Bangladesh Election: ढाका-3 से अल्पसंख्यक हिंदू नेता गायेश्वर रॉय जीते, BNP की दो दशक बाद सत्ता में होगी वापसी
बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में बीएनपी के वरिष्ठ हिंदू नेता गायेश्वर चंद्र रॉय ने ढाका-3 सीट पर बड़ी जीत दर्ज की। उनकी यह सफलता ऐसे समय आई है जब देश में अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व चर्चा में है।
विस्तार
बांग्लादेश के 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव में एक अहम राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के वरिष्ठ नेता और अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से आने वाले गायेश्वर चंद्र रॉय ने ढाका-3 संसदीय सीट पर प्रभावशाली जीत दर्ज की है। सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, रॉय ने 99,163 वोट हासिल कर अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी मोहम्मद शाहिनुर इस्लाम को पराजित किया। शाहिनुर इस्लाम जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार थे। यह जीत 1971 में स्वतंत्रता के बाद ढाका से चुने गए पहले हिंदू सांसद के रूप में दर्ज की गई है।
अल्पसंख्यक समुदाय के लिए अहम संदेश
रॉय की जीत ऐसे समय में आई है जब देश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ कथित हमलों और उत्पीड़न की खबरें सामने आती रही हैं। दिसंबर में कट्टरपंथी युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बनी थी। भारत ने भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। ऐसे माहौल में एक हिंदू नेता का राजधानी क्षेत्र से जीतना राजनीतिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
खलना-1 में जमात का इकलौता हिंदू उम्मीदवार हारा
दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी द्वारा उतारे गए इकलौते हिंदू उम्मीदवार कृष्णा नंदी को खुलना-1 सीट से हार का सामना करना पड़ा। नंदी को 70,346 वोट मिले, जबकि बीएनपी के उम्मीदवार अमीर एजाज खान ने 1,21,352 वोट हासिल कर स्पष्ट जीत दर्ज की।
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बांग्लादेश चुनाव और बीएनपी का प्रदर्शन
बता दें कि बांग्लादेश में जारी सत्ता के लिए संघर्ष और घमासान के 18 महीनें के बाद हुए चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को बड़ा जनादेश मिला। मतगणना के ताजा आंकड़ों के अनुसार बीएनपी को दो तिहाई बहुमत मिले है। वहीं जबकि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन को अभी तक केवल 73 सीटें मिली हैं।
बांग्लादेश की संसद, जिसे जातीय संसद कहा जाता है, में कुल 300 सीटें हैं। इनमें से 299 सीटों पर मतदान हुआ। शेरपुर-3 सीट पर एक उम्मीदवार की मृत्यु के कारण चुनाव रद्द कर दिया गया। बहुमत के लिए 150 सीटें जरूरी होती हैं। इसके अलावा 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। इन सीटों का बंटवारा 300 सामान्य सीटों पर पार्टियों के प्रदर्शन के आधार पर किया जाता है।
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