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वेनेजुएला में चमत्कार: आठ दिन बाद मलबे से जिंदा निकला सुरक्षा गार्ड, भूकंप में अब तक 2,295 लोगों की मौत

Fri, 03 Jul 2026 04:45 AM IST
Pavan पीटीआई, कैटिया ला मार
पीटीआई, कैटिया ला मार Published by: Pavan Updated Fri, 03 Jul 2026 04:45 AM IST
सार

वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के आठ दिन बाद 43 वर्षीय सुरक्षा गार्ड हर्नान अल्बर्टो गिल फ्लोरेस को मलबे से जिंदा निकाला गया। करीब 100 घंटे चले बचाव अभियान में कई देशों की टीमों ने हिस्सा लिया। वहीं, भूकंप में अब तक 2,295 लोगों की मौत, 11 हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं और राहत-बचाव कार्य जारी है।

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Miracle in Venezuela: Security guard pulled alive from rubble after 8 days; earthquake death toll reaches 2295
आठ दिन बाद मलबे से जिंदा निकला गार्ड - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

वेनेजुएला में 24 जून को आए दो भीषण भूकंपों के आठ दिन बाद एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने पूरे देश को उम्मीद की नई किरण दी। बचाव दल ने 43 वर्षीय सुरक्षा गार्ड हर्नान अल्बर्टो गिल फ्लोरेस को एक ढही हुई इमारत के बेसमेंट से जिंदा बाहर निकाल लिया। वह पिछले आठ दिनों से मलबे के नीचे फंसा हुआ था। बचावकर्मियों ने गुरुवार तड़के करीब 100 घंटे तक लगातार चले अभियान के बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाला। जब उसे स्ट्रेचर पर ऑक्सीजन मास्क के साथ बाहर लाया गया तो वहां मौजूद लोगों और अलग-अलग देशों से आए राहतकर्मियों ने तालियां बजाकर उसका स्वागत किया। कई बचावकर्मी खुशी से गले मिले और इस पल को चमत्कार बताया।
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मलबे के नीचे बना रहा हवा का छोटा हिस्सा
हर्नान समुद्र तटीय शहर ला गुआइरा के गैलेरियास प्लाया ग्रांडे शॉपिंग सेंटर में नाइट शिफ्ट के सुरक्षा गार्ड थे। भूकंप आने के समय वह अपनी छोटी सुरक्षा केबिन में मौजूद थे। पूरी इमारत ढह गई, लेकिन उनकी केबिन पूरी तरह नहीं टूटी। इसी वजह से उनके आसपास हवा का एक छोटा हिस्सा बचा रहा, जिससे उनकी जान बच गई।
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पानी और तरल भोजन पहुंचाकर बचाई जान
राहतकर्मियों ने सप्ताहांत में सबसे पहले उनसे संपर्क किया। इसके बाद एक संकरे रास्ते से उन्हें लगातार पानी और तरल भोजन पहुंचाया गया। मलबे की अस्थिर स्थिति, लगातार बारिश और बार-बार आ रहे झटकों के बावजूद टीमों ने सावधानी से सुरंग बनाकर उन्हें बाहर निकाला। कोस्टा रिका रेड क्रॉस की बचावकर्मी मिन्यार कोलाडो ने बताया कि जब पहली बार उनसे बात हुई तो उन्होंने कहा था कि उनकी पत्नी को यह न बताया जाए कि वह जिंदा हैं, क्योंकि उन्हें डर था कि शायद वे बच नहीं पाएंगे। हालांकि बचाव दल ने हार नहीं मानी और आखिरकार उन्हें सुरक्षित निकाल लिया।

पत्नी ने कहा- अंधेरे में उम्मीद की किरण मिली
हर्नान की पत्नी गुस्बिमार गोंजालेज ने बताया कि कई दिनों तक उन्हें लगा कि उनके पति अब नहीं बचेंगे। लेकिन जब यह खबर मिली कि राहतकर्मियों ने उनसे संपर्क कर लिया है तो उन्हें उम्मीद की नई किरण दिखाई दी। दंपति के दो छोटे बच्चे हैं, जिनकी उम्र 8 और 10 वर्ष है।



कई देशों की टीम ने मिलकर चलाया अभियान
इस अभियान में वेनेजुएला के अलावा चिली, कोस्टा रिका, अमेरिका, पुर्तगाल, मैक्सिको और अल सल्वाडोर के विशेषज्ञ राहतकर्मियों ने हिस्सा लिया। टेलीस्कोप कैमरे की मदद से लगातार हर्नान पर नजर रखी गई और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की योजना बनाई गई।


मौत और तबाही के बीच उम्मीद की खबर
हालांकि हर्नान का बच जाना राहत की खबर है, लेकिन पूरे वेनेजुएला में हालात अब भी बेहद गंभीर हैं। 24 जून को आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के लगातार दो भूकंपों ने उत्तरी वेनेजुएला में भारी तबाही मचाई। हजारों इमारतें ढह गईं और ला गुआइरा सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका बना। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 2,295 लोगों की मौत, 11 हजार से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं, जबकि हजारों परिवार राहत शिविरों या खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। मलबे से लगातार शव निकलने के कारण इलाके में बदबू फैल गई है और स्वास्थ्य संकट का खतरा भी बढ़ गया है।

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सरकार की राहत व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
भूकंप के बाद राहत और बचाव कार्य को लेकर कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज की सरकार की आलोचना हो रही है। कई लोगों का कहना है कि स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय राहत दलों ने सरकार की तुलना में कहीं ज्यादा प्रभावी काम किया है। हालांकि अमेरिका ने वेनेजुएला सरकार का बचाव करते हुए कहा है कि राहत कार्य स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर किया जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, राहत अभियान में सहयोग के लिए करीब 900 अमेरिकी सैन्यकर्मी भी तैनात हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा के बाद राहत, पुनर्वास और स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे बड़ी चुनौती अब भी वेनेजुएला के सामने बनी हुई है।
 
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