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US Supreme Court on Trump Tariff: Trump's backup plan ready on the court's decision!
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US Supreme Court on Trump Tariff: कोर्ट के फैसले पर ट्रंप का बैकअप प्लान तैयार!
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Sat, 21 Feb 2026 02:41 AM IST
अमेरिका की सियासत में एक बार फिर संवैधानिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ से जुड़े मामले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले को “शर्मनाक” करार दिया है। अदालत ने 6-3 के बहुमत से उनके द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ को रद्द कर दिया। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने लिखा। कोर्ट ने साफ कहा कि 1977 के कानून के तहत राष्ट्रपति ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की।
रॉयटर्स के मुताबिक, फैसले के वक्त ट्रंप राज्यों के गवर्नरों के साथ बैठक कर रहे थे। कोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने दावा किया कि प्रशासन के पास “बैकअप प्लान” तैयार है और जरूरत पड़ी तो दूसरे कानूनों का सहारा लेकर फिर से टैरिफ लगाए जाएंगे। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में भी संकेत मिले हैं कि व्हाइट हाउस वैकल्पिक कानूनी रास्तों पर काम कर रहा है।
क्या था विवाद?
ट्रंप ने 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत आयात शुल्क लगाने का दावा किया था। उनका तर्क था कि अमेरिका के व्यापार घाटे और राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र उन्हें यह अधिकार है। लेकिन विरोधियों ने अदालत में दलील दी कि संविधान के मुताबिक कर और शुल्क लगाने की शक्ति विशेष रूप से कांग्रेस को दी गई है। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने आपातकालीन शक्तियों का दायरा बढ़ाकर इस्तेमाल किया।
ट्रंप के पास क्या विकल्प?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के पास अभी भी कुछ कानूनी रास्ते मौजूद हैं। उदाहरण के तौर पर, 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत अमेरिका लंबे समय से “अनुचित व्यापार प्रथाओं” के खिलाफ टैरिफ लगाता आया है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में चीन पर इसी धारा के तहत शुल्क लगाया था। हालांकि इसके लिए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि को पहले जांच करनी होती है और आमतौर पर सार्वजनिक सुनवाई भी करनी पड़ती है।
इसके अलावा 1974 के ही कानून की धारा 122 राष्ट्रपति को असंतुलित व्यापार की स्थिति में 150 दिनों तक 15 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की अनुमति देती है। खास बात यह है कि इसके लिए पूर्व जांच जरूरी नहीं है। लेकिन इतिहास में इस प्रावधान का उपयोग शायद ही कभी किया गया है।
व्यापार कानून की प्रोफेसर कैथलीन क्लॉसन का कहना है कि टैरिफ पूरी तरह खत्म होने की संभावना कम है। उनके मुताबिक, “राष्ट्रपति अन्य कानूनी शक्तियों का इस्तेमाल कर मौजूदा टैरिफ ढांचे को दोबारा स्थापित कर सकते हैं।”
आर्थिक असर कितना बड़ा?
विवादित टैरिफ का दायरा बेहद व्यापक है। इनसे खरबों डॉलर का वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ। 14 दिसंबर तक अमेरिकी सरकार ने लगभग 134 अरब डॉलर की वसूली की थी। वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार टैक्स फाउंडेशन का अनुमान है कि ट्रंप के व्यापार युद्ध के चलते 2025 में हर अमेरिकी परिवार पर औसतन 1,100 डॉलर का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
आगे क्या?
यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका और भारत पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते की रूपरेखा पर बातचीत आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसे में टैरिफ को लेकर कानूनी अनिश्चितता वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ा सकती है।
स्पष्ट है कि यह लड़ाई सिर्फ टैरिफ की नहीं, बल्कि राष्ट्रपति और कांग्रेस के संवैधानिक अधिकारों की भी है। ट्रंप का “बैकअप प्लान” कितना कारगर होगा, यह आने वाले दिनों में अमेरिकी राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेगा।
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