अब क्या करेंगे ट्रंप?: ईरान के यूरेनियम भंडार पर कब्जा सबसे जटिल अभियान, केवल हवाई हमलों से संभव नहीं है मिशन
क्या अमेरिका ईरान के गहराई में छिपे यूरेनियम भंडार पर कब्जा कर सकता है? क्या इसके लिए सिर्फ हवाई हमले काफी होंगे? फिलहाल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप इस विकल्प पर विचार कर रहे हैं, लेकिन इसे बेहद जोखिम भरा बताया जा रहा है। मानना है कि यह मिशन बिना जमीनी सैनिकों के संभव नहीं है।
विस्तार
ईरान के गहराई में छिपे संवर्धित यूरेनियम भंडार को जब्त करने के संभावित अमेरिकी सैन्य विकल्प पर चर्चा तेज हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस विकल्प पर विचार कर रहे हैं, जिसका घोषित उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है। हालांकि सैन्य विशेषज्ञों और पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह अभियान बेहद जटिल, लंबा और उच्च जोखिम वाला होगा। इसमें जमीनी सैनिकों की तैनाती से लेकर बहु-चरणीय सैन्य कार्रवाई तक शामिल हो सकती है।
बीबीसी की एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। विशेषज्ञों के अनुसार इस मिशन को केवल हवाई हमलों के जरिये अंजाम देना संभव नहीं है। इसके लिए अमेरिकी जमीनी बलों की तैनाती जरूरी होगी। पूर्व उप सहायक रक्षा मंत्री मिक मुलरॉय ने इसे इतिहास के सबसे जटिल विशेष अभियानों में से एक बताया है। संभावित योजना को लेकर काफी विचार चल रहा है।
यूरेनियम को हटाना या मौके पर निष्क्रिय करना दोनों विकल्प जटिल
अभियान के बाद अमेरिका को तय करना होगा कि यूरेनियम को देश से बाहर ले जाया जाए या मौके पर ही उसे निष्क्रिय किया जाए। विशेषज्ञ जोनाथन रुहे के अनुसार मौके पर निष्क्रिय करना अधिक समय लेने वाला व जटिल होगा, जबकि उसे अमेरिका ले जाकर निष्क्रिय करना अपेक्षाकृत तेज विकल्प हो सकता है। दोनों ही विकल्प जोखिम भरे हैं।
लोकेशन की अनिश्चितता मिशन की सबसे बड़ी चुनौती
पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारी जेसन कैंपबेल के अनुसार मिशन की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि यूरेनियम की सटीक लोकेशन कितनी स्पष्ट है। यदि यह कई स्थानों पर फैला हुआ है, तो समस्या कई गुना बढ़ जाएगी। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के महानिदेशक राफेल ग्रोसी के मुताबिक अधिकांश उच्च संवर्धित यूरेनियम इस्फहान में है, जबकि कुछ नतांज में भी मौजूद है। हालांकि 2025 के अमेरिकी-इस्राइली एयर अभियान के बाद निरीक्षकों को हटा लिया गया था, जिससे सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
लॉजिस्टिक और युद्धक्षेत्र के जोखिम
उपग्रह चित्रों से संकेत मिलता है कि इस्फहान जैसे स्थलों पर सुरंगों के प्रवेश द्वारों को मिट्टी से बंद कर दिया गया है, जिससे अंदर पहुंचना बेहद कठिन है। अमेरिकी हमलों में यहां क्षति पहुंची है, जिसके चलते सैनिकों को भारी मशीनरी से खुदाई करनी पड़ सकती है। इस्फहान ईरान में 300 मील अंदर स्थित है, जिससे अमेरिकी सैनिकों को मेडिकल इवैकुएशन व सप्लाई मुश्किल होगी। यहां लॉजिस्टिक्स और युद्धक्षेत्र के कई तरह के जोखिम भी उठाने पड़ सकते हैं।
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