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Iranian Forces Open Fire on Three Ships: Iran Seizes Ship Bound for India, Opens Fire
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Iranian Forces Open Fire on Three Ships: ईरान ने भारत आ रहे इस जहाज को बनाया बंधक, की गोलीबारी
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Wed, 22 Apr 2026 09:13 PM IST
दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइफलाइन पर हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी कार्रवाई ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय जलसीमा में गुजर रहे व्यापारिक जहाजों पर फायरिंग ने न सिर्फ समुद्री सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि भारत समेत कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति को भी खतरे में डाल दिया है। शांति वार्ता की कोशिशों के बीच बढ़ता यह टकराव साफ संकेत दे रहा है कि हालात अब काबू से बाहर होते जा रहे हैं।
दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइफलाइन पर फिर गूंज उठी हैं गोलियों की आवाजें होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने अब वैश्विक संकट का रूप ले लिया है। एक तरफ शांति वार्ता की कोशिशें, दूसरी तरफ खुले समुद्र में टकराव हालात ऐसे हैं जहां हर गुजरता जहाज अब खतरे के साये में है…
पश्चिम एशिया में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और इसका सबसे बड़ा असर दिख रहा है दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में। बुधवार को ईरान की अर्धसैनिक इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने अंतरराष्ट्रीय जलसीमा से गुजर रहे तीन व्यापारिक जहाजों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इनमें से एक जहाज भारत की ओर आ रहा था, जिससे भारत समेत कई देशों की चिंता और बढ़ गई है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी बलों ने पहले एक कंटेनर जहाज को निशाना बनाया और फिर कुछ ही देर में दूसरे जहाज पर गोलियां चलाईं। जिन जहाजों को कब्जे में लिया गया, उनकी पहचान एमएससी फ्रांसिस्का और एपामिनोड्स के रूप में हुई है। इसके बाद तीसरे जहाज ‘यूफोरिया’ पर भी हमला किया गया, जो ईरानी तट के पास फंसा हुआ बताया जा रहा है। ईरानी मीडिया का दावा है कि इन जहाजों ने चेतावनी का पालन नहीं किया, इसलिए यह कार्रवाई की गई।
यह हमला ऐसे समय में हुआ जब डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्षविराम को अनिश्चितकाल तक बढ़ाने का ऐलान किया था, ताकि बातचीत का रास्ता खुल सके। लेकिन साथ ही अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी जारी रखने की बात भी कही, जिससे ईरान नाराज है। ईरान के अधिकारियों का साफ कहना है कि जब तक घेराबंदी खत्म नहीं होगी, तब तक कोई भी शांति वार्ता संभव नहीं है।
समुद्र में बढ़ता यह टकराव अब वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है, जो युद्ध शुरू होने के बाद करीब 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाती है। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है पेट्रोल-डीजल महंगा हो रहा है, ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ रही है और खाने-पीने की चीजों की कीमतें भी ऊपर जा रही हैं।
इस बीच, कूटनीतिक स्तर पर हालात पूरी तरह ठप नजर आ रहे हैं। पाकिस्तान इस तनाव को कम करने के लिए बातचीत की कोशिश कर रहा है और अगले दौर की वार्ता की मेजबानी करना चाहता है। लेकिन ईरान ने अब तक अपने प्रतिनिधिमंडल को भेजने की पुष्टि नहीं की है। मिस्र में मौजूद ईरानी राजनयिक मुजतबा फिरदौसी पोर ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपनी घेराबंदी नहीं हटाता, तब तक कोई भी बातचीत नहीं होगी।
इस संघर्ष की जड़ 28 फरवरी को हुए उन हवाई हमलों में है, जब अमेरिका और इस्राइल ने ईरान को निशाना बनाया था। तब से शुरू हुई यह जंग अब तक हजारों जिंदगियां ले चुकी है। आंकड़ों के मुताबिक, ईरान में 3,375 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, जबकि लेबनान में 2,290 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इस्राइल में भी नागरिक हताहत हुए हैं और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों को भी नुकसान हुआ है।
ईरान के तेवर फिलहाल नरम पड़ते नहीं दिख रहे हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने धमकी दी है कि वे दुश्मन को उसकी कल्पना से परे जवाब देंगे। वहीं लेबनान में हिजबुल्लाह और इस्राइल के बीच भी तनाव बना हुआ है।
कुल मिलाकर, समुद्र से लेकर जमीन तक हालात बेहद गंभीर हैं। जब तक कोई ठोस कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता, तब तक यह संकट और गहराता जाएगा और इसका असर पूरी दुनिया, खासकर आम आदमी की जिंदगी पर पड़ता रहेगा।
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