर्मियों को बुधवार शाम तक वहां से निकलने की सलाह दी गई है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब ईरान ने खुले तौर पर चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उस पर हमला किया, तो वह पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएगा।
AFP की एक रिपोर्ट के अनुसार, कतर के अल-उदीद एयर बेस (Al Udeid Air Base) में तैनात अमेरिकी कर्मियों को वहां से रवाना होने को कहा गया है। गौरतलब है कि अल-उदीद एयर बेस मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है और यहां हजारों अमेरिकी सैनिक और सैन्य संसाधन तैनात रहते हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने इस कदम को पूरी तरह “एहतियाती उपाय” बताया है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि यह निकासी अनिवार्य है या स्वैच्छिक।
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कतर सरकार ने कहा है कि यह फैसला मौजूदा क्षेत्रीय तनावों को देखते हुए लिया गया है। कतर के मीडिया कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि देश अपने नागरिकों और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। बयान में कहा गया कि महत्वपूर्ण ढांचागत और सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
दरअसल, इससे कुछ घंटे पहले ही ईरान ने मध्य पूर्व के उन देशों को सख्त चेतावनी दी थी, जहां अमेरिकी सेना मौजूद है। ईरान ने साफ कहा था कि अगर वॉशिंगटन ने उस पर सैन्य हमला किया, तो वह अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा, चाहे वे किसी भी देश में क्यों न हों। ईरान का यह बयान सीधे तौर पर कतर, सऊदी अरब, यूएई और अन्य खाड़ी देशों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
तनाव को और हवा तब मिली, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में जारी विरोध-प्रदर्शनों को लेकर बयान दिया। ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों से “प्रदर्शन जारी रखने” और “संस्थानों पर कब्जा करने” की अपील की। इस बयान के बाद यह अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिका ईरान के अंदरूनी हालात में दखल दे सकता है या किसी बड़े कदम की तैयारी कर रहा है।
ईरान इस वक्त अपने सबसे खराब आंतरिक संकटों में से एक का सामना कर रहा है। देश में चल रहे व्यापक विरोध-प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 2,571 लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा हाल के दशकों में किसी भी आंदोलन में सबसे अधिक बताया जा रहा है। ऐसे में अमेरिका की बयानबाजी और सैन्य गतिविधियों ने हालात को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी सैनिकों की आंशिक वापसी इस बात का संकेत है कि वॉशिंगटन किसी भी अप्रत्याशित हमले से बचने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, यह भी साफ है कि अगर हालात और बिगड़े, तो पूरा मध्य पूर्व एक बड़े टकराव की चपेट में आ सकता है।
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