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Iran-Israel Conflict: This is how Israel killed Ali Larijani
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Iran-Israel Conflict: Ali Larijani को इस्राइल ने ऐसे मारा
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Wed, 18 Mar 2026 10:10 PM IST
क्या 1600 किलोमीटर दूर बैठा दुश्मन आपकी हर चाल पर नजर रख सकता है? क्या लगातार ठिकाने बदलने के बाद भी कोई नेता सुरक्षित नहीं रह सकता?
और आखिर क्या हैं इजरायल की वो “स्पेशल कैपेबिलिटीज” जिनके दम पर सबसे सुरक्षित समझे जाने वाले टारगेट भी ढेर हो जाते हैं?
ईरान में सत्ता के बड़े बदलाव के बीच एक ऐसा ऑपरेशन सामने आया है, जिसने दुनिया की खुफिया एजेंसियों को चौंका दिया है। खामेनेई के बाद कौन बना नंबर-1 टारगेट? कैसे 15 दिनों तक चला बिल्ली-चूहे का खेल? और आखिर किस तरह इजरायल ने इस मिशन को अंजाम तक पहुंचाया?
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद सत्ता संतुलन में बदलाव के बीच अब एक और बड़ा दावा सामने आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के वरिष्ठ नेता अली लारिजानी को इजरायल ने अपने एक गुप्त ऑपरेशन में मार गिराया है। इस ऑपरेशन में इजरायल की तथाकथित “स्पेशल कैपेबिलिटीज” की अहम भूमिका बताई जा रही है।
इजरायली मीडिया, खासकर The Jerusalem Post की रिपोर्ट के अनुसार, लारिजानी पिछले कई दिनों से इजरायल के निशाने पर थे। खामेनेई की मौत के बाद वे संभावित उत्तराधिकारियों में माने जा रहे थे, जिससे उनकी सुरक्षा और खतरे दोनों बढ़ गए थे। यही कारण था कि उन्होंने अपनी गतिविधियों को सीमित कर दिया था और लगातार अपने ठिकाने बदल रहे थे।
बताया जा रहा है कि बीते 15 दिनों से इजरायल और लारिजानी के बीच एक तरह की “छुपा-छुपी” चल रही थी। लारिजानी खुद को बचाने के लिए गुप्त ठिकानों पर शिफ्ट होते रहे, वहीं इजरायल अपनी खुफिया एजेंसियों और तकनीकी संसाधनों के जरिए उनकी लोकेशन ट्रैक करने में जुटा था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 13 मार्च को लारिजानी तेहरान में कुद्स रैली के दौरान सार्वजनिक रूप से नजर आए थे। इस दौरान उन्होंने अमेरिका और इजरायल को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ईरान पर हमला जारी रहा तो जवाब बेहद कठोर होगा। इसके बाद वे फिर से भूमिगत हो गए थे।
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, 16-17 मार्च की रात को तेहरान के बाहरी इलाके पर्दिस में एक हवाई हमले के दौरान उनकी मौत हुई। बताया जाता है कि वे उस समय अपनी बेटी से मिलने गए थे। इस ऑपरेशन को बेहद सटीक और समन्वित तरीके से अंजाम दिया गया।
इजरायली रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस मिशन के लिए फाइटर जेट्स को करीब 1600 किलोमीटर दूर तक भेजा गया। इजरायली सेना, यानी Israel Defense Forces के नेतृत्व और राजनीतिक स्तर पर तेज फैसलों ने इस ऑपरेशन को सफल बनाया।
अब सवाल उठता है कि आखिर ये “स्पेशल कैपेबिलिटीज” क्या हैं, जिनकी चर्चा हो रही है। दरअसल, यह इजरायल की बहुस्तरीय खुफिया प्रणाली का हिस्सा है, जिसमें मानव स्रोत, तकनीकी निगरानी और रियल-टाइम डेटा एनालिसिस शामिल होते हैं।
इसमें सबसे अहम है ह्यूमन इंटेलिजेंस यानी जमीनी स्तर पर मौजूद मुखबिर और एजेंट, जो दुश्मन के भीतर से जानकारी जुटाते हैं। इसके अलावा सिग्नल्स इंटेलिजेंस के जरिए एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन को इंटरसेप्ट किया जाता है, मोबाइल और अन्य डिवाइस की लोकेशन ट्रैक की जाती है और साइबर माध्यमों से नेटवर्क में सेंध लगाई जाती है।
सर्विलांस टेक्नोलॉजी भी इस पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। इसमें ड्रोन, सैटेलाइट इमेजरी, AI आधारित विश्लेषण और गुप्त ट्रैकिंग डिवाइस शामिल होते हैं। इन सभी स्रोतों से मिली जानकारी को एक साथ जोड़कर रियल-टाइम में निर्णय लिया जाता है और ऑपरेशन को अंजाम दिया जाता है।
हालांकि इजरायल ने “स्पेशल कैपेबिलिटीज” शब्द को जानबूझकर अस्पष्ट रखा है, ताकि इसकी वास्तविक तकनीक और रणनीति सार्वजनिक न हो सके। यह उसकी सुरक्षा नीति का हिस्सा है, जिससे दुश्मन उसकी क्षमताओं और कमजोरियों का अंदाजा न लगा सके।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन कितना नाजुक है। ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर लगातार खतरा बना हुआ है, वहीं इजरायल अपनी खुफिया और सैन्य ताकत का आक्रामक इस्तेमाल कर रहा है। आने वाले दिनों में इस घटना के व्यापक भू-राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।
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